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पाकिस्तान में क्यों लहराए जा रहे हैं नरेंद्र मोदी के पोस्टर?

लोगों की भीड़ पोस्टर बैनर लहराकर क्या मदद मांग रही?

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पाकिस्तान में पीएम मोदी सहित दुनिया के कई बड़े नेताओं के पोस्टर लहराए गए. सिंध प्रांत में लोग आजादी की मांग में जुलूस निकाल रहे थे.
कुछ दिन पहले एक खबर आई थी कि पाकिस्तानी संसद में मोदी-मोदी के नारे लगे हैं. फैक्ट चेक में पता चला कि खबर गलत थी. लेकिन आज खबर आई है कि पाकिस्तान (Pakistan) में एक रैली के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सहित दुनिया के कई बड़े नेताओं के पोस्टर लहराए गए हैं. क्या है पूरा मामला, आइए जानते हैं. कहां लहराए गए हैं पीएम मोदी के पोस्टर पाकिस्तान में कई ऐसे हिस्से हैं जो लंबे वक्त से आजादी की मांग करते रहे हैं. आजादी की मांग करने वाले कई मौकों पर इसके लिए जुलूस निकलते रहते हैं. इनमें बलूचिस्तान (Balochistan) का नाम अक्सर सामने आता रहता है. लेकिन पाकिस्तान में बलूचिस्तान के अलावा भी कई इलाके हैं, जहां से आजादी की मांग उठती रहती है. इसी तरह का एक इलाका है सिंध प्रांत. पाकिस्तान के सिंध (Sindh) को अलग देश बनाने की मांग लगतार तेज हो रही. रविवार को सिंध के सान कस्बे में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने इसके लिए प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके हाथ में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई विदेशी नेताओं की तस्वीर दिखाई दी. इन तस्वीरों में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और न्यूजीलैंड की पीएम जेसिका अर्डेन शामिल हैं. प्रदर्शनकारियों ने  विश्व के इन नेताओं से अपील की कि सिंध को अलग देश बनाने में मदद करें. दरअसल रविवार को जीएम सैयद की 117वीं जयंती थी. जीएम सैयद को आधुनिक सिंधी राष्ट्रवाद का संस्थापक माना जाता है. इस मौके पर अलग से सिंधु देश बनाने की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया गया. इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य विश्व नेताओं की तख्तियों को उठाया ताकि सिंधु देश की स्वतंत्रता के लिए उनका हस्तक्षेप हो सके. सिंध और बलूचिस्तान में बढ़ रहा है विरोध पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जमसोरो जिले में जीएम सैयद के गृहनगर में रविवार को आयोजित एक विशाल रैली के दौरान लोगों ने आजादी समर्थक नारे लगाए. उन्होंने दावा किया कि सिंध, सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक धर्म का घर है, जिसपर ब्रिटिश साम्राज्य ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था और 1947 में पाकिस्तान के इस्लामी हाथों में दे दिया गया था. सिंध में कई राष्ट्रवादी दल हैं, जो एक स्वतंत्र सिंध राष्ट्र की वकालत कर रहे हैं. इस तरह की बात पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत भी करता रहा है. वह भी पाकिस्तानी अत्याचार और संसाधनों के अधांधुध दोहन की शिकायत लेकर विश्व बिरादरी के सामने अपनी आवाज उठाता रहा है. हाल ही में बलूचिस्तान आंदोलन की प्रखर युवा आवाज करीमा बलोच का शव कनाडा में मिला था. वह वहां निर्वासन का जीवन बिता रही थीं. बलोचिस्तान आंदोलन से जुड़े कई नेताओं की तरह करीमा बलोच भी भारत से लगातार आंदोलन के लिए समर्थन मांगती रहती थीं. करीमा बलोच ने 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री को भाई बताते हुए राखी भेजी थी. साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान के मामले में दखल देने को भी कहा था. बलूचिस्तान समर्थकों का तर्क है कि पाकिस्तान ने सिर्फ पंजाब और सिंध प्रांत में विकास किया. जबकि बलूचिस्तान आज़ादी से दूर रहा. यह पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत माना जाता है. पाकिस्तानी सेना और इंटेलिजेंस एजेंसिया लगातार आज़ादी की इस मांग को दबाने की कोशिश में हैं. बलूचिस्तान के संघर्ष के पूरे इतिहास के यहां क्लिक  करके पढ़ सकते हैं.

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