सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने एक हालिया फ़ैसले में एक आदेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी. इस आदेश में जाति प्रमाण पत्र पर विवाद के बाद एक गोलगप्पे बेचने वाले के बेटे का मेडिकल कॉलेज (Medical College) में एडमिशन रद्द कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने के बाद MBBS छात्र को कोर्स में फिर से एडमिशन मिल सकता है, जिससे वो अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है. शुक्रवार, 5 अप्रैल को जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की दो जजों की बेंच ने MBBS छात्र अल्पेश कुमार राठौड़ को अंतरिम राहत दी. साथ ही, कोर्ट ने राज्य और कॉलेज अधिकारियों को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्र जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार के रूप में भी गुजरात के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए पात्र होगा.
बढ़िया रैंक के बाद भी कैंसिल हुआ गोलगप्पे वाले के बेटे का एडमिशन, अब SC के आदेश पर बनेगा डॉक्टर!
Gujarat High Court के सिंगल जज की बेंच ने गोलगप्पे वाले के बेटे के MBBS एडमिशन को मंजूरी दे दी थी. लेकिन डबल बेंच ने छात्र के एडमिशन पर स्टे को बरकरार रखा था. अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है?


26 मार्च को गुजरात हाई कोर्ट (Gujarat High Court) की एक खंडपीठ ने छात्र के सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) कैटेगरी प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल उठाए थे. हाई कोर्ट ने इस कोर्स के लिए वडोदरा मेडिकल कॉलेड की एडमिशन कमिटी और सरकार के एडमिशन रद्द करने के आदेश को जारी रखा था. हाई कोर्ट ने तब कहा था कि किसी छात्र के लिए अपवाद नहीं हो सकता. हमें कानून के हिसाब से ही चलना होगा.
क्या मसला था?इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, छात्र अल्पेश कुमार राठौड़ उत्तर प्रदेश का मूल निवासी है. लेकिन अब गुजरात में रहता है. अल्पेश को डॉक्यूमेंट वेरिफ़िकेशन के समय प्रोविजनल एडमिशन दिया गया था. अल्पेश ने 20 अगस्त 2018 को एक जाति प्रमाण पत्र जमा किया. इसमें उसने 'तेली' उपजाति के होने का दावा किया, जिसे गुजरात में SEBC के रूप में कैटेगेराइज (वर्गीकृत) किया जाता है. हालांकि, जांच के बाद एडमिशन कमेटी ने जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया था. एडमिशन कमेटी ने कहा था कि ये ग़लत है, क्योंकि अल्पेश गुजरात में SEBC समुदाय के तेली जाति से नहीं था. बल्कि उत्तर प्रदेश में OBC कैटेगरी की तेली जाति से था. जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद सितंबर, 2023 में वडोदरा के सरकारी मेडिकल कॉलेज ने अल्पेश का एडमिशन रद्द कर दिया था.
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'जनरल में भी अच्छी रैंक…'इसके बाद अल्पेश ने हाई कोर्ट का रुख किया. मांग रखी कि उसकी कैटेगरी को SEBC से सामान्य श्रेणी में ट्रांसफर करके एडमिशन बहाल किया जाए. क्योंकि उसने NEET (UG) की समान्य खुली श्रेणी में अच्छी रैंक हासिल की थी और इसीलिए वो इसके लिए पात्र है. इसलिए उसे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने दिया जाए. हाई कोर्ट की सिंगल जज वाली बेंच ने समानता के आधार पर असाधारण क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए इसकी मंजूरी दी थी. लेकिन इस पर कॉलेज की एडमिशन कमेटी हाई कोर्ट की डबल बेंच के सामने पहुंची और इस फैसले को चुनौती दे दी. हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को पलट दिया था. हाई कोर्ट की डबल बेंच ने अपने फ़ैसले में कहा था कि अगर आपने आरक्षण का फायदा लेने की कोशिश की थी, तो आपको उसी पर कायम रहना होगा. अब आपको जनरल में मानने का सवाल ही नहीं खड़ा होता.
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