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जिस ट्रेन से PM मोदी युद्ध-ग्रस्त यूक्रेन के बीचो-बीच यात्रा करेंगे, उसका सिस्टम जानकर चकरा जाएंगे

जिस ‘रेल फ़ोर्स वन’ ट्रेन पर PM मोदी सवार होंगे, वो कोई सामान्य ट्रेन नहीं है. युद्ध-ग्रस्त परिदृश्य के साथ 10 घंटे की यात्रा, जिसमें हर तरह की ज़रूरी सुविधा और सुरक्षा होगी.

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PM मोदी युद्ध से तबाह देश के बीच कुल 20 घंटे की यात्रा करेंगे. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 23 अगस्त को यूक्रेन का दौरा करेंगे. भारत और यूक्रेन के बीच 30 साल पहले द्विपक्षीय संबंधों की शुरुआत हुई थी. तब से ये भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी. यूक्रेन से पहले प्रधानमंत्री मोदी 21-22 अगस्त को पोलैंड में होंगे. वो पोलैंड से यूक्रेन की राजधानी कीव तक ट्रेन से जाएंगे. यूक्रेन में लगभग सात घंटे बिताने और राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ अलग-अलग मामलों पर चर्चा करने के बाद फिर उसी ट्रेन से पोलैंड वापस जाएंगे. लेकिन जिस ट्रेन पर PM मोदी सवार होंगे, वो कोई सामान्य ट्रेन नहीं है.

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युद्ध-ग्रस्त परिदृश्य के साथ 10 घंटे की यात्रा, जिसमें हर तरह की ज़रूरी सुविधा और सुरक्षा होगी. और, इस यात्रा के साथ वो दुनिया के उन चंद नेताओं की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने ये ‘डिप्लोमेटिक’ सवारी की है.

इस ट्रेन में ऐसा क्या ख़ास है?

जब से रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया है, हवाई यात्रा और हवाई अड्डे बंद हैं. सड़कें भी जोख़िम से भरी हुई हैं. तो अब यूक्रेन में आने-जाने का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद तरीक़ा है, ट्रेन. लेकिन कोई भी ट्रेन नहीं. ये एक ख़ास डिज़ाइन की सर्विस है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ जैसे लोगों ने यात्रा की है.

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इस ट्रेन का नाम ‘रेल फ़ोर्स वन’ है. यूं ही नहीं रखा गया. यूक्रेन की रेलवे कंपनी के CEO अलेक्ज़ेंडर कामिशिन का कहना है कि ये 'आयरन डिप्लोमेसी' का प्रतिनिधित्व करता है. ये सिर्फ़ एक सवारी नहीं, एक स्टेटमेंट है. 

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ट्रेन फ़ोर्स वन का इंटीरियर भी हैवी है. काम और आराम के लिए ज़रूरी सभी चीज़ों से सुसज्जित लकड़ी के पैनल वाले केबिन, मीटिंग के लिए एक लंबी टेबल, आराम करने के लिए एक सोफ़ा, दीवार पर एक टीवी और यहां तक कि आराम से पसर जाने का इंतज़ाम. 

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फ़रवरी 2023 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस ट्रेन से यात्रा की थी. (फ़ोटो - AP)

युद्ध-ग्रस्त क्षेत्र में इतनी लग्ज़री ट्रेन चलाना कोई आसान काम तो है नहीं. मगर लगातार बने हुए ख़तरे और बिजली कटौती के बावजूद रेलवे सिस्टम कम से कम देरी के साथ ट्रेनों को चलाने में कामयाब रहा है. इलेक्ट्रिक की जगह डीज़ल इंजन लगाया, ताकि रूसी हमलों की वजह से पावर ग्रिड को अगर कुछ हो भी जाए, तो ट्रेनें चलती रहें. रेलवे प्रशासन ने अपने हाई-प्रोफ़ाइल यात्रियों की सुरक्षा और आराम के लिए हर संभव प्रयास किया है. नतीजा? आज तक एक भी लीक या सुरक्षा उल्लंघन नहीं हुआ.

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ये लग्ज़री रेल मूलतः 2014 में शुरू की गई थी. क्रीमिया आने वाले पर्यटकों के लिए. लेकिन रूस के हमले के बाद उन्हें फिर से री-डिज़ाइन किया गया. नए मिशन के लिए. इस ट्रेन ने सब कुछ देखा है: युद्ध की शुरुआत में लाखों यूक्रेनियों को देश से निकालने से लेकर राजनयिक मिशन्स तक.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन यात्रा को सिर्फ़ एक डिप्लोमैटिक यात्रा से कहीं ज़्यादा देखा जा रहा है. बैलेंस बनाने के एक प्रयास की तरह. चूंकि फरवरी 2022 से शुरू हुई जंग के बाद भारत ने तटस्थ रुख रखा है, सो अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस यात्रा पर क़रीब से नज़र रखे हुए हैं. जुलाई में PM मोदी ने मॉस्को का दौरा किया था, जहां वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले थे. अब वो अपना ध्यान यूक्रेन की ओर मोड़ रहे हैं.

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