कश्मीर मतलब ज़मीं पर जन्नत कश्मीर मतलब आतंक की पनाहगाहकश्मीर के ओमर हाफिज़ को हिंदुस्तान भर में ऐसे कई चुभते हुए सवाल झेलने पड़ते थे. देश के बाकी राज्यों में उन्हें कश्मीर के बारे में बनी पूर्वधारणाओं को झेलना पड़ता था. ओमर को कश्मीरी आवाम की बाकी हिंदुस्तान से दूरी भी दिखाई देती थी.
कश्मीर का समाज इन दो पहचानों से इतर भी बहुत कुछ है. बाकी के हिंदुस्तानी सोचते हैं कि स्कूल जाते बच्चे कब क्रिकेट की गेंद की जगह ग्रेनेड उठा लें कोई भरोसा नहीं. वहीं कश्मीर की औरतें क्लानिश्कोव के साए में घर से बाहर जाते मर्दों के वापस न आने तक सिहर कर ही रहती हैं. पिछले कुछ दिनों से एक कश्मीरी नौजवान अपने कैमरे के ज़रिए इस दूरी को खत्म करने की कोशिश में लगा है.

ओमर हाफिज़
2004 से सोशल एक्टिविज़्म में लगे ओमर ने इसे बदलने की ठानी. ओमर ने दोनों पक्षों की दूरियों को कम करने के लिए सबसे पहले देश भर के कलाकारों को कश्मीर का इतिहास पढ़ने और उसे अपनी कला में दिखाने की अपील की. इसके बाद उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को एक छोटी सी डॉक्युमेंट्री में फिल्माया और कश्मीर में लोगों को दिखाया. ओमर को लगता था कि चार-पांच हज़ार लोग ही इस डॉक्युमेंट्री को देखेंगे मगर सोशल मीडिया के सारे प्लेटफॉर्म को मिलाकर कुल 15 लाख से ज़्यादा लोग इसे देख चुके हैं.

'अथवास' नाम की इस 8 मिनट की फिल्म में देश के तमाम हिस्सों के कलाकार अपनी-अपनी कला के ज़रिए कश्मीर की अपनी समझ को दिखा-बता रहे हैं. वैसे ओमर अब तक 50 से ज़्यादा सामाजिक संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. इनमें सेक्सुअल वॉयलेंस, वीमेन इंपावरमेंट जैसे तमाम मुद्दे शामिल हैं. इस समय ओमर रोहिंग्या के शरणार्थियों के लिये काम कर रहे हैं.
आप भी इनकी इस डॉक्युमेंट्री को देखिए :
https://youtu.be/431V2w1LstE










