The Lallantop

आलू किसानों का गुस्सा अब सीएम योगी के घर तक पहुंच गया है

पूरे उत्तर प्रदेश में हाहाकार है.

Advertisement
post-main-image
लखनऊ की विधानसभा और सीएम आवास के सामने बड़ी तादाद में आलू फेंकने की खबर आई है.
देश की राजधानी दिल्ली से 230 किलोमीटर दूर पड़ता है आगरा. पिछले दिनों वहां आलू सड़क पर फेंके जाने की खबरें आ रही थीं. वो भी थोड़ा बहुत नहीं, लाखों किलो आलू. हजारों की तादाद में बोरियां. आगरा के किसी भी खेत के आसपास से गुजरिए, हर 100-200 मीटर पर यूं हीं सड़ने के लिए पड़ा आलू दिख जा रहा था. यही हालात उत्तर प्रदेश की पूरी आलू बेल्ट के हैं. चाहे वो कन्नौज हो या फर्रूखाबाद. वहां भी सड़क पर आलू फेंका जा रहा था. और अब किसानों का ये गुस्सा यूपी की राजधानी लखनऊ पहुंच गया है. 6 जनवरी की सुबह सैंकड़ों किलो आलू विधानसभा, सीएम आवास और राज्यपाल आवास के सामने सड़क पर पड़ा मिला. ये देखिए- ये आलू भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने 5 जनवरी की रात में ही डाल दिया था. ताकि एलआईयू और प्रशासन को इसकी खबर न लग सके. और यही हुआ भी. सुबह जब वहां से गाड़ियां गुजरीं तो आलू से सड़क पर गंदगी मच गई. पुलिस-प्रशासन सकते में आ गया. फिर इसे साफ करने का अभियान चलाया गया. आलू किसानों की इस बर्बादी और उनकी दिक्कतों को समझने हम पिछले दिनों आगरा पहुंचे तो किसान गुस्से में थे. सरकार से बदला लेने की बातें कर रहे थे. कह रहे थे हमने ही वोट देकर सरकार बनवाई, हम गिरा भी सकते हैं. अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो इस बार हम मोदी और योगी सरकार को मजा चखा के रहेंगे. और क्या बोले किसान इस वीडियो में देखिए- किसानों की मेन दिक्कतें इन बातों को लेकर हैं- 1. आलू के दाम तय होने से कीमत और गिरी गेहूं, धान आदि कई फसलों पर सरकार एक न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है. आलू पर ऐसा कोई नियम नहीं था. पर योगी सरकार ने इस बार 487 रुपये प्रति क्विंटल आलू का रेट तय किया था. माने 4.87 रुपये प्रति किलो. किसानों को ये रेट नहीं भाया. उनका कहना था कि इससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही थी. उल्टा इस रेट ने पूरी मार्केट में आलू के रेट गिरा दिए. जिस आलू के रेट उन्हें 10 रुपये प्रति किलो मिलने की उम्मीद थी, वो आधे भी नहीं मिले. किसानों ने इस उम्मीद में कि बाद में मार्केट उठेगी, आलू कोल्ड स्टोर में जमा कर दिए. मगर ना मार्केट में रेट बढ़े और ना उनका आलू बिका. आलम ये हुआ कि वो कोल्ड स्टोर से अपना आलू तक नहीं छुड़ा पाए. और कोल्ड स्टोर वालों ने अगली बार की तैयारी के लिए आलू सड़क पर फिंकवा दिया. 2. मंडी समिति खत्म की जाए पूरे प्रदेश में जो मंडी समितियां बनी हैं, उन्हें खत्म किया जाए. किसान आलू लेकर मंडी में आता है, तो उसे बाजार से पहले समिति में लेकर जाना पड़ता है. वहां आलू रखने से लेकर हर ट्रक पर एक तय कीमत मंडी समिति को दी जाती है. किसान चाहते हैं कि इसे खत्म कर दिया जाए, ताकि किसान सीधे बाजार में आलू लेकर जा सके. जो पैसा उसे मंडी समिति को देना पड़ता है, उसे न देना पड़े. 3. ट्रांसपोर्टेशन के पैसे किसानों को दिए जाएं योगी सरकार ने आलू किसानों के लिए आलू प्रदेश से बाहर एक्सपोर्ट करने पर सब्सिडी का भी प्रावधान किया था. इसके लिए 100 करोड़ का बजट भी जारी किया गया था. मगर किसानों का कहना है कि उन्हें इसमें से एक कौड़ी नहीं मिली. सारा माल बड़े ट्रांसपोर्टर काट ले गए. आम किसानों के पास तो इतने संसाधन ही नहीं होते हैं कि वो आलू बाहर भेज पाएं. वो किसी बड़े व्यापारी को अपना आलू बेच देते हैं और इस ट्रांसपोर्ट सब्सिडी का फायदा भी इन व्यापारियों को मिलता है. ऐसे में किसानों की मांग थी कि ये पैसा सीधा उनको दिया जाए.
ये भी पढ़ें- आलू को सच में सोना बनाने की ये है तरकीब यूपी में 10 पैसे में एक किलो आलू क्यों बिक रहा है? जब गेस्ट हाउस कांड हुआ था, तब लखनऊ SSP थे यूपी के नए DGP अंकित तोमर आपके लिए मर गया, आपको पता चला? इस BJP सांसद को आर्मी के जवानों का मरना आम बात लगती है! ये लल्लनटॉप वीडियो देखें-

Advertisement
Advertisement