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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की कुर्सी जाने वाली है? कौन है उनसे नाराज?

IRGC ईरान में सुप्रीम लीडर की आर्मी है. अयातुल्लाह अली खामेनई की हत्या के बाद ये कोर फ्रंट फुट पर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रही है. ईरान के हमले में IRGC के कमांडर इन चीफ की मौत हो गई थी. इसके बाद ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी इस पद पर हैं. दावा है कि अराघची अपनी सरकार की बात सुनने के बजाय इन्हीं के इशारों पर चल रहे हैं.

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की IRGC से नजदीकी है. (तस्वीर- पीटीआई)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को पद से हटाने की मांग हो रही है. वजह है लीडरशिप में कथित मनमुटाव. दावा किया जा रहा है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने IRGC से नजदीकियां बढ़ा ली हैं. इतनी कि वो अब कैबिनेट मिनिस्टर कम और IRGC चीफ के सहयोगी के तौर पर ज्यादा नजर आ रहे हैं. और उन्हीं के निर्देशों पर काम कर रहे हैं. यही वजह है कि राष्ट्रपति पेजेश्कियन और संसद के स्पीकर बाधेर गालीबाफ कथित रूप से अराघची से नाराज हैं.

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IRGC ईरान में सुप्रीम लीडर की आर्मी है. अयातुल्लाह अली खामेनई की हत्या के बाद ये कोर फ्रंट फुट पर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रही है. ईरान के हमले में IRGC के कमांडर इन चीफ की मौत हो गई थी. इसके बाद ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी इस पद पर हैं. दावा है कि अराघची अपनी सरकार की बात सुनने के बजाय इन्हीं के इशारों पर चल रहे हैं.

ईरान इंटरनेशनल ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और संसद के स्पीकर बाधेर गालीबाफ विदेश मंत्री अब्बास अराघची को पद से हटाना चाहते हैं. ये क्लियर कर दें कि इस मीडिया आउटलेट का ईरान में विपक्ष की तरफ झुकाव बताया जाता है. 

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रिपोर्ट के मुताबिक अराघची पर आरोप है कि वे न्यूक्लियर डील पर राष्ट्रपति पेजेश्कियन को बिना बताए केवल IRGC चीफ के इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो कर रहे हैं. और इस मसले में पेजेश्कियन से कोई बातचीत या सलाह नहीं ले रहे हैं.

सोर्सेज के हवाले से बताया गया कि पिछले दो हफ्तों से अराघची राष्ट्रपति पेजेश्कियन को बिना बताए, पूरी तरह से वाहिदी के तालमेल और उनके निर्देशों पर काम कर रहे हैं. पेजेश्कियन इससे बेहद नाखुश हैं. उन्होंने अपने करीबियों से ये तक कह दिया है कि अगर ये सब ऐसे ही चलता रहा, तो वे अराघची को उनके पद से हटा देंगे.

ईरान के शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेदों की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं. बीती 28 मार्च को आई रिपोर्ट्स में राष्ट्रपति पेजेश्कियन और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर अहमद वाहिदी के बीच विवाद होने की बात सामने आई थी. उस समय ईरान इंटरनेशनल ने सोर्सेज के हवाले से बाताया था कि जंग और देश की अर्थव्यवस्था पर जो असर पड़ा उसे हैंडल करने को लेकर विवाद शुरू हुआ था.

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फिर तीन दिन बाद, ईरान इंटरनेशनल को ऐसी खबरें मिलीं कि राष्ट्रपति पेजेश्कियन पॉलिटिकल डेडलॉक फेस कर रहे थे. माने जंग में मारे गए सरकारी अधिकारियों की जगह नए लोगों को अपॉइंट करने तक का राइट उनसे छीन लिया गया था. तब वाहिदी ने साफ तौर पर ये कह दिया था कि युद्ध के नाजुक हालातों को देखते हुए, अगले आदेश तक सभी जरूरी और संवेदनशील पदों पर नियुक्तियां सीधा रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स करेगी.

ईरान की जो टीम अमेरिका से शांतिवार्ता कर रही है उसके लीडर गालिबाफ चुने गए थे. 27 अप्रैल को 261 सांसदों ने बकायदा संसद में स्टेटमेंट जारी कर इसका सपोर्ट किया था. लेकिन ईरान में कुछ नेता ऐसे हैं जो कट्टरपंथी माने जाते हैं. ये लोग सईद जलीली नाम के एक बड़े नेता के गुट के हैं. इन्होंने गालिबाफ को टीम का लीडर चुने जाने का विरोध किया था.

बाद में गालिबाफ ने नेगोशिएशन टीम के लीडर के पद से इस्तीफा दे दिया. क्योंकि उन्होंने बातचीत में न्यूक्लियर एनर्जी का मुद्दा उठाने की कोशिश की थी, और इस बात पर उन्हें ‘ऊपर से’ काफी डांट पड़ी. जैसे ही गालिबाफ हटे, विदेश मंत्री अब्बास अराघची अकेले ही 24 अप्रैल को पाकिस्तान पहुंचे और वहां ईरान की तरफ से एक प्रपोजल पेश किया. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उनके उस ऑफर को सिरे से खारिज कर दिया.

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