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भीमा कोरेगांव की हिंसा के बाद रामदास अठावले ने संसद में इन दो मर्डर केस का जिक्र क्यों किया

एक ही जिले में हुई दो हत्याओं में आए अदालत के फैसले ने बवाल को और बढ़ा दिया है.

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भीमा कोरेगांव में हिंसा का विरोध करते हुए दलित संगठन

महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगांव की हिंसा के बाद मोदी सरकार में सामाजिक न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री और महाराष्ट्र के दलित नेता रामदास अठावले का सांसद में दिया बयान बहुत मानीखेज है. अठावले ने अपने बयान में न्याय मिलने की प्रक्रिया में होने वाले भेदभाव की तरफ इशारा किया है. अठावले ने अपने बयान में कहा कि कोपारडी में नाबालिग लड़की के बलात्कार और हत्या के मामले में तीनों आरोपियों को मौत की सजा मिल गई, फिर भी मराठा नाराज हैं. लेकिन दलित किशोर नितिन आगे की हत्या में सभी आरोपी गवाहों के पलटने के बाद छूट गए. दलितों को लगता है कि अदालत ने न्याय नहीं, अन्याय किया है. अठावले अपने बयान में जिन दो हत्याओं का जिक्र कर रहे थे, उन्होंने महाराष्ट्र में काफी सियासी तूल पकड़ा था. क्या थीं ये दोनों घटनाएं?

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भीमा कोरेगांव में हिंसा के विरोध में प्रदर्शन करते दलित
भीमा कोरेगांव में हिंसा के विरोध में प्रदर्शन करते दलित

महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक कस्बा है खरडा. 1795 के साल में यह एक छोटा सा गांव हुआ करता था. तब 21 साल का एक नौजवान पेशवा यहां बड़ी बेताबी से पहलकदमी कर रहा था. नाम माधव राव. उसे अपनी जिंदगी के पहले बड़े युद्ध का नेतृत्व करना था. सामने था हैदराबाद का निजाम. मराठा साम्राज्य के लिए यह युद्ध निर्णायक साबित हुआ. निजाम की फ़ौज इस जंग में बुरी तरह पिटी और मराठों ने संधि के नाम पर उनसे तीन करोड़ रुपए वसूले. अमहदनगर का छोटा सा गांव इस फैसलाकुन जंग की वजह से इतिहास में दर्ज हो गया. 219 साल बाद खरडा एक बार फिर से सुर्खी में था. वजह थी एक 17 साल के दलित नौजवान की हत्या.

28 अप्रैल, 2014. 12वीं क्लास में पढ़ने वाला नितिन आगे सुबह 7.30 बजे स्कूल पहुंचा. दोपहर तीन बजे पेड़ पर लटकी लाश को नीचे उतारा गया. दरअसल पूरा मामला यह है कि महार जाति से आने वाले नितिन को अपने ही स्कूल में 10वीं क्लास में पढ़ने वाली एक मराठा लड़की से प्यार था. इसके चलते इस दलित नौजवान की हत्या कर दी गई. उस दिन स्कूल पहुंचने के बाद नितिन के साथ क्या हुआ, इसके कई बयान हैं.

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नितिन आगे की तस्वीर के साथ उनके माता-पिता (फोटो क्रेडिट: change.org)
नितिन आगे की तस्वीर के साथ उनके माता-पिता (फोटो क्रेडिट: change.org)

स्कूल में पढ़ने वाले कुछ लड़कों ने नितिन को सचिन गोलेकर की बहन के साथ देखा. स्कूल के लड़कों ने नितिन को पीटा और इस बात की खबर सचिन को भी दे दी. सचिन अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ स्कूल पहुंचा और नितिन को पीटना शुरू किया. इसके बाद वो नितिन को स्कूल से उठाकर अपने रिश्तेदार शेषराव येओले के ईंट भट्टे पर ले गए. दोपहर में नितिन की लाश एक पेड़ से लटकी हुई पाई गयी.

पुलिस ने इस मामले में कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया. इसमें लड़की का भाई सचिन गोलेकर और उसका रिश्तेदार शेषराव येओले मुख्य अभियुक्त थे. 24 नवंबर, 2017 को अहमदनगर कोर्ट ने इस मामले में फैसला देते हुए सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया. इस मुकदमे में कुल 26 गवाह थे. इसमें से 16 चश्मदीद गवाह थे जो कि बाद में अपने बयान से पलट गए.


अहमदनगर में नाबालिग मराठा लड़की की रेप के बाद हत्या के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन राज्यव्यापी आंदोलन में बदल गया
अहमदनगर में नाबालिग मराठा लड़की के रेप और हत्या के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन राज्यव्यापी आंदोलन में बदल गया था

अदालत के इस फैसले के ठीक चार दिन पहले अहमदनगर कोर्ट ने बलात्कार और हत्या के एक और केस में फैसला सुनाया था. मामला 13 जुलाई, 2016 का था. अहमदनगर के ही कोपारडी गांव में एक 14 साल की मराठा लड़की अपने दादा के घर से अपने घर लौट रही थी. रास्ते में तीन लड़कों ने उसे पकड़कर गैंग रेप किया. इसके बाद लड़की की हत्या कर दी गई. इस मामले के तीनों आरोपी दलित थे.

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इस घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में मराठों ने मौन मार्च निकाला. इस आंदोलन के दबाव के चलते सरकार को केस फास्ट ट्रैक अदालत के हवाले करना पड़ा. सरकार की तरफ से पीड़िता का पक्ष रखने के लिए उज्ज्वल निकम को नियुक्त किया गया. 20 नवंबर को अहमदनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाई. 24 स्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला सुनाया गया था.




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