प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनने के बाद से नरेंद्र मोदी की नई पर्सनैलिटी निकली है. सब कुछ मॉडर्न मॉडर्न लगता है. उनकी शब्दावली में 'मितरों' के अलावा 'थ्री एस' (स्किल, स्केल, स्पीड), 'फोर डी' (डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी, डिमांड, डीरेग्युलेशन) और 'फाइव टी' (ट्रेडिशन, टैलेंट, टूरिज्म, ट्रेड, टेक्नॉलजी) जैसे शब्द हैं, जो लोगों को उनके 'विजनफुल' होने का यकीन दिलाते हैं.
फेसबुक पर अबकी बार, BJP कर रही सबसे क्रांतिकारी प्रचार, देखें सबूत
बीती रात एक वीडियो शेयर किया गया खुरपेची तरीके से.

यूपी विधानसभा चुनाव, जहां भाजपा की साख दांव पर है, वहां पार्टी की सोशल मीडिया कैंपेनिंग टीम भी खूब दिमाग भिड़ा के काम कर रही है.

बीजेपी का एक पेज है, 'उत्तर देगा उत्तर प्रदेश'. इस पेज पर 'बीजेपी उत्तर प्रदेश' के ऑफिशियल पेज से ज्यादा (15 लाख से ज्यादा) लाइक्स हैं. 6 जनवरी की रात करीब 9:15 बजे इस पेज से एक वीडियो लाइव हुआ. टाइटल था 'समाजवादी दंगल'. ये वीडियो आमिर खान की फिल्म 'दंगल' का स्पूफ था, जिसमें यादव कुनबे में कलह की खिल्ली उड़ाई गई. इसे करीब पांच लाख लोगों ने इसे लाइक किया, साढ़े तीन हजार लोगों ने कमेंट किए और साढ़े आठ हजार लोगों ने शेयर किया.
खास ये सब नहीं. वीडियो की सबसे खास बात ये कि ये पहले से रिकॉर्डेड वीडियो था. पर इसे फेसबुक लाइव के जरिये पोस्ट किया गया. जबकि फेसबुक लाइव के तहत लाइव वीडियो पोस्ट किए जाते हैं. लेकिन इस पेज पर 8:46 मिनट का रिकॉर्डेड वीडियो लाइव चलाया गया. वैसे वीडियो इतना लंबा नहीं था. वीडियो 1:50 मिनट का था, जिसे लूप में चलाया गया.
हालांकि, ये कोई अजूबा नहीं है. इंटरनेट पर ढेरों सॉफ्टवेयर और सेटिंग्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से रिकॉर्डेड वीडियो लाइव किए जा सकते हैं. जब कोई पेज फेसबुक लाइव करता है तो उसके सारे फॉलोअर्स को नोटिफिकेशन जाती है. इसलिए लोगों को एंगेज करने और रीच बढ़ाने के लिए कई मीडिया ऑर्गनाइजेशंस और प्रोडक्शन हाउस ऐसा करते हैं. फेसबुक की तरफ से ऐसा कोई नियम नहीं है कि लाइव वीडियो रिकॉर्डेड नहीं होना चाहिए. इसी लूपहोल का फायदा उठाया जाता है. फिर भी, भारत में ये अनोखा ही है.
हम अभी फेसबुक के फीड अल्गॉरिदम से ही जूझ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी का इस फ्रेश हथकंडे से प्रचार करना नोट की जाने लायक बात है. सोशल मीडिया पर वैसे भी बीजेपी का वर्चस्व रहा है और उनकी टीमें मजबूत रही हैं.
बाकी इस वीडियो में सपा पर अपेक्षित प्रहार हैं. इशारा है कि ये सपा का स्क्रिप्टेड ड्रामा है. वीडियो की पहली लाइन है, 'रे वोट पेड़ पर नीं उगते... उन्हें लूटणा पड़ता है. झूठ से... धोखे से... ड्रामे से.'
वैसे वोटों के मामले में बीजेपी का बर्ताव कौन सा पाक-साफ है? जब हमाम में सभी नंगे हैं, तो गंगाजल से आचमन का ढोंग क्यों?
वीडियो में मुलायम कहते हैं, 'मन्ने गलत मत समझना. शिवपाल और अमर सिंह दोनों बड़े प्यारे हैं, पर म्हारा सपणा अखिलेश ही पूरा कर सके है.' मुलायम का प्रधानमंत्री बनने का सपना. उनकी आखिरी इच्छा. फिर मुलायम ये भी कहते हैं, 'मैं हमेशा यो सोचके रोता रह्या कि छोरा लायक होता, तो इलेक्शन में वोट दिलवाता. ये बात मेरी समझ ना आई कि वोट तो वोट होता है. अखिलेश लावे या शिवपाल.'
वीडियो के आखिर में आजम खान की टिप्पणी भी है. 'पैसा वसूल नौटंकी'. क्यों भई, वीडियो ही क्यों? हमारे यहां चुनाव किसी नौटंकी से कम हैं क्या.
यहां देखिए वीडियो...
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