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उस बिल की 5 बातें जिसके विरोध में पूरे देश के डॉक्टर हड़ताल पर हैं

आईएमए को खत्म करने के साथ ही कई बदलावों का है प्रस्ताव.

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नेशनल मेडिकल बिल के विरोध में देश भर के डॉक्टरों ने 12 घंटे काम ठप रखा.
देश भर के करीब 3 लाख डॉक्टर काम धाम बंद करके हड़ताल पर हैं. प्राइवेट से लेकर सरकारी तक. प्राइवेट वाले खुलकर कर रहे हैं. सरकारी वाले छुप कर. नेतृत्व इंडियन मेडिकल असोसिएशन (आईएमए) कर रहा है. हड़ताल हालांकि 12 घंटे की ही है. माने सुबह 6 से शाम 6 बजे तक की. मगर पहले ही डॉक्टरों की किल्लत झेल रहे लोगों को इससे दिक्कत होना लाजमी है. इसकी वजह है एक बिल जोकि 2 जनवरी को लोकसभा में पेश किया गया. नाम है 'नेशनल मेडिकल बिल'. बिल में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिससे डॉक्टरों को दिक्कत है और वो सरकार को इसको ना लाने की अपील कर चुके हैं. फिलहाल संसद में इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया है. बजट सेशन से पहले इस पर रिपोर्ट मांगी गई है. इस सबके बीच इस बिल में क्या है और डॉक्टर क्यों विरोध कर रहे हैं, ये समझ लीजिए-
1. आईएमए को भंग कर नए कमीशन का गठन
माने डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था इंडियन मेडिकल असोसिएशन को खत्म करके एक नया ऑर्गनाइजेशन नैशनल मेडिकल कमीशन बनाया जाएगा. इसकी गवर्निंग बॉडी में 25 सदस्य होंगे, जिसमें 5 डॉक्टर्स होंगे. बाकी 20 लोगों को सरकार मनोनीत करेगी.
क्या है विरोध- डॉक्टरों का विरोध तो पहले इसी बात से है कि इस नए कमीशन की जरूरत क्या है. हड़ताल कर रहे डॉक्टर योगेंद्र सांगवान ने बताया कि इस कमीशन की बॉडी में 20 लोग बाहर से आ रहे हैं. डॉक्टरों की संख्या खाली 5 होगी. ये गलत है. इससे डॉक्टर्स के असोसिएशन में आईएएस लॉबी हावी हो जाएगी. डॉक्टर अपनी ही संस्था में अल्पमत में होंगे. डॉक्टरों का कहना है कि क्या बार काउंसिल ऑफ इंडिया में सरकार कभी ऐसा कर सकती है. नहीं तो हमारे साथ ऐसा क्यों? डॉक्टरों की संस्था में डॉक्टर ही होने चाहिए.
आईएमए को भंग कर नई बॉडी बनाने के प्लान में है सरकार.
आईएमए को भंग कर नई बॉडी बनाने के प्लान में है सरकार.

2. मेडिकल कॉलेज में बढ़ेगा प्राइवेट कॉलेजों का दखल
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में फिलहाल 15% सीटों पर ही कॉलेज अपनी मर्जी से एडमिशन ले सकते हैं. बाकी की सीटों पर सरकारी नियंत्रण है. मगर अब सरकार इस कोटे को बढ़ाकर 60% करने जा रही है. माने 60% सीटों पर किसका एडमिशन हो, ये प्राइवेट कॉलेज तय करेंगे.
क्या है विरोध- लखनऊ में हड़ताल की कमान संभाल रहे डॉ. पीके गुप्ता ने कहा कि इससे 40 प्रतिशत सीटों पर ही सरकार का नियंत्रण रह जाएगा. इससे सभी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में मनमानी फीस वसूले जाने लगेगी. सीधा असर मेडिकल की पढ़ाई करने आने वाले स्टूडेंट्स पर पड़ेगा. माने डॉक्टर बनना महंगा हो जाएगा.
मेडिकल की पढ़ाई हो सकती है महंगी.
मेडिकल की पढ़ाई हो सकती है महंगी.

3. एमबीबीएस के बाद एक और एग्जाम देना होगा
मौजूदा समय में एमबीबीएस में एडमिशन लेने के लिए एंट्रेंस टेस्ट देना होता है. मगर इस बिल के पास होने के बाद एमबीबीएस करने के बाद भी एग्जाम देना होगा. इसे एक तरह का एग्जिट टेस्ट मानिए. इसे पास करने के बाद ही डॉक्टर प्रैक्टिस कर सकेंगे.
क्या है विरोध- डॉक्टरों का कहना है कि पहले ही उन्हें ढेरों एग्जाम देने होते हैं, तब उनको डिग्री मिलती है. करीब 6 साल लग जाते हैं और इसके बाद एक और एग्जिट टेस्ट डॉक्टरों के साथ ज्यादती है. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा वकीलों या किसी और पेशे में तो नहीं होता तो डॉक्टरों के साथ क्यों?
पीजी करने में भी कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है.
पीजी करने में भी कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है.

4. एमबीबीएस किए बिना भी लिख सकेंगे एलोपैथिक मेडिसिन
एलोपैथिक मेडिसिन का डॉक्टर होने के लिए फिलहाल न्यूनतम योग्यता एमबीबीएस होनी चाहिए. मगर इस बिल के लागू होने के बाद ऐसा नहीं होगा. इससे आयुर्वेदिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होमियोपैथी की योग्यता रखने वाले डॉक्टर भी एलोपैथिक मेडिसिन लिख सकेंगे और इसकी प्रैक्टिस कर सकेंगे.
क्या है विरोध- डॉक्टरों का कहना है कि इससे इलाज की क्वॉलिटी में फर्क पड़ेगा. यूनानी और आयुर्वेद की पढ़ाई करने वाला डॉक्टर भला एलोपैथी की दवाएं कैसे लिख सकता है. उसे इसकी सटीक जानकारी ही नहीं होगी. इससे झोलाछाप डॉक्टरों का वर्चस्व और बढ़ जाएगा. और मरीजों को इसका अंजाम भुगतना होगा. डॉ. योगेंद्र सांगवान ने बताया कि कुछ साल पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने बिना एमबीबीएस किए हुए डॉक्टरों पर एलोपैथी दवाएं लिखने पर सख्ती की थी. ऐसा करते पाए जाने पर 3 साल की सजा का भी प्रावधान किया था. ऐसे में बिल का ये प्रावधान दुर्भाग्यपूर्ण है.
देश भर में डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन.
देश भर में डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन.

5. पीजी कोर्स में एमबीबीएस के अलावा वाले भी ले सकेंगे एडमिशन
फिलहाल जो मेडिकल से जुड़े पी.जी. कोर्सेज हैं, उनमें सिर्फ एमबीबीएस पास कर चुके डॉक्टर ही एडमिशन ले सकते हैं. मगर इस बिल के पास हो जाने के बाद आयुर्वेदिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होमियोपैथी की योग्यता रखने वाले डॉक्टर भी पीजी कोर्स में एडमिशन ले सकेंगे.
क्या है विरोध- डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा समय में जितनी भी पी.जी. सीटें देश में हैं, उनसे कई गुना ज्यादा एमबीबीएस डिग्री वाले ही इसमें अप्लाई करते हैं. माने पहले से ही देश में सीटों की कमी है. फिर इन लोगों को भी इसमें शामिल करने से जो एमबीबीएस करे हुए अच्छे डॉक्टर हैं, उनका हक मारा जाएगा.
तो ये वो 5 चीजें हैं, जिनका विरोध डॉक्टर प्रमुखता से कर रहे हैं. साथ ही एक दिन का प्रदर्शन किया. आगे की क्या रणनीति होगी, इस सवाल पर जवाब देते हुए आईएमए के प्रेसिडेंट केके अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल तो देश भर के डॉक्टर प्रोटेस्ट कर रहे हैं. अब हमारी नजर संसद में होने वाली बहस पर होगी. आगे की रणनीति हम इस बहस को देखने के बाद बनाएंगे. वहीं, संसद ने इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज फिलहाल संकट टाल दिया है. अब देखने वाला होगा कि आगे क्या होता है.


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