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9/11 हमले की इस एक तस्वीर को अमेरिका ने दुनिया से क्यों छिपा दिया था?

11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले में हजारों लोगों की जान गई, लेकिन कुछ तस्वीरें और आखिरी पल आज भी उस त्रासदी की भयावहता याद दिलाते हैं.

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9/11 हमले की कुछ आखिरी तस्वीरें 25 साल बाद भी सवाल करती हैं. (Courtesy: India Today)

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  • 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में दो एयरप्लेन टकराने से आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई और इमारतें ढह गईं।
  • यह हमला अल-कायदा आतंकवादी समूह द्वारा orchestrated था, जिसने विमानों को हाईजैक कर महत्वपूर्ण अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
  • 9/11 हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई, और अमेरिका तथा विश्व स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई।

दुर्घटनाओं का कोई अलग से दिन नहीं होता. हम दिनों को दुर्घटनाओं से याद करते हैं. वो दिन भी बाकी दिनों जैसा बेहद आम और शरीफ़ किस्म का दिन था. लेकिन कुछ ही देर में दुनिया बदलने वाली थी. इतिहास लिखा जाने वाला था. कैलेंडर में 25 साल पीछे चलते हैं. 11 सितंबर 2001 की तारीख़. कुछ देर पहले ही न्यूयॉर्क में दो यात्री विमान मिसाइल बनकर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की दो गगनचुंबी इमारतों से टकराए थे. लोग इसे इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला बता रहे हैं. हजारों की जान जा चुकी है. फायर फाइटर्स अपने जीवन का सबसे मुश्किल रेस्क्यू कर रहे हैं. लोगों को बिल्डिंग से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है. 

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कईयों ने आग और धुएं से बचने के लिए बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान दे दी. उनकी मौत तो तय थी लेकिन रास्ता उन्होंने खुद चुना. आपने वो घटनाएं देखी होंगी जहां एक इमारत में आग लगती है और लोग आग से बचने के लिए खिड़की से कूदकर जान दे देते हैं. उस लोमहर्षक मंजर को जिसने भी देखा वो जीवनभर नहीं भूलेगा कि उस दिन क्या हुआ था.

इस अफरा-तफरी के बीच किसी की नजर उस महिला पर क्यों नहीं जा रही? हमले की तस्वीरों में दिखी वो महिला कौन थी? इमारत से सीधी रेखा में नीचे आता वो आदमी कौन था जिसकी फोटो छापने के लिए अखबारों को माफी मांगनी पड़ी और फिर कई साल तक किसी ने उस फोटो को नहीं देखा. पेन्सिलवेनिया में क्रैश हुई फ्लाइट-93 में सवार लॉरेन की कहानी क्या है जिनके साथ उनके गर्भ में मौजूद उनका पहला बच्चा भी मारा गया. काश वो एयरपोर्ट थोड़ा देर से पहुंची होतीं. 

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वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले में हजारों लोग मारे गए थे.

9/11 के हजारों विक्टिम्स में से ये सिर्फ उन तीन लोगों की कहानी है, जिनकी जिंदगी तो उस दिन खत्म हो गई, लेकिन उनकी आखिरी तस्वीरें और आखिरी पल 25 साल बाद भी हमसे सवाल करते हैं.

11 सितंबर को ठीक 8 बजकर 46 मिनट पर फ्लाइट AA11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टावर से टकराई. प्लेन इमारत की 93वीं और 99वीं मंजिल के बीच घुस गया और उसमें भरा 10 हजार गैलन फ्यूल फैल गया. इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, ठीक 17 मिनट बाद 9 बजकर 3 मिनट पर फ्लाइट UA175 ने साउथ टावर को हिट किया. एक प्लेन ने पेंटागन को निशाना बनाया और कैपिटल हिल की ओर बढ़ रहा एक विमान पेन्सिलवेनिया में क्रैश हो गया.

इन सबके बीच एक महिला नॉर्थ टावर में बने उस बड़े से छेद के किनारे खड़ी थी और हाथ हिला रही थी. मदद के लिए पुकार रही थी. उसे पता था कि मौत तय है लेकिन उसने उम्मीद का रास्ता चुना. वह करीब 100 मिनट तक वहां खड़ी होकर हाथ हिलाती रही लेकिन उसे बचाने कोई नहीं आया. उस महिला की दर्जनों तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर मौजूद हैं. पिछले 25 साल से लोग इस बात पर बहस करते रहे हैं कि वह महिला आखिर कौन थी. लेकिन अब लगभग मान लिया गया है कि उसका नाम एडना सिंट्रॉन था.

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एक महिला नॉर्थ टावर में बने उस बड़े से छेद के किनारे खड़ी थी और हाथ हिला रही थी. (Courtesy: Instagram)
कौन थीं एडना सिंट्रॉन

एडना 46 साल की थीं. वह मार्श एंड मैक्लेनन कंपनी में असिस्टेंट बिलिंग एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम करती थीं. उनका दफ्तर नॉर्थ टावर की 97वीं मंजिल पर था. दोनों ही टावर 110 मंजिल ऊंचे थे और प्लेन की टक्कर के बाद 1 घंटे 42 मिनट के अंदर भरभराकर गिर गए. विमान एडना के दफ्तर वाले हिस्से से होकर गुजरा था. सुबह का वक्त था. लोग ऑफिस पहुंच ही रहे थे. उस रोज़ मार्श एंड मैक्लेनन के 295 कर्मचारी और 63 सलाहकार मारे गए. नॉर्थ टावर में मौजूद किसी भी दूसरी कंपनी के मुकाबले यह सबसे बड़ी संख्या थी.

विमान के टकराने के कुछ ही मिनट बाद सड़क पर मौजूद लोगों और आसपास की इमारतों की छतों पर खड़े फोटोग्राफरों ने उस टूटे हुए हिस्से में कुछ हलचल देखी. वहां एक महिला खड़ी थी. वह कैसे भी करके बिल्डिंग के उस टूटे हुए किनारे तक पहुंच गई थी, जहां विमान ने टक्कर मारी थी. बाहर की हवा वहां से सीधे अंदर आ रही थी. महिला इमारत के टूटे हुए एक बाहरी खंभे के सहारे खड़ी थी और अपना दायां हाथ हिला रही थी. काफी देर तक वो हाथ हिलाती रही लेकिन कोई उसे बचाने नहीं आया.

विमान की टक्कर से नॉर्थ टावर की तीनों सीढ़ियां टूट गईं. छत के दरवाजे बंद थे. धुएं की वजह से हेलिकॉप्टर वहां उतर नहीं सकता था. 92वीं मंजिल या उससे ऊपर मौजूद एक भी इंसान जिंदा नहीं बचा. कुल 1355 लोग मारे गए. एडना करीब 1300 फीट की ऊंचाई पर तेज हवा के बीच खड़ी रहीं. नीचे मौजूद उस शहर से मदद मांगती रहीं, जो उसे देख तो रहा था लेकिन उस तक पहुंच नहीं सकता था. मौके पर मौजूद लोगों और वीडियो फुटेज के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि महिला टावर गिरने से करीब 10 सेकंड पहले तक वहां मौजूद थी और हाथ हिला रही थी.

उस महिला की आधिकारिक पहचान कभी नहीं हो सकी. उसके अवशेष भी कभी नहीं मिले. उसकी पहचान सिर्फ तस्वीरों, वीडियो और उन लोगों की पहचान पर टिकी है, जो उसे जानते थे और तस्वीरों से उसे पहचान सकते थे.

महिला के पति विलियम का मानना था कि वो एडना ही थीं. एडना और विलियम ने जिंदगी में बहुत कुछ साथ झेला था. एक समय ऐसा भी आया था, जब दोनों के पास रहने के लिए घर नहीं था. विलियम के शराब पीने के दौर में भी एडना ने उसका साथ दिया. एडना मदद के लिए करीब 100 मिनट तक हाथ हिलाती रहीं लेकिन कोई उसे बचा नहीं सका.

अब दूसरी तस्वीर.

कहा जाता है कि ये वो तस्वीर है जिसे अमेरिका में लगभग किसी को भी दोबारा देखने की इजाजत नहीं थी. तस्वीर में दिख रहे इस आदमी की पहचान आज तक पक्के तौर पर नहीं हो पाई. ये फोटो एसोसिएटेड प्रेस के फोटोग्राफर रिचर्ड ड्रू ने 11 सितंबर, 2001 को सुबह 9 बजकर 41 मिनट और 15 सेकंड पर खींची थी. वह उस वक्त वेस्ट और वेसी स्ट्रीट के पास खड़े थे. तस्वीर में एक आदमी सफेद जैकेट और ब्लैक पैंट पहने हुए नजर आ रहा है. वह नॉर्थ टावर के सामने सिर के बल नीचे गिर रहा है. उसके हाथ शरीर के दोनों तरफ हैं, एकदम सीधे. एक घुटना मुड़ा हुआ है और पूरा शरीर इमारत सीधी लाइनों के सामने बिल्कुल उल्टा दिखाई दे रहा है.

यह तस्वीर 12 सितंबर को न्यूयॉर्क टाइम्स के पेज नंबर 7 पर छपी थी. इसे देखकर लोग गुस्से से भर गए. पाठकों ने इसे बेहूदा, घटिया, भयानक, बेरहम और सनकी बताया. जिन अखबारों ने तस्वीर छापी, उनमें से कुछ ने इसके लिए बाद में माफी तक मांगी. इसके बाद यह तस्वीर अमेरिकी मीडिया से लगभग गायब ही हो गई. कई साल तक इसे कहीं नहीं दिखाया गया. उस वक्त अमेरिका में 9/11 की हर तस्वीर और हर वीडियो दिखाई जा रही थी, लेकिन इस तस्वीर को लगभग छिपा दिया गया.

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यह कुल 12 तस्वीरों की एक सीरीज का सिर्फ एक फ्रेम है.

इस फोटो को लेकर सबसे पहली गलतफहमी यही है कि इसमें दिख रहा आदमी बिल्कुल शांति से नीचे गिर रहा है. जबकि ऐसा नहीं था. यह कुल 12 तस्वीरों की एक सीरीज का सिर्फ एक फ्रेम है. बाकी तस्वीरों में यह आदमी उसी तरह गिरता और हाथ-पैर मारता दिखाई देता है, जैसे आमतौर पर गिरते वक्त कोई इंसान करता है.

इमारत की सीढ़ियां खत्म हो चुकी थीं. भीतर का तापमान इतना ज्यादा हो गया था कि बिल्डिंग की स्टील भी उस गर्मी को सहन नहीं कर पाई. न नीचे जाने का कोई रास्ता था और न ऊपर. उस सुबह करीब 200 लोगों ने इमारत की खिड़कियों के बाहर कदम रखा. कुछ अकेले कूदे और कुछ को एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए भी देखा गया. उनमें से एक व्यक्ति साउथ टावर के नीचे मौजूद फायरफाइटर डैनियल सुहर से टकराया और उनकी मौत हो गई.

न्यूयॉर्क सिटी के मेडिकल एग्जामिनर से इस बारे में पूछा गया था और उनका जवाब बिल्कुल साफ था. इनमें से किसी भी मौत को आत्महत्या नहीं माना गया. 11 सितंबर, 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में हुई हर मौत, जिसमें खिड़की से बाहर आने वाले लोग भी शामिल थे, सरकारी रिकॉर्ड में हत्या के तौर पर दर्ज की गई. मेडिकल एग्जामिनर के कार्यालय ने इन लोगों के लिए 'जम्पर' यानी कूदने वाला शब्द इस्तेमाल करने से साफ इनकार कर दिया.

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इसे इसलिए दबा दिया गया क्योंकि यह तस्वीर असहनीय है.
तस्वीर में दिख रहे आदमी पर लौटते हैं. वास्तव में ये था कौन?

सबसे पहले कनाडा के एक पत्रकार ने अनुमान लगाया कि यह आदमी नोर्बर्टो हर्नांडेज़ हो सकता है. वह विंडोज ऑन द वर्ल्ड में पेस्ट्री शेफ थे. लेकिन उनके परिवार ने इस पहचान को मानने से साफ इनकार कर दिया. 2003 में अपनी स्क्वायर मैगजीन की कहानी पर काम करते हुए टॉम जुनोड ने तस्वीरों की पूरी 12 फ्रेम वाली सीरीज देखी. उन्होंने भी नोर्बर्टो हर्नांडेज़ को उस आदमी के तौर पर खारिज कर दिया. इसके बाद जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वह था जोनाथन ब्राइली.

जोनाथन 43 साल के थे. वह विंडोज ऑन द वर्ल्ड में साउंड इंजीनियर के तौर पर काम करते थे. उनका काम 106वीं मंजिल पर था. जोनाथन के भाई टिमोथी, जो पुलिस अधिकारी थे, ने उनके शव की पहचान की थी. हालांकि उनकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई और अब शायद कभी हो भी नहीं सकती.

टॉम जुनोड ने 25 साल पहले एक बात लिखी थी, जो इस तस्वीर की सबसे मजबूत व्याख्या है. उन्होंने लिखा कि यह तस्वीर इसलिए नहीं छिपाई गई क्योंकि इसमें कोई भयानक खून-खराबा दिखाई दे रहा है. न तो इसमें खून है, न ही टकराने का कोई दृश्य और न ही कोई बहुत डरावनी या वीभत्स चीज. असल में इसे इसलिए दबा दिया गया क्योंकि यह तस्वीर असहनीय है. वो इंसान अपनी जिंदगी के आखिरी कुछ सेकेंड्स में बिल्कुल अकेला था. उस दिन उन टावरों से कूदे सैकड़ों लोगों में से लगभग किसी की भी मौत के साथ उसका नाम नहीं जुड़ा. 'द फॉलिंग मैन' उन सभी लोगों का चेहरा बन गया.

जरा देर से पहुंचतीं तो…

11 सितंबर 2001 की सुबह लॉरेन ग्रैंडकोलस को अपने पति जैक के पास सैन फ्रांसिस्को लौटना था. वह न्यू जर्सी अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गई थीं. 38 साल की लॉरेन मार्केटिंग और विज्ञापन के क्षेत्र में काम कर चुकी थीं. कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी थी, क्योंकि वह महिलाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए प्रेरित करने वाली एक किताब लिखना चाहती थीं. नौकरी छोड़ने की एक सुखद वजह और थी. लॉरेन और जैक अपने पहले बच्चे का इंतजार कर रहे थे. वह तीन महीने की गर्भवती थीं.

11 सितंबर की सुबह लॉरेन नेवार्क एयरपोर्ट पहुंचीं. वह उम्मीद से कुछ जल्दी एयरपोर्ट पहुंच गई थीं. इसलिए उन्होंने अपनी पहले से तय उड़ान के बजाय सैन फ्रांसिस्को जाने वाली 'United Airlines Flight 93' में सीट ले ली.

विमान सुबह 40 मिनट की देरी से ठीक 8 बजकर 42 मिनट पर टेकऑफ करता है. लॉरेन सीट 11D पर बैठी थीं. ये उनकी बुरी किस्मत ही थी जो उन्हें इस फ्लाइट पर लेकर आई थी. जल्दी घर पहुंचने के लिए लॉरेन ने जिस प्लेन की टिकट ली वो कभी अपने गंतव्य तक पहुंचा ही नहीं.

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38 साल की लॉरेन मार्केटिंग और विज्ञापन के क्षेत्र में काम कर चुकी थीं.

विमान के उड़ने के कुछ देर बाद चार आतंकवादियों ने उसे हाईजैक कर लिया. यात्रियों को धीरे-धीरे समझ आने लगा कि विमान में कुछ बहुत गलत हो चुका है. उसी दौरान लॉरेन ने अपने घर फोन किया. उनके पति जैक सो रहे थे. फोन उठा नहीं. कॉल उनके घर की आंसरिंग मशीन पर रिकॉर्ड हो गई. यह कॉल करीब 46 सेकंड तक चली. बाद में एफबीआई ने जैक से उस रिकॉर्डिंग के बारे में पूछताछ की और उसकी जानकारी दर्ज कर ली. नेशनल पार्क सर्विस के रिकॉर्ड के मुताबिक, लॉरेन की आवाज बिल्कुल शांत थी. उन्होंने जैक से कहा कि फ्लाइट में कुछ दिक्कत हो गई है. वो बार-बार दोहराती रहीं कि 'जैक, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं. घरवालों से कहना कि मैं उन्हें भी बहुत प्यार करती हूं.' आखिर में लॉरेन ने जैक से 'अलविदा' कहा और फोन कट गया.

लॉरेन को अंदाजा था कि कुछ गड़बड़ है, लेकिन उनकी आवाज में कोई घबराहट नहीं थी. यह शायद उस कॉल की सबसे डरावनी बात थी. फ्लाइट 93 में बैठे यात्रियों को जमीन पर मौजूद लोगों से फोन कॉल के जरिए पता चला कि दूसरे विमानों को भी हाईजैक किया गया है और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हो चुका है.

यात्रियों को समझ आ गया था कि उनका विमान भी किसी बड़े हमले का शिकार हो सकता है. इसलिए कई यात्रियों ने योजना बनाकर हाईजैकर्स पर हमला कर दिया. आखिर में फ्लाइट-93 पेनसिल्वेनिया के शैंक्सविल के पास एक खेत में गिर गई. विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए. लॉरेन और उनके अजन्मे बच्चे का नाम भी उन लोगों में दर्ज है. आतंकियों की मंशा इस प्लेन को वॉशिंगटन स्थित कैपिटल हिल से टकराने की थी.

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लॉरेन न्यू जर्सी अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गई थीं.
मेज पर रह गई अधूरी किताब

लेकिन लॉरेन की कहानी विमान गिरने के साथ खत्म नहीं हुई. वो तो चली गईं लेकिन उनकी मेज पर एक अधूरी किताब रह गई. वो ऐसी किताब लिख रही थीं जो बड़ी उम्र की महिलाओं को अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा दे पाए. लॉरेन की मौत के बाद उनकी बहनों ने उस अधूरी किताब को पूरा किया. किताब का नाम रखा गया 'You Can Do It: The Merit Badge Handbook for Grown-Up Girls.' लॉरेन और जैक अपने पहले बच्चे की राह देख रहे थे. 2002 की क्रिसमस के लिए घर में एक नया क्रिसमस स्टॉकिंग लगाने का प्लान बना रहे थे. लॉरेन की मौत के बाद जैक ने वो स्टॉकिंग उनकी याद में 9/11 मेमोरियल म्यूजियम को दे दिया.

अगर वह उस सुबह एयरपोर्ट थोड़ा देर से पहुंचतीं, तो शायद उस फ्लाइट में नहीं बैठतीं. अगर वह अपनी तय उड़ान से ही जातीं, तो शायद कहानी कुछ और होती. सबकुछ खत्म हो गया लेकिन जैक के पास उनकी पत्नी लॉरेन की आखिरी आवाज बची रही.

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