राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनों के किराए में जो 'सर्ज प्राइसिंग' हुआ है (इसका सर्जिकल स्ट्राइक वाले सर्ज से कोई लेना-देना नहीं है), उसकी वजह से इन ट्रेनों से सफर करना महंगा हो गया है. जब कम किराए ट्रेन में टिकट नहीं मिलता है तो लोग दिल कर्रा करके एक बार इन ट्रेनों का मुंह भी देख लेते हैं, लेकिन अब ये भी दूभर हो जाएगा. प्लेन के किरायों में तो पहले से 'सर्ज प्राइसिंग' लागू है और 9 सितम्बर से इन तीनों ट्रेनों में भी लागू हो गया है.
अबे हवाई जहाज ट्रेन से सस्ता हो गया है, जाओगे!
रेलवे मिनिस्ट्री ने किराए के मामले में सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया है.

अब आप पूछेंगे कि सर्ज प्राइसिंग होता क्या है. देखो क्या होता है कि जब प्लेन में सीटों की डिमांड बहुत ज्यादा हो जाती है तो बची हुई सीटों का किराया उसी हिसाब से बढ़ता चला जाता है. रेलवे मिनिस्ट्री ने यही फंडा अब ट्रे्नों में भी शुरू कर दिया है. सर्ज प्राइसिंग की घोषणा करते हुए रेलवे ने कहा, 'हर 10 फीसदी सीटें बुक होने के बाद बेस फेयर 10% बढ़ता चला जाएगा. फ्लेक्सी फेयर अपने बेस फेयर से मैक्सिमम डेढ़ गुना तक बढ़ सकता है.'

रेलवे की इसी पॉलिसी का फायदा उठाकर जनता को लपेटने के लिए एयरलाइन कंपनियां अपने यहां स्मार्ट प्राइसिंग सिस्टम लागू कर रही हैं. यही वजह है कि आजकल लोग ट्रेन के बजाय प्लेन से ट्रैवल करने में ज्यादा हिचकते नहीं हैं. इससे लोगों को डबल फायदा हो रहा है. एक तो पैसा भी कम लगता है और दूसरा टाइम भी बच जाता है.
ट्रैवल ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेलवे में सर्ज प्राइसिंग आने के बाद एयरलाइन कंपनियों ने फटाक से इसका फायदा उठाया और 'स्मार्ट प्राइसिंग' ले आए. रेलवे में सर्ज प्राइसिंग के एक दिन बाद ही एयर इंडिया ने 'उड़ो दिल खोल के' स्कीम शरू की, जिसमें वेटिंग लिस्ट वाले ट्रेन पैसेंजर्स को फ्लाइट की टिकट ऑफर की जाएगी. वो भी ट्रेन के टू-टियर एसी से भी कम दाम में.

अब मान लीजिए कि किसी को दिल्ली से गोवा जाना है, जो विंटर डेस्टिनेशन के लिए पूरे इंडिया में फेमस है. तो उसे दिसंबर के आखिरी हफ्ते में सिर्फ एयर टिकट सिर्फ 4,100 रुपए में मिल जाएगा. वहीं जनवरी के दूसरे हफ्ते में और भी कम, सिर्फ 3600 रुपए में उपलब्ध है.
इसी बीच अगर आप राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली टू गोवा का टिकट लेते हैं तो फर्स्ट एसी का किराया 6,165 रुपए और सेकेंड एसी का किराया 5,310 रुपए पड़ेगा. मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे मेट्रो सिटी के लिए भी फ्लाइट से जर्नी करना इन ट्रेनों के मुकाबले सस्ता है. वक्त तो बचेगा और थकान भी कम ही होगी. वैसे भी, इंडियंस का उड़ने का शौक किसी से छिपा तो है नहीं. तो बात कुल-मिलाकर यही है कि इंडियन रेलवे का जो भी हो, लेकिन ट्रैवलर्स के अच्छे दिन आ गए हैं.
दी लल्लनटॉप के लिए ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने लिखी है.













