
इस एक दौरे से माइक गैटिंग की भद्द पिट गई थी.
ये टीम इंग्लैंड की थी. माइक गैंटिंग की कप्तानी वाली इस इंग्लिश टीम ने बिना इस बात की परवाह किए कि साउथ अफ्रीका में क्रिकेट बैन है यहां क्रिकेट खेलने के लिए पहुंच गए. ये वो दौर था जब नेल्सन मंडेला रंगभेद के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ रहे थे और दुनिया भर में साउथ अफ्रीका पर इस नीति को बदलने का दबाव बन रहा था. और लोग यहां की रंगभेद की नीति के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, साल 1990 में इसी हफ्ते मंडेला को 27 साल बाद रिहा किया गया था.

- विरोध इतना बढ़ा कि इंग्लैंड की टीम को बीच में वापिस जाना पड़ा.
ये वो देश जिसने पूरे 20 साल इंटरनेशनल क्रिकेट का बैन झेला. 1971 से लेकर 1991 तक साउथ अफ्रीका को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने इस मुल्क की रंगभेद नीति के चलते बैन कर दिया था. उस दौर में इस देश की ये पॉलिसी थी कि वो सिर्फ गोरी नस्ल के देशों यानी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड से ही खेलेगी. साथ ही अपनी टीम में भी सिर्फ गोरी चमड़ी के लोगों को ही शामिल करेगी. दुनिया भर में इसके विरोध में आवाजें उठीं और फिर साउथ अफ्रीका को ये बैन झेलना पड़ा. साउथ अफ्रीका ने 1991 में इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की और अपना पहला वनडे कोलकाता में भारत के खिलाफ खेला.
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