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भारतीय फिल्मों को बैन करने वाले पाक को इस पाकिस्तानी ने आईना दिखा दिया

पाकिस्तानियों के लिए हर हफ्ते फिल्म कहां से लाओगे.

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फोटो - thelallantop
बैन, बैन. ये बैन, वो बैन. इंडिया में पाकिस्तानी आर्टिस्ट को बैन किया गया, तो पाकिस्तान में बॉलीवुड की फ़िल्में बैन कर दी गईं. बड़े ही जोशीले अंदाज में. कहने लगे जी कब्ज़ा कर रखा था बॉलीवुड ने. अब सिनेमाघरों में पाकिस्तानी फ़िल्में चलेंगी. उन्हें खूब मुनाफा होगा. मगर हाय अफसोस, वो इसका दूसरा पहलू देखना भूल गए. और ये पहलू अब उन्हें पाकिस्तान के ही एक प्रोड्यूसर और एक्टर ने दिखाया है. पाकिस्तान के ये प्रोड्यूसर और एक्टर हैं हुमायूं सईद. बड़ी ही खूबसूरत बातें कही हैं अपने सिनेमा को बचाने के लिए. हुमायूं सईद ने कहा कि भारतीय फिल्मों पर पाबंदी लगाने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है. ऐसा नहीं होना चाहिए था. बीबीसी उर्दू से बात करते हुए हुमायूं ने कहा कि पाकिस्तानी सिनेमा को इस वक्त भारतीय फिल्मों की जरूरत है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी फ़िल्में हमारे सिनेमा को जिंदा नहीं रख सकतीं. सिनेमाघरों को हर हफ्ते एक फिल्म की जरूरत होती है. जबकि पाकिस्तान में उतनी फ़िल्में नहीं बन रही हैं.
हुमायूं सईद का कहना है कि अगर पाकिस्तानी फनकारों पर भारत में पाबंदी गलत है तो फिर पाकिस्तान में हिंदी फ़िल्में बैन होना कौन सी अक्लमंदी है. पाकिस्तानी सिनेमाघरों को ऐसा नहीं करना चाहिए.
मैंने कभी भी भारतीय फिल्मों पर पाबंदी की हिमायत नहीं की. हां इतना जरूर कहा कि ईद के मौके पर पाकिस्तान की फिल्मों को तरजीह देनी चाहिए. बाकी बचे साल के दिनों में इंडियन फिल्मों पर कोई पाबंदी न हो.

गुस्से में अपने ही पेट पर लात मार ली

हुमायूं की ये बातें काफी हद तक सच्चाई रखती हैं क्योंकि भारतीय फिल्मों पर बैन लगे अभी कित्ता टाइम हुआ है. 30 सितंबर को तो पाबंदी ही लगी थी कि कुछ सिनेमाघरों ने ठाली पड़े रहने के डर से पिछले सालों में रिलीज़ हुई पाकिस्तानी फिल्मों को दिखाने का ऐलान कर दिया. क्योंकि नई फिल्म न होने पर तो सिनेमाघर को पेट खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा. इसे देखते हुए तो लगता है कि पाकिस्तानियों ने भारतीय सिनेमा पर पाबंदी लगा कर अपने ही पेट पर लात मार ली है.

गैरकानूनी तरीके से देख रहे हैं भारतीय फ़िल्में

हुमायूं का कहना है, 'हम बचपन से भारतीय फ़िल्में गैरकानूनी तरीके से देख रहे हैं. और अगर वही फ़िल्में कानूनी तरीके से पाकिस्तान में दिखाई जाएं, तो क्या गलत है.' उनकी इस बात से साफ़ जाहिर है भले ही सिनेमाघरों ने पाबंदी लगा दी हो लेकिन पाकिस्तानी आवाम तो देखे बिना नहीं मानने वाली. यानी नुकसान सिनेमाघरों का ही है. हुमायूं ने कहा कि भारतीय फिल्मों को दिखाए जाने की इजाजत के बाद ही पाकिस्तान में सिनेमाघर बनने शुरू हुए. जिसका नतीजा ये हुआ कि पाकिस्तान में भी फ़िल्में बनना शुरू हुईं. भारतीय फिल्मों को दिखाए जाने पर पाकिस्तान में फौरन रोक तो लगा दी गई थी, लेकिन लाहौर हाईकोर्ट ने सरकार से इस मसले पर जवाब मांग लिया है.

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