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'कतई कबूल नहीं,' पाकिस्तान ने ठुकराई ट्रंप की इजरायल से दोस्ती करने की गुजारिश

Pakistan के रक्षा मंत्री Khawaja Muhammad Asif से पूछा गया कि Donald Trump के कहने के बाद क्या पाकिस्तान Abraham Accords पर साइन करेगा? माने, Israel से दोस्ती करेगा? तो ख्वाजा आसिफ ने मना कर दिया.

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2025 में शहबाज शरीफ (दाएं) और आसिम मुनीर (बाएं) ने वाइट हाउस में डॉनल्ड ट्रंप (बीच में) से मुलाकात की थी. (White House)

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  • अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड पर साइन कर इजरायल से दोस्ती करने की डिमांड की, ताकि पश्चिमी एशिया में शांति स्थापित हो सके।
  • पाकिस्तान ने अब्राहम अकॉर्ड को ठुकरा दिया क्योंकि देश इजरायल को मान्यता नहीं देता और इस समझौते को अपने मूल उसूलों के खिलाफ मानता है, खासकर फिलिस्तीन विवाद के कारण।
  • पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के स्पष्ट इनकार के बाद पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड में शामिल नहीं होगा, जिससे-middle east के राजनीतिक समीकरणों पर असर रहेगा और पूर्व स्थिति बनी रहेगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बड़े अरमानों के साथ पाकिस्तान को इजरायल से दोस्ती करने की 'अनिवार्य रिक्वेस्ट' की थी. लेकिन पाकिस्तान ने ट्रंप की गुजारिश ठुकरा दी. पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान का साफ रुख है कि इजरायल से दोस्ती कबूल नहीं है. ट्रंप ने पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब और कतर से इजरायल से रिश्ते सामान्य करने वाले समझौते 'अब्राहम अकॉर्ड' पर साइन करने के लिए कहा था.

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डॉनल्ड ट्रंप ने अब्राहम अकॉर्ड पर साइन करने वाली ऐसी डिमांड रख दी, जिसे पाकिस्तान के लिए मानना आसान नहीं है. परमाणु संपन्न पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जो इजरायल के सबसे बड़े विरोधी हैं. ट्रंप ने पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों से गुजारिश की है कि वो अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हो जाएं और इजरायल से दोस्ती कर लें.

जब पाकिस्तानी रक्षा मंत्री से पूछा गया कि ट्रंप के कहने के बाद क्या पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड पर साइन करेगा? माने, इजरायल से दोस्ती करेगा? तो ख्वाजा आसिफ का जवाब था, "व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि हमें किसी ऐसे समझौते में शामिल होना चाहिए, जो हमारे मूल उसूलों से टकराता हो."

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सऊदी अरब के अखबार 'अरब न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, ख्वाजा आसिफ ने एक स्थानीय टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप के प्रोपोजल के बारे में पूछने पर बताया,

“फिलहाल हमने इस बारे में कोई पहल नहीं की है, ना ही किसी ने हमसे ऐसा करने को कहा है... हमारा रुख बिल्कुल साफ है कि यह हमें कबूल नहीं है.”

रक्षा मंत्री आसिफ ने आगे कहा, "हम इकलौते देश हैं, जिनके पासपोर्ट पर इजरायल का नाम तक शामिल नहीं है."

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Khawaja Muhammad Asif
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ. (ITG)

25 मई को डॉनल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट किया था. इसमें उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन से खासतौर पर गुजारिश की थी कि वे अब्राहम अकॉर्ड का हिस्सा बनें. ट्रंप ने लिखा था,

‘हो सकता है कि एक-दो देशों के पास इसमें शामिल ना होने की कोई वजह हो, और उसे माना भी जाएगा. लेकिन ज्यादातर देशों को इस समझौते के लिए तैयार होना चाहिए. अगर ऐसा होता है, तो ईरान के साथ होने वाला ये समझौता इतिहास का बहुत बड़ा और खास समझौता बन सकता है. इसकी वजह ये है कि अब्राहम अकॉर्ड संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकिस्तान के लिए बहुत फायदेमंद रहे हैं. और आगे चलकर पूरे मिडिल ईस्ट के लिए और भी बेहतर साबित हो सकता है. इससे पहली बार इस इलाके में असली ताकत, स्थिरता और शांति आ सकती है. इसकी शुरुआत सऊदी अरब और कतर के हस्ताक्षर से होनी चाहिए, और फिर बाकी देशों को भी इसमें शामिल होना चाहिए. मैं इन देशों के लीडर्स से अनुरोध करता हूं कि इसकी प्रक्रिया जल्दी शुरू की जाए.’

इस पोस्ट में डॉनल्ड ट्रंप ने तमाम नेताओं के साथ पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का भी नाम लिया. साथ में कहा कि अगर कोई मुस्लिम देश इस समझौते से पीछे हटता है तो मान लिया जाएगा कि उसकी नीयत सही नहीं है. ट्रंप ने कहा कि अब तक जो कुछ हुआ, उसे भूलकर इस समझौते पर साइन करना चाहिए, ताकि वेस्ट एशिया में शांति आ सके.

अब्राहम अकॉर्ड क्या है?

अब्राहम अकॉर्ड एक समझौता है, जिसकी शुरुआत साल 2020 में हुई थी. पहल डॉनल्ड ट्रंप ने ही की थी, अपने पहले कार्यकाल में. अब्राहम अकॉर्ड्स एक ऐसा समझौता है जिसमें कुछ अरब देशों ने पहली बार आधिकारिक तौर पर इजरायल से दोस्ती की और व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्ते बनाए.

सबसे पहले UAE और बहरीन ने इस पर साइन किया था. इसके बाद मोरक्को और सूडान भी इसका हिस्सा बन गए. इस समझौते के बाद:

  • दोनों देशों के बीच दूतावास खुले
  • व्यापार शुरू हुआ
  • टूरिज्म बढ़ा
  • फ्लाइट्स शुरू हुईं
  • टेक्नोलॉजी और सुरक्षा में सहयोग बढ़ा

इस समझौते का नाम अब्राहम अकॉर्ड इसलिए रखा गया क्योंकि यहूदी, मुस्लिम और ईसाई, तीनों धर्म पैगंबर अब्राहम को मानते हैं. यानी प्रॉफेट अब्राहम तीनों में कॉमन हैं. कुल मिलाकर, अब्राहम अकॉर्ड का मेन मोटिव है मुस्लिम देशों की इजरायल से दोस्ती कराना. कई सारे मुस्लिम देश इजरायल को एक देश के तौर पर मान्यता नहीं देते.

पाकिस्तान की इजरायल से दूरी क्यों?

पाकिस्तान, जो कि एक मुस्लिम देश है, वो भी इजरायल को देश नहीं मानता है. लेकिन अब पाकिस्तान के बेस्ट फ्रेंड ट्रंप ने बकायदा नाम लेकर आदेश दिया है कि समझौते पर साइन करो. अब ऐसे में पाकिस्तान फंस गया. ना तो आसानी से इजरायल के करीब जा सकता है. और ना ही ट्रंप की बात को ठुकरा सकता है.

पाकिस्तान समेत मुस्लिम देशों का इजरायल से दोस्ती ना करने के सबसे बड़ा कारण इजरायल का अरब मुस्लिम देश फिलिस्तीन से विवाद है. फिलिस्तीन खुद को आजाद मुल्क के तौर पर दुनिया में मान्यता चाहता है. भारत भी उसे मान्यता देता है, लेकिन इजरायल उसके वजूद को नहीं मानता. इजरायल पर आरोप लगते हैं कि वो फिलिस्तीन के ज्यादातर इलाकों पर अवैध कंट्रोल रखता है.

वीडियो: ट्रंप अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड साइन करने को क्यों कह रहे?

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