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कहानी उस जवान की, जिसे जानकर राष्ट्रपति कोविंद भी रोने लगे

अशोक चक्र से सम्मानित करते वक्त राष्ट्रपति कोविंद की आंखों में आंसू थे.

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फोटो - thelallantop
तारीख थी 18 नवंबर 2017. जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा जिले के चंदरनगर गांव में कुछ आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली थी. इन आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का जिम्मा राष्ट्रीय राइफल्स के पास था. राष्ट्रीय राइफल्स की टुकड़ी में इंडियन एयरफोर्स के गरुण कमांडोज भी होते हैं. गरुण कमांडो वायुसेना की एक टुकड़ी है, जो जमीन पर चल रहे ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाती है. 2016 में जब पठानकोट एयरबेस पर हमला हुआ था, तो तय किया गया था कि भारतीय वायुसेना के गरुण कमांडोज की टुकड़ी राष्ट्रीय राइफल्स के साथ अटैच रहेगी. जनवरी 2016 में इसपर फैसला हुआ था. इसके बाद गरुण कमांडोज की टुकड़ी को राष्ट्रीय राइफल्स के साथ अटैच किया गया था. कश्मीर में जब आतंवादियों के खिलाफ ऑपरेशन करना था, तो राष्ट्रीय राइफल्स के जवान और गरुण कमांडोज की टीम मौके पर पहुंची. इस टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे ज्योति प्रकाश निराला.

ऑपरेशन के दौरान टीम का नेतृत्व ज्योति प्रकाश निराला कर रहे थे.

राष्ट्रीय राइफल्स और गरुण टुकड़ी के साथ जब ज्योति प्रकाश निराला गांव पहुंचे, तो वहां एक घर में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली. जवानों ने चारों तरफ से उस घर को घेर लिया, वहीं खुद निराला उस घर के एकदम पास में घात लगाकर खड़े हो गए. जब सेना के जवानों ने आतंकवादियों से आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, तो आतंकियों ने गोली चला दी. सेना के जवानों की ओर से भी फायरिंग हुई. इस दौरान छह आतंकवादी फायरिंग करते हुए घर से बाहर भागने की कोशिश करने लगे. आतंकियों की गोली ज्योति प्रकाश निराला को भी लग गई. वहीं ज्योति प्रकाश ने भी गोलियों और हथगोलों से आतंकियों पर हमला कर दिया और अकेले ही तीन आतंकियों को मार दिया. इस दौरान आतंकियों की गोली लगने की वजह से वो शहीद हो गए. श्रीनगर में इसी ऑपरेशन के दौरान सेना की तरफ से की गई कार्रवाई में आतंकी मसूद अजहर के भतीजे तल्हा रशीद को मारा गया था.

शहादत के बाद ज्योति प्रकाश निराला को एयरफोर्स ने राजकीय सम्मान दिया था.

ज्योति प्रकाश निराला की बहादुरी के किस्से राष्ट्रीय राइफल्स के साथ ही इंडियन एयरफोर्स के लिए भी मिसाल बन गई. उनकी शहादत के बाद सरकार की ओर से उन्हें अशोक चक्र सम्मान से सम्मानित करने के लिए चुना गया. जब देश की किसी दूसरे देश से लड़ाई नहीं चल रही होती है, तो इस दौरान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता, शूरता और बलिदान के लिए जो सबसे बड़ा सम्मान दिया जाता है, वो अशोक चक्र है. इसे मरने के बाद भी दिया जाता है. ज्योति प्रकाश निराला के बलिदान को देखते हुए उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित करने का फैसला लिया गया. निराला इंडियन एयरफोर्स के पहले ऐसे जवान हैं, जिन्हें ग्राउंड ऑपरेशन के लिए ये सम्मान दिया गया है. हर साल 26 जनवरी को राष्ट्रपति इस सम्मान को देते आए हैं.

शहीद ज्योति प्रकाश की पत्नी को सम्मान देने के दौरान राष्ट्रपति भावुक हो गए.

ज्योति प्रकाश निराला बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले थे. 31 साल की उम्र में उनकी शहादत के बाद परिवार में बूढ़े मां-बाप हैं. इसके अलावा उनकी पत्नी और एक बेटी भी है. शहीद निराला की तीन बहनें भी हैं, जिनकी अभी शादी नहीं हुई है. 26 जनवरी 2018 को जब देश अपने गणतंत्र की 69वीं वर्षगांठ मना रहा था, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शहीद ज्योति प्रकाश निराला की पत्नी को ये सम्मान सौंप रहे थे. उनकी पत्नी को ये सम्मान देते हुए राष्ट्रपति भावुक हो गए और उनकी आंखो से आंसू आ गए.


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