रूस ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सीट की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार, 26 सितंबर को UN की जनरल असेंबली में भाषण दिया. इस दौरान उन्होंने भारत और ब्राजील के लिए UNSC में स्थायी सीट की पैरवी की. सर्गेई ने कहा कि रूस चाहता है कि परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की अगुवाई बढ़े. हालांकि, उन्होंने UNSC में पश्चिमी देशों का प्रतिनिधित्व न बढ़ाने की बात भी कही.
'UNSC में भारत को स्थायी सीट मिले', रूस के अलावा इस देश ने भी की अपील
Russia और Mauritius ने भारत के UNSC में स्थायी सीट की दावेदारी का जोरदार समर्थन किया है. दोनों देशों ने कहना है कि भारत को यह सीट मिलनी चाहिए. क्योंकि, यह वैश्विक मामलों में उसके भूमिका के मुताबिक है.

सर्गेई ने भाषण में ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को UNSC में सीटें देने पर ज्यादा जोर दिया. इसमें दक्षिण एशियाई देश भारत और दक्षिण अमेरिकी ब्राजील का नाम सबसे आगे रहा. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों को काउंसिल में सीट न देने की बात कही. सर्गेई ने कहा,
UNSC में सुधार के तहत पश्चिमी देशों को ज्यादा सीटें नहीं दी जा सकती हैं. खासतौर पर जर्मनी और जापान को. क्योंकि, ये दोनों ही देश सैन्यवाद और प्रतिशोधवाद (Militarism and Revanchism) की तरफ बढ़ रहे हैं.
रूसी विदेश मंत्री ने आगे कहा,
'अफ्रीकी महाद्वीप के हितों पर ध्यान दें'‘हम एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के नेतृत्व को बढ़ाने के पक्ष में हैं. काउंसिल में स्थायी सीट के लिए भारत और ब्राजील के दावेदारी का समर्थन करते हैं.’
सर्गेई ने कहा कि परिषद में सुधार के तहत अफ्रीकी महाद्वीप के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. काउंसिल में चाहे जैसे भी सुधार हों, पर उसकी वजह से स्थायी सदस्यों के अधिकार कमजोर नहीं होने चाहिए.
रूस के अलावा मॉरीशस भी यूएनएससी की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के सपोर्ट में है. मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने भी अपने भाषण में भारत के दावेदारी का साथ दिया. रामफुल ने कहा,
5 देशों के पास वीटोहम परिषद सुधार पर G4 और L69 का सपोर्ट करते हैं. साथ ही स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करते हैं. यह वैश्विक मामलों में उसकी भूमिका के मुताबिक है.
बता दें कि UNSC में मौजूदा समय में 15 सीटें हैं. इसके 5 स्थायी देशों चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के पास वीटो पावर है. इसके अलावा 10 सीटें अस्थायी हैं. जिन्हें हर 2 साल के लिए चुने गए देशों को दिया जाता है.
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रूस के लगातार समर्थन के बावजूद चीन का समर्थन भारत को सालों से नहीं मिल रहा है. चीन नहीं चाहता कि भारत को UNSC का स्थायी सदस्य बनाया जाए. उसे डर है कि इससे एशिया में उसकी ताकत कमजोर होगी.
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