अखलाक के मर्डर के एक आरोपी रविन सिसौदिया की किडनी फेल होने से मौत हो गई थी. मंगलवार की रात पुलिस रविन की डेडबॉडी पोस्टमार्टम के बाद उसके गांव लेकर गई. पर पुलिस ने अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट पब्लिक नहीं की है. रविन की फैमिली का आरोप है कि जेल में रविन को एक अलग सेल में रखा गया था. और जेल के अंदर कुछ पुलिस अफसरों ने उसे बेरहमी से पिछले 30 सितंबर को पीटा था. परिवार ने ये भी कहा कि उन्हें शक है कि रविन को जहर दिया गया है. ML यादव जो कि कसाना जेल के जेलर हैं उन्होंने इन सारे आरोपों से इंकार किया है. हालांकि उन्होंने ये स्वीकार किया कि जेल के हॉस्पिटल की सुविधाएं ठीक नहीं थीं. वहीं रविन के परिवार के लोग जेलर ML की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक ML की गिरफ्तारी नहीं हो जाती रविन की लाश रखकर धरना देते रहेंगे. उनकी मांग अखलाक के भाई को गिरफ्तार करने की भी है. रविन सिसौदिया की मौत की जांच के लिए दो जांचों के आदेश दिए जा चुके हैं. जांच के आदेश अखिलेश यादव ने दिए. देखना ये है कि सारे पॉलिटिकल परिवेश पर इस मामले का क्या असर होगा वो भी जब अगले ही साल यूपी में असेंबली इलेक्शन होने हैं.
वैसे तो अखलाक की मौत को लेकर कई रिपोर्ट्स, कई दावे हैं. लेकिन उन रिपोर्ट्स और दावों के कुछ नया बताने से अखलाक नहीं लौट सकता. अखलाक की हत्या के बाद दादरी के हालात बिगड़े थे. अब फिर वैसे ही हालात पैदा करने की कोशिश की जा रही है. वजह है अखलाक की हत्या के एक आरोपी रविन सिसोदिया की मंगलवार को किडनी फेल होने से मौत. खबर है कि रविन के मरने के बाद से बिसाहड़ी गांव में तनाव है. रविन की लाश को तिरंगे से ढककर भड़काऊ भाषण दिए जा रहे हैं.
ऐसे में सवाल ये भी है कि एक हत्या के आरोपी की लाश पर तिरंग कैसे रखा जा सकता है. क्या ऐसे लोगों के लिए सरहद पर शहीद हुए जवान और ये एक बराबर हैं. तिरंगा देश के लिए मरने वाले लोगों की लाश पर रखा जाता है. न कि देश के अंदर लोगों की जान लेने वालों की लाश पर.
इस गांव के लोग रविन की लाश के साथ धरने पर बैठे हैं. इनकी मांग है कि अखलाक के भाई जान मोहम्मद को जब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक रविन का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. सैकड़ों की भीड़ है. भीड़ के बीच माइक लगाकर संदेश दिया जा रहा है,
द हिंदू के रिपोर्टर मोहम्मद अली ने दादरी में दिए जा रहे भड़काऊ भाषणों का वीडियो ट्वीट किया है. https://twitter.com/hindureporter/status/783913318490648576?ref_src=twsrc%5Etfw द हिंदू की खबर के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि इस बात के सबूत नहीं हैं कि अखलाक या उसके परिवार ने गोहत्या की. सूत्रों की मानें, तो करीब दो महीने लंबी जांच के बाद पुलिस के हाथ अब तक कुछ नहीं लगा है. बता दें कि सूरजपुर कोर्ट के आदेश पर इस केस में अखलाक, उसके परिवार और भाई जान मोहम्मद के खिलाफ गोहत्या एक्ट, 1955 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. याद रहे कि 28 सितंबर 2015 को दादरी के बिसाहड़ा गांव में फ्रिज में बीफ होने की की अफवाह के चलते अखलाक को पीट-पीटकर मार डाला गया था. रविन अखलाक की हत्या केस के 18 आरोपियों में से एक थे. रविन के परिवार वालों ने जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाया है. धरने पर बैठे लोगों की कुछ और डिमांड भी हैं. मसलन एक करोड़ रुपये का मुआवजा. इस मांग को दिखाने के लिए बोर्ड नहीं मिला, तो एक बोर्ड कहीं से उखाड़ लिया और उसके पीछे लिख डाला- एक करोड़ रुपये चाहिए.'इसका बदला चाहिए. हिंदू भाइयों ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं. और इसका बदला लेकर रहेंगे. अरे हिंदू भाइयों की तो बात छोड़ो. हिंदू माताएं ही बहनें इतनी सक्षम हैं कि इन मुल्लों को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे. इन मुल्लों में इतनी क्षमता नहीं कि हमारे एक बालक का सामना कर सकें. हिंदू भाइयों एकजुट हो जाओ. राजपूत, ठाकुर, भाटी इनमें न बंटो. रविन भाई ने जो शहादत दी है. उसको बेकार मत जाने दो. मेरे भाई की शहादत को चिंगारी बनाना है. इसे आग बनाना है.'
सरकार रविन की फैमिली की कुछ बातें मानने के लिए तैयार हो गई है. जांच चलने तक जेलर हटा दिए गए हैं. रविन की फैमिली को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे. फैमिली जांच से संतुष्ट नहीं हुई तो सीबीआई जांच करवाई जाएगी.
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