नागालैंड से एक चिंताजनक खबर आई है. सरकारी विभागों का पैसा नागालैंड के उग्रवादी संगठनों के पास पहुंच रहा है.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, एनआईए ने अपनी जांच में पाया है कि नागालैंड के उग्रवादी संगठनों- NCNC(K), CSCN(IM) और नागा नेशनल काउंसिल को राज्य के चौदह सरकारी विभागों से एक्सटॉर्शन का पैसा मिलता है. इन संगठनों में से NSCN(IM) राज्य में शांति बहाली के लिए सरकार के साथ एक अग्रीमेंट साइन कर चुका है.
18 जनवरी को जब एनआईए ने कई विभागों की तलाशी लेकर कई डॉक्युमेंट सीज़ किए हैं.
एनआईए के मुताबिक, ''हमें कई ऐसे कागज़ात मिले हैं जिनके मुताबिक कम से कम 14 विभाग ऐसे हैं जो नागा संगठनों को रेगुलर पैसा दे रहे हैं. हमने लगभग 2 करोड़ के भुगतान की रसीदें ज़ब्त की हैं. आगे की जांच जारी है.''अभी शुरुआती जांच में इस पूरे रैकेट से जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं, जिनसे साबित होता है कि राज्य सरकार का पैसा उग्रवादियों के पास पहुंच रहा है. गौरतलब है कि पूर्वोत्तर के राज्यों में संगठित तरीके से एक्सटॉर्शन एक आम चीज़ है. माना जा रहा है कि एनआईए की जांच में कई बड़े खुलासे होंगे.
नागालैंड
वैसे नागालैंड की समस्या काफी पुरानी है. भारत की आज़ादी के समय तमाम राज्यों की सीमा निर्धारण में चूक हुई. यही चूक पूर्वोत्तर राज्यों की नींव रखे जाते समय भी हुई. राज्य के लोगों की बड़ी ज़मीनें बर्मा के हिस्से चली गईं. नागाओं के कुछ इलाकों को नेफा (नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी) में शामिल किया गया. इसके बाद इनमें समय-समय पर बदलाव आते रहे. मगर दो बड़े बदलाव 1960 और 1972 में आए.1960 में नागालैंड एक अलग राज्य बना और संविधान के अनुच्छेद 171-A में उसे कुछ विशेष अधिकार दिए गए. सभी धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों के नागा कानूनों में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा.
नागा अपनी पंचायतों में सिविल और आपराधिक मुकदमों से जुड़े फैसले दे सकते हैं.
ज़मीन की खरीद फरोख्त से जुड़े अधिकार नागाओं के पास रहेंगे.

नागालैंड













