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CAA और राम मंदिर का जिक्र कर पाकिस्तान UN में लाया प्रस्ताव, भारत ने क्या सुनाया?

पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव में CAA और राम मंदिर का भी जिक्र किया. UN में भारत की प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने इसकी कड़ी आलोचना की.

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संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली (UN General Assembly) में 16 मार्च को इस्लामोफोबिया (इस्लाम से नफरत) के खिलाफ प्रस्ताव पास करने पर वोटिंग हुई. ये प्रस्ताव चीन के सहयोग पर पाकिस्तान ने लाया था. भारत इस वोटिंग में शामिल नहीं हुआ. पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव में CAA और राम मंदिर का भी जिक्र किया. UN में भारत की प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने इसकी कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा,

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“मेरे देश के मुद्दों पर इस डेलिगेशन के गलत विचार हैं. जब असेंबली उस मुद्दे पर चर्चा कर रही है जिस पर गहराई से सोचने, समझदारी और बुद्धिमानी की जरूरत है, इस वक्त डेलिगेशन की ऐसी सोच ठीक नहीं है.”

‘सभी धर्मों से नफरत की आलोचना हो’

UN में भारत ने कहा कि सिर्फ एक धर्म नहीं बल्कि सभी धर्मों के नाम पर होने वाले हर भेदभाव की आलोचना की जानी चाहिए. चाहे वो यहूदी धर्म हो, इस्लाम हो या ईसाइयत. रुचिरा कंबोज ने ये भी कहा कि भेदभाव सिर्फ कुछ खास धर्मों तक सीमित नहीं है. दशकों से सबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि दूसरे धर्म भी भेदभाव और नफरत का शिकार हुए हैं. हिंदुओं, बौद्धों और सिखों से भी भेदभाव होता है.

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प्रस्ताव का 115 देशों ने समर्थन किया

भारत ने कहा कि इस प्रस्ताव से ऐसा ना हो कि आने वाले समय में अलग-अलग धर्मों से नफरत के खिलाफ प्रस्ताव पास किए जाने लगें. इससे संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) धर्म के नाम पर अलग-अलग गुटों में बंट जाएगा. UN को धर्म से ऊपर उठकर सोचना चाहिए.

भारत की तरफ से कहा गया कि ऐसा न हो कि इस तरह के प्रस्ताव हमें एकजुट करने की बजाय विभाजित कर दें. किसी एक धर्म के बजाय सभी धर्मों के खिलाफ नफरत और भेदभाव रोकने के लिए प्रस्ताव पास होना चाहिए. 

इधर, पाकिस्तान की तरफ से लाए गए इस प्रस्ताव का 115 देशों ने समर्थन किया. हालांकि भारत, ब्राजील, फ्रांस , जर्मनी, इटली, यूक्रेन और ब्रिटेन समेत 44 देश वोटिंग से अनुपस्थित रहे.

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विशेष प्रतिनिधि की मांग

पाकिस्तान और चीन के प्रस्ताव में ये भी मांग की गई थी कि इस्लामोफोबिया को काउंटर करने के लिए भी एक स्पेशल प्रतिनिधि को नियुक्त किया जाए. भारत ने इसका विरोध किया. रुचिरा कंबोज ने कहा कि नियुक्ति से पहले ये सोचना चाहिए कि क्या ये UN के बजट और संसाधनों का सही इस्तेमाल है. उन्होंने शरणार्थियों को पनाह देने के भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि हमने पारसियों, बौद्धों और यहूदियों को तब शरण दी, जब धार्मिक नफरत के चलते उनका उत्पीड़न किया जा रहा था.

इससे पहले, 2022 में UN में एक प्रस्ताव पारित हुआ था. इसके तहत 15 मार्च को इस्लामोफोबिया रोकने का दिन घोषित किया गया था. दरअसल, 2019 में 15 मार्च को न्यूजीलैंड में दो मस्जिदों में गोलीबारी हुई थी. इसमें 50 लोग मारे गए थे. इस घटना की दुनियाभर में निंदा की गई थी.

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