भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 27 मई को पापुआ न्यू गिनी में हाल ही में हुए भूस्खलन (Papua New Guinea Landslide) में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की. इस आपदा में अभी तक दो हजार लोगों के दबे होने की आशंका है. एक X पोस्ट में जयशंकर ने लिखा,
इस देश में ऐसा भूस्खलन आया, 2000 लोग दफ्न हो गए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जताई संवेदना
पापुआ न्यू गिनी में इस समय व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है. हालांकि, दूर-दराज के इलाकों में पीड़ितों को खोजने में दिक्कतें आ रही हैं.

"पापुआ न्यू गिनी में भूस्खलन के चलते गई जानों से बहुत दुख पहुंचा है. हम वहां की सरकार और लोगों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हैं. इस मुश्किल घड़ी में भारत अपने दोस्तों के साथ खड़ा है."
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पापुआ न्यू गिनी में इस समय व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है. हालांकि, दूर-दराज के इलाकों में पीड़ितों को खोजने में दिक्कतें आ रही हैं. यह भूस्खलन देश के उत्तरी भाग के पहाड़ी क्षेत्र एंगा में 24 मई को आया था. आपदा के तुरंत बाद भी संयुक्त राष्ट्र की तरफ से कहा गया था कि 100 लोग मारे गए हैं.
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अमेरिकी मीडिया संस्थान CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में मृतकों के आंकड़े को अपडेट किया गया था. इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के चीफ ने मृतकों की संख्या 670 बताई थी. हालांकि, पापुआ न्यू गिनी की आपदा प्रबंधन एजेंसी का कहना है कि ये आंकड़े अनुमान से कम हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र को लिखे एक पत्र में एजेंसी की तरफ से कहा गया,
"इस भूस्खलन ने 2 हजार से अधिक लोगों को जिंदा दफ्न कर दिया. इमारतें ध्वस्त हो गई हैं. फूड सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. भूस्खलन से देश की आर्थिक लाइफलाइन पर बुरा असर पड़ा है."
इस पत्र में ये भी कहा गया कि बचाव कार्य में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, पापुआ न्यू गिनी में पहाड़ी इलाके बहुत अधिक है और सड़कों का नेटवर्क भी नहीं विकसित हो पाया है. इस वजह से रेस्क्यू टीम्स को इधर से उधर जाने में दिक्कतें हो रही हैं. इस देश में करीब 1 करोड़ लोग रहते हैं.
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