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चला था बड़का आतंकी बनने, बिकवा दिए बीवी के गहने

और हां, ओवैसी ने इन्हीं आतंकियों की 'वकालत' की थी.

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हैदराबाद से NIA ने 29 जून को 5 लोगों को उठाया, ISIS से कनेक्शन होने के शक में. हां-हां वही पांच लोग, जिनके लिए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि पैसे देकर छुड़ाने में उनकी कानूनी मदद करेंगे. शक सही भी प्रूव हो गया है. पर अभी पता चला है कि इन सबका डेडिकेशन लेवल दशरथ मांझी हैं. इन आतंकियों ने 'आतंक फैला के ही रहेंगे' का कफन सिर पर जरूर बांध लिया हो, पर खोपड़ी खाली है. ये पकड़ाए सो कॉल्ड आतंकी इतने लुल हैं कि सेंस ऑफ ह्यूमर यूज किया जाए तो मारू चुटकले तैयार हो जाएं. कइसे? अइसे...
जो लोग पकड़ाए हैं, इनका है एक ग्रुप. ग्रुप का है एक लीडर, इब्राहिम यजदानी. इतना डेडिकेट था कि पैसा कम पड़ा तो बीवी के गहने भी बेच दिए.
इनके ग्रुप का ही एक लड़का था बहुत तेज. नाम था फहाद. तेज मतलब टेकसेवी. उसको सीखनी थी शूटिंग. कैमरे वाली नहीं बंदूक वाली. तो बस ऑर्डर कर दिया अमेजन पर, एयर पिस्टल विद पेलेट्स. पर ऑर्डर डिलीवर हो पाता इससे पहले ही पुलिस इनकी डिलीवरी करा ले गई थी.
NIA की जांच में सामने आया है एक पेपर. पेपर, जो ISIS के स्वघोषित खलीफा साहब अबू-बकर-अल-बगदादी के प्रति इन सभी ग्रुप मेंबर्स का शपथनामा, माफ़ कीजिएगा बया (बया पंछी वाला मत समझ लेना). बया का मतलब होता है निष्ठा या शपथ. इसपर पांचों के सिग्नेचर हैं. ये वाला पेपर इन लोगों ने ISIS के हैंडलर शफी अरमार को भी भेजा था. शफी ही है जरिया, जो मेनली भारत से ISIS के लिए रिक्रूटमेंट करता है. ट्विटर पर ही यजदानी-शफी में मेल-जोल बढ़ा. बाद में अरमार ने और भाव बढ़ा दिया ये कहकर कि उनकी बया पहुंचा दी जाएगी अबू-बकर-अल-बगदादी को.
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शफी अरमार, उम्र 26

NIA ने एक जॉर्डन के नागरिक की पहचान भी की है. जो गुरु था ग्रुप के इब्राहिम यजदानी का. यजदानी का ब्रेनवॉश भी इसने ही किया था. उस समय यजदानी हुआ करता था सऊदी अरब में. ये जो जॉर्डन वाला गुरु था,अल-आबुदी. ये पहले ही सीरिया के रास्ते अल्लाह के पास जा चुका है.
NIA की पूछताछ में ये भी पता चला है, इब्राहिम यजदानी दो बार अपनी पत्नी एक साल के बेटे और इलियास के साथ ग्रीस होते हुए निकल लेना चाहता था सीरिया. मगर कामयाब न हो सका. इनके चक्कर में अब भाई इलियास भी पकड़ा गया है. इब्राहिम जब सऊदी अरब से लौटा तो उसके पास नौकरी तो थी नहीं, करता क्या? अमेजन पर खुद को रजिस्टर किया और बन गया मोबाइल एसेसरीज बेचने वाला.
प्रैक्टिस चालू थी तो हैदराबाद के एक लोकल डीलर से लेकर आये थे एयर-राइफल. उससे पहले नांदेड से दो चाइनीज पिस्टल भी लाये थे, जिनका अरमार ने ही मुफ्त में इंतजाम कराया था. ये रिक्रूटमेंट प्रोसेस के टाइम की बात है.

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