"आपने मुझे मेरे फैशन के लिए पूछा. ये बात सही है कि ढंग से रहना ये मेरी प्रकृति थी. शायद एक कारण ये भी था कि गरीबी के कारण कभी-कभी छोटा महसूस करता था लोगों के बीच. शायद साइकोलॉजी पढ़ी होगी बचपन में. हमारे घर में वो प्रेस तो थी नहीं, तो मैं क्या करता था कि लोटे में गर्म कोयला भर लेता था और उसी से कपड़ों को प्रेस करता था, और पहन कर जाता था. जूते थे नहीं. एक बार मेरे मामा घर में आए तो उन्होंने सफेद जूते दिला दिए. फिर मैं क्लासरूम में रुका रहता था और चॉक के टुकड़े इकट्ठा करता था. फिर हर दिन सुबह-सुबह जूतों पर उसे लगा देता था ताकि वो सफेद बने रहें."मोदी ने बताया -
"मेरे कपड़ों को लेकर भी एक छवि बनाई गई है. लेकिन सच ये है कि मेरे पास एक झोला रहता था. छोटे बैग में मेरी जिंदगी थी. जब तक सीएम बना तब तक मैं अपने कपड़े खुद धोता था. मैं सोचता था कि कमीज की लंबी बाहें रखूंगा तो ज्यादा धुलाई करनी पड़ेगी. दूसरी वजह ये थी कि मेरे बैग में वो जगह ज्यादा लेता था. इसलिए मैंने खुद ही उसे काट दिया. कई कपड़ों की बाजुएं काट दीं."
वीडियोः प्रधानमंत्री आवास योजना: घर बनाने वाली स्कीम की तीसरी किस्त के बाद हो रहा बड़ा गड़बड़झाला













