कृष्णा पुनिया हैं न. डिस्कस थ्रोअर हैं. ओलंपियन हैं. बीजिंग ओलंपिक में गईं थीं. राष्ट्रमंडल खेलों में ट्रैक और फील्ड में गोल्ड मेडल जीतने वाली इकलौती इंडियन हैं. लेकिन आज ये सब मायने नहीं रखता. दरअसल अभी वो असल ज़िंदगी की सुपरहीरो हैं. और कुछ ऐसा किया जिससे हम सबको सीख लेनी चाहिए.
नया साल. एक जनवरी का दिन था. राजस्थान के चुरू में कोई जगह है सादलपुर. वहां एक रेलवे क्रॉसिंग के पास बाइक पर तीन लफंगे दो लड़कियों को परेशान कर रहे थे. उन्हें गंदा-गंदा कह रहे थे और छेड़छाड़ भी कर रहे थे. एक लड़की पर तो हाथ भी उठा दिया. तभी वहीं से एक कार निकली. कार में कृष्णा पुनिया थीं. उन्होंने लड़कियों को परेशान देखा तो कार से उतर पड़ीं. जाकर पूछा, क्या चल रहा है. लड़कियों ने बताया, लड़के उन्हें परेशान कर रहे हैं.

उनको देख लफंगों की हवा टाइट हो गई. भागे बड़े जोर से. लेकिन कृष्णा पुनिया तो ठहरीं एथलीट. ओलंपियन. लफंगे उनसे तेज न भाग सके. पचास मीटर तक दौड़ाने के बाद एक को पकड़ने में सफल भी हो गईं. दो लफंगे जैसे-तैसे भाग निकले. दिन-दहाड़े चार बजे ये सब हो रहा था. तीन-चार सौ के करीब लोग ये धरपकड़ देख जुट गए. पुलिस को फोन कर बुलाया गया. था तो स्टेशन वहीं पास में ही लेकिन दो बार बुलाने पर पुलिस आई. आई और जिसको कृष्णा ने पकड़ रखा था उस मुस्टंडे को पकड़ ले गई. लड़के के भाई ने बाद में एफआईआर भी कराई.
कृष्णा ने बाद में मीडिया वालों से कहा भी, हमारे साथ दिक्कत ही यही है, जब कुछ गलत होता है तो उसे रोकने के लिए आगे नहीं आते. किनारे खड़े होकर देखते रहते हैं. दुनिया कैसी भी हो. कृष्णा पुनिया ने बहुत सही काम किया है. उनकी जितनी तारीफ करें, कम है. उनसे सीख लेनी चाहिए. जहां कहीं भी गलत हो, हम आवाज उठाएं. किसी को भी किसी से भी जबरदस्ती न करने दें. और कभी भी किनारे खड़े हो बेवकूफों जैसे तमाशा न देखें. घटिया लोगों में हिम्मत बहुत कम होती है, एक बार उनको कड़क के टोक भी दो तो उनके हौसले पस्त हो जाते हैं. और एक बार अगर वो ऐसा घटियापा करने आएं और लोगों ने नहीं रोका, तो अगली बार सिर पर चढ़कर नाचते हैं.
जाते-जाते वो मौका भी देख लीजिए, जब कृष्णा ने गोल्ड जीता था. https://www.youtube.com/watch?v=rTUyMhmIM5o
पहली जनवरी को ही हो गया 2017 का बेस्ट गोल!