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लोग पैर पर कुल्हाड़ी मारते हैं, यहां पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कुल्हाड़ी पर पैर मार लिया है

और अब करीब 15 करोड़ रुपए इलाज में लगेंगे.

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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया एहसान मनी ने ही इसे कानूनी लड़ाई बनाया था.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी को बड़ा झटका लगा है. झटका इसलिए क्योंकि वो इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के पास भारतीय क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ गया था और मुआवजे की मांग कर रहा था. पीसीबी ने बीसीसीआई से $ 63 मिलियन (करीब 4 अरब 44 करोड़ रुपए) का मुआवजा मांगा था. दलील ये दी थी कि भारत के क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान के साथ 2014 और 2015 में क्रिकेट सीरीज खेलने की बात कही थी जो हुई नहीं. इसके चलते पाकिस्तान को नुकसान हुआ है और भारत इसकी भरपाई मुआवजा देकर करे. मामला आईसीसी की डिस्प्यूट रेजोलुशन कमिटी के पास गया और वहां नंवबर 2018 में पाकिस्तान की ये मांग रद्द कर दी गई. कमिटी ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के साथ जो दो सीरीज खेलने की बात कही थी वो उनकी मर्जी पर निर्भर करता है और इसकी कोई कानूनी वाध्यता नहीं है. इसलिए कानूनी तौर पर बीसीसीआई से किसी भी तरह के मुआवजे की मांग नहीं की जा सकती. Untitled design (18) भारत ने 2008 में मुंबई के 26/11 हमले के बाद से पाकिस्तान के साथ कोई भी सीरीज नहीं खेली है. न तो इंडिया की टीम पाकिस्तान गई और न ही उन्हें इंडिया बुलाया गया. ऐसे में पीसीबी ने उस एग्रीमेंट का हवाला दिया जो बीसीसीआई ने 2014 में साइन किया था और उसमें लिखा था कि इंडिया पाकिस्तान के साथ 6 सीरीज खेलेगी. मगर इसमें एक भी सीरीज नहीं हुई. हालांकि इंडिया और पाकिस्तान आईसीसी के इवेंट्स में आमने सामने हुए हैं, मगर एक दूसरे से होम सीरीज नहीं खेली है. अब मुआवजा तो मिल नहीं रहा था, अब इसी कमिटी ने महीना भर बाद पीसीबी को कहा है कि वो $ 2 मिलियन (करीब 15 करोड़ रुपए) भारत को दे. ये नियम है कि इस तरह के केस में जब किसी पर केस किया जाता है और सामने वाली पार्टी इसे जीत जाती है तो वो हारने वाली पार्टी से कानूनी खर्च मांग सकती है. मुआवजे का केस जीतने पर बीसीसीआई ने भी यही किया. उसने पाकिस्तान बोर्ड से कानूनी खर्च मांगा और कमिटी ने अब पाक बोर्ड को $2 मिलियन चुकाने को कहा है. ये बीसीसीआई की तरफ से मांगे गए कानूनी खर्च का 60 फीसदी है क्योंकि पाकिस्तान पहले ही करीब $1 मिलियन पूरी प्रकिया में खर्च कर चुका है.

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