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Porsche कार हादसे के नाबालिग आरोपी की जमानत रद्द हो गई

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 17 साल के नाबालिग को 5 जून तक चिल्ड्रन ऑब्जर्वेशन सेंटर में भेजने का आदेश दिया है.

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आरोपी नाबालिग के पिता को भी 24 मई तक हिरासत में भेजा गया है. (फोटो- PTI)

पुणे पोर्शे कार हादसे में आरोपी नाबालिग की जमानत रद्द कर दी गई है. 22 मई को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 17 साल के नाबालिग को 5 जून तक चिल्ड्रन ऑब्जर्वेशन सेंटर में भेजने का आदेश दिया है. 18 और 19 मई की दरमियानी रात कल्याणी नगर में पोर्शे कार से टक्कर में दो लोगों की मौत हुई था. कार 17 साल का नाबालिग चला रहा था. पुलिस का कहना है कि नाबालिग ने एक्सीडेंट से पहले एक पब में बैठकर कथित रूप से शराब पी थी. हालांकि गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उसे जमानत मिल गई थी. 

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पुणे पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से नाबालिग के खिलाफ व्यस्क की तरह मुकदमा चलाने की मांग की थी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया कि पुलिस ने बोर्ड के सामने एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. उन्होंने बताया, 

"बोर्ड का आदेश हमें मिल गया है. जिसमें कहा गया कि नाबालिग को 15 दिनों (5 जून तक) के लिए रिमांड होम में भेजा जाएगा. उस पर व्यस्क की तरह मुकदमा चलाने का फैसला अभी लंबित है."

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इससे पहले नाबालिग को कुछ शर्तों के साथ जमानत देने दी गई थी, जिसकी काफी आलोचना हुई. मसलन, आरोपी को 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करना होगा,  आरोपी को 'सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव और इसके समाधान' विषय पर 300 शब्दों का निबंध लिखना होगा आदि.

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22 मई को ही पुणे की एक सेशंस कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और ब्लैक क्लब बार के दो कर्मचारियों को 24 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया. पुलिस ने इन सबके लिए 7 दिनों की पुलिस हिरासत मांगी थी. पिता विशाल अग्रवाल और बार के मालिक और कर्मचारियों के खिलाफ जुबेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 और 77 के तहत केस दर्ज किया गया है. बार के कर्मचारियों के खिलाफ नाबालिग को शराब परोसने के लिए केस दर्ज हुआ है.

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मामले में सरकारी वकील ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि पुलिस को ये भी पता लगाने की भी जरूरत है कि बेटे के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद पिता फरार क्यों हुआ था. वहीं होटल ब्लैक क्लब के कर्मचारी जयेश गावकर के लिए वकील ने कहा कि वे पता लगाना चाहते हैं कि किसकी मंजूरी से नाबालिग को वहां एंट्री मिली.

इधर, महाराष्ट्र सरकार ने नाबालिग आरोपी को 25 की उम्र तक ड्राइविंग लाइसेंस देने पर बैन लगा दिया. राज्य के ट्रांसपोर्ट अधिकारियों ने ये भी दावा किया कि पोर्शे कार का परमानेंट रजिस्ट्रेशन भी पेंडिंग है, क्योंकि परिवार ने 1,758 रुपये की फीस नहीं जमा की. अगले 12 महीनों तक अब किसी भी रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस में इस कार के रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं होगी

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