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राहुल गांधी की सांसदी बहाल हो गई, अब छिना हुआ सरकारी बंगला वापस कब मिलेगा?

क्या राहुल गांधी को पुराना बंगला मिल पाएगा?

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22 अप्रैल को राहुल गांधी ने सरकारी बंगला खाली कर दिया था (फोटो- PTI)

साढ़े चार महीनों की कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हो गई. लोकसभा सचिवालय ने 7 अगस्त को नोटिफिकेशन जारी कर सांसदी बहाल किए जाने की जानकारी दी. अब राहुल गांधी संसद के मानसून सत्र के बाकी 5 दिन हिस्सा ले सकेंगे. लेकिन एक सवाल ये भी चल रहा है कि सांसदी जाने के बाद राहुल गांधी से जो बंगला छिन गया था, वो वापस कब मिलेगा? संसद सदस्यता रद्द होने से पहले राहुल गांधी दिल्ली में 12, तुगलक लेन वाले सरकार बंगले में रह रहे थे. करीब 19 साल से ये उनका आधिकारिक आवास था. सदस्यता रद्द होने के बाद उन्होंने 22 अप्रैल को इस बंगले को खाली कर दिया था.

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7 अगस्त को लोकसभा सचिवालय ने जो आदेश जारी किया, उसका मजमून कुछ इस प्रकार है- सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को अपने फैसले में राहुल गांधी की सज़ा पर रोक लगाई है. इस फैसले को देखते हुए, 24 मार्च को जारी किया गया राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करने का आदेश खारिज किया जाता है.

राहुल को बंगला कब मिलेगा?

राहुल फिलहाल केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद हैं. सदस्यता बहाल होते ही राहुल गांधी संसद पहुंचे. कांग्रेस के सांसदों से मुलाकात की. उनकी सदस्यता तब बहाल हुई, जब विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है. इसी हफ्ते इस प्रस्ताव पर चर्चा होनी है. हालांकि इन सबके इतर, अब बारी सांसद के तौर पर मिलने वाले उनके बंगले की है, जो उनसे छिन गई थी. ये कब मिलेगा, इसे समझने के लिए हमने लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य से बात की.

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पीडीटी आचार्य ने दी लल्लनटॉप से बातचीत में बताया कि सांसदों को बंगला आवंटन और रद्द करने के लिए सांसदों वाली एक हाउस कमिटी है. ये कमिटी ही केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से बंगला आवंटन के लिए सिफारिश करती है. अब सदस्यता बहाल होने के बाद कमिटी की सिफारिश के आधार पर राहुल को बंगला मिलेगा.

आचार्य ये भी बताते हैं कि राहुल गांधी को पुराना बंगला ही आवंटित होगा, ये जरूरी नहीं है. यानी उन्हें 12, तुगलक लेन वाला बंगला मिल भी सकता है और नहीं भी. ये पूरी तरह कमिटी की सिफारिश पर निर्भर करता है.

राहुल के पास कौन सा बंगला था?

दिल्ली के लुटियंस इलाके में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के जजों, सांसदों और ब्यूरोक्रेट्स के सरकारी आवास हैं. अभी लुटियंस बंगले 28 वर्ग किमी से ज्यादा दायरे में हैं. टाइप IV से टाइप VIII के आवास सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को दिए जाते हैं. पहली बार चुने गए सांसदों को टाइप IV के बंगले मिलते हैं. टाइप 8 का बंगला सबसे उच्च श्रेणी का होता है. ये बंगले आमतौर पर कैबिनेट मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के जज, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व राष्ट्रपति और वित्त आयोग के चेयरमैन को मिलते हैं. यह लगभग तीन एकड़ (थोड़ा कम-ज्यादा भी) का होता है.

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वहीं, टाइप-7 बंगला का रकबा एक से डेढ़ एकड़ के बीच होता है. इस प्रकार के बंगले अक्सर राज्य मंत्रियों, दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, कम से कम पांच मर्तबा सांसद रहे व्यक्तियों को आवंटित होता है. राहुल गांधी जिस 12, तुगलक लेन के बंगले में रहते आए हैं, वह टाइप 7 ही है. ये बंगला उन्हें साल 2004 में ही मिला था, जब वे पहली बार अमेठी से लोकसभा सांसद बने थे. यानी टाइप-7 बंगला राहुल गांधी को पहली बार सांसद बनने पर मिल गया था. 2004 में ही कांग्रेस सरकार में आई थी.

जब सांसद की सदस्यता जाती है तो सभी सुविधाएं भी छिन जाती हैं. भत्ते, बंगला, गाड़ी सब. लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, अगर कोई सांसद रिटायर होता है, इस्तीफा देता है या सदस्यता खोता है तो उसे एक महीने के भीतर बंगला खाली करना होता है. वहीं अगर किसी सांसद का निधन हो जाता है तो उनके परिवार के सदस्य अधिकतम 6 महीने तक उस सरकारी आवास में रह सकते हैं.

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