1. रोहित वेमुला की मां ने रिजर्वेशन का फायदा लेने के लिए खुद को 'दलित' के तौर पर प्रचारित किया. 2. यूनिवर्सिटी ने वेमुला को होस्टल से निकालकर बिल्कुल जायज फैसला किया था. 3. 26 साल के इस पीएचडी स्कॉलर ने पर्सनल लाइफ की निराशा से सुसाइड किया, भेदभाव की वजह से नहीं. यह उसका अपना फैसला था. इसमें किसी यूनिवर्सिटी या सरकार के फैसले से प्रभावित नहीं था. 4. केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और स्मृति ईरानी सिर्फ अपने फर्ज अदा कर रहे थे और हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रशासन पर कोई प्रेशर नहीं था. सरकार जैसा चाहती थी, वैसा हो गया. रोहित वेमुला सुसाइड केस की जांच कर रहे ज्युडिशयल कमिशन ने ये निष्कर्ष निकाले हैं.
ये कमिशन एचआरडी मंत्रालय ने ही बनाया था, वेमुला के सुसाइड के 11 दिन बाद, 28 जनवरी को. 'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज एके रूपनवाल ने 41 पेज की रिपोर्ट बनाई और अगस्त में सौंप दी. 50 से ज्यादा लोगों के शपथ पत्रों के आधार पर ये निष्कर्ष निकाले गए हैं. इनमें से ज्यादातर यूनिवर्सिटी के टीचर, अफसर और स्टाफ मेंबर हैं. साथ ही, यूनिवर्सिटी के 5 स्टूडेंट और उस जॉइंट एक्शन कमेटी से भी मुलाकात की, जो कैंपस में आंदोलन की अगुवाई कर रही थी.
दलित नहीं हैं रोहित वेमुला की मां?
रूपनवाल आयोग की रिपोर्ट में 12 पन्ने इसी पर खर्च किए गए हैं. इसके मुताबिक, उनकी मां राधिका कास्ट सर्टिफिकेट के आधार पर माला (दलित) कम्युनिटी से होने का दावा करती हैं. कोर्ट के मुताबिक, 'उनका दावा है कि उन्हें पालने वाले पेरेंट्स ने उन्हें बताया कि उनके बायोलॉजिकल मां-बाप दलित थे. उनका ये दावा यकीन करने लायक नहीं लगता. अगर राधिका को पालने वाले परिवार ने बायोलॉजिकल मां-बाप का नाम नहीं बताया, तो उनकी जाति कैसे तय की जा सकती है.'
आयोग के मुताबिक, वेमुला की मां खुद को एक जाति सर्टिफिकेट के आधार पर 'माला' समुदाय से बताती हैं. ये सर्टिफिकेट उन्होंने उस समय कॉरपोरेटर रहे उप्पलपति दनम्मा से हासिल किया था, जिनके साथ वो डेढ़ साल तक रही. रिपोर्ट के मुताबिक, 'उनके कास्ट सर्टिफिकेट का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने दलितों को मिलने वाले लाभ का फायदा लेने के लिए माला जाति का सर्टिफिकेट बनवाया.'
रिपोर्ट के मुताबिक, राधिका ने अपने छोटे बेटे राजा चैतन्य कुमार के बर्थ सर्टिफिकेट के लिए 2014 में अप्लाई किया था. इसमें उन्होंने खुद को 'वड्डेरा' जाति का बताया था, जो पिछड़ी जातियों (ओबीसी) में आता है. आयोग का कहना है कि वेमुला को भी उचित पूछताछ के बिना कास्ट सर्टिफिकेट दिया गया. उनकी मां 'माला' नहीं है, इसलिए उनके बेटे का कास्ट सर्टिफिकेट भी असली नहीं हो सकता.