ये उन मासूम बच्चों की रोने की आवाज है, जो अपने स्कूल से थके-मांदे अपने घर लौट रहे थे. इनकी बस पर हमला किया गया. पत्थर फेंके गए, बस रोककर तोड़फोड़ की गई. वो भी सिर्फ इसलिए कि फिल्म का विरोध करना है. खुद को राजपूत कहने वाले कुछ लोग तो विरोध पर इतने आमादा हैं कि उन्होंने बच्चों के आंसुओं को भी फेक बता दिया है. वो कह रहे हैं कि गुरुग्राम पुलिस से पूछिए, वो बता रही है कि ये फेक है. लोग अपने राजपूती शौर्य का प्रदर्शन करने के लिए बार-बार ये तर्क दे रहे हैं कि बच्चों पर हमले का वीडियो फेक है. उसकी एक बानगी देखिए-

ये सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ मैसेज हैं, जो बच्चों पर हुए हमले को फेक बता रहे हैं.
बच्चों के आंसुओं में डूबे हुए चेहरे किसी भी पत्थर दिल को पिघलाने वाले हैं. लेकिन ये तो वो राजपूत हैं, जो खुद को सही साबित करने के लिए बच्चों पर हमला कर कहते हैं कि ये झूठा है. इसकी सच्चाई भी खुद उसी गुरुग्राम पुलिस ने बताई है, जिससे पूछने के लिए ये लोग कह रहे हैं. गुरुग्राम के कमिश्नर ऑफ पुलिस संदीप खीरवार ने बताया है
'बच्चों की बस पर हमला हुआ था. इस मामले में पुलिस ने अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया है. उनके खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा और जेल भेजा जाएगा.'

बच्चों की बसों पर हमला करने वालों के समर्थकों, ये वीडियो सच है और 18 लोगों की गिरफ्तारी भी. अब बच्चों पर हमले का कोई नया तर्क लेकर आओ. लेकिन याद रखो, इसमें सबके बच्चे हैं. और अपने बच्चों पर हमले के खिलाफ एक जानवर भी डटकर लड़ता है, हम तो फिर भी इंसान हैं. अगर सरकार इन तालिबानियों के खिलाफ सख्त ऐक्शन नहीं लेती तो लोग अपने बच्चों को बचाने के लिए इनके खिलाफ जरूर उतरेंगे.
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