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'टॉम क्रूज रेप करे तो लगेगा मानो कोई सपना पूरा हो गया'

इस बड़े पत्रकार को लगता है कि बच्चों के रेप से कभी-कभी बेहतरीन कला भी निकलकर आती है.

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7 साल की जैनब के साथ उसके ही एक रिश्तेदार ने पहले बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी. इस केस पर पाकिस्तान के लोगों में बहुत गुस्सा है. फैश अहमद के ट्वीट्स इसी केस से जुड़े हुए हैं.
पाकिस्तान में एक आदमी रहता है. पेशे से है पत्रकार. नाम, फैश अहमद. काफी जाने-पहचाने जर्नलिस्ट हैं. न्यूजवीक पाकिस्तान के संपादक हैं. ये खबर इनके ही बारे में है. इससे पहले कि आप कुछ और पढ़ें, इनका एक ट्वीट पढ़ लीजिए.
ओबामा रेप करे, तो वो रेप है. अगर टॉम क्रूज रेप करता है, तो ऐसा होगा कि मानो सबका सपना सच हो गया. इंसान-इंसान की बात है. 
फिर एक और ट्वीट किया. इन्होंने इस बार लिखा:
बच्चों का यौन शोषण हमेशा होता रहेगा. आप इसे कभी खत्म नहीं कर सकते हैं. कभी-कभी इससे बेहतरीन कला भी निकलकर आती है.
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7 साल की बच्ची का रेप करके उसकी हत्या कर दी गई थी आपको गुस्सा आया? लगा कि क्या बेहूदगी है? कि कोई भला इंसान ऐसा कैसे लिख सकता है? पाकिस्तान में भी इस ट्वीट पर बवाल मचा हुआ है. बाकी कई मुल्कों के लोग भी फैश अहमद को लानत दे रहे हैं. अभी कुछ दिनों पहले पाकिस्तान में एक सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार हुआ. रेप करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. बच्ची के साथ हुई इस नृशंसता ने पूरे पाकिस्तान को मायूस कर दिया. पुलिस की जांच में पता चला कि जैनब के साथ ये वहशीपना करने वाला शख्स उसका पड़ोसी था. उसका रिश्तेदार था. उसकी गिरफ्तारी के बाद फैश ने ट्वीट किया:
अच्छी बात ये है कि कम से कम वो स्ट्रेट (ऐसा पुरुष जिसकी दिलचस्पी महिलाओं के साथ सेक्स करने में हो) था.
फैश ने अपनी सफाई में कहा है कि वो जैनब के साथ हुए अपराध से नाराज थे और इसी नाराजगी में उन्होंने ये सब लिखा.
फैश ने अपनी सफाई में कहा है कि वो जैनब के साथ हुए अपराध से नाराज थे और इसी नाराजगी में उन्होंने ये सब लिखा.

एक बच्ची के रेप और मर्डर पर किसको मजाक सूझ सकता है? जिस इंसान को एक बच्ची के बलात्कार पर भी मजाक सूझे, वो धरती पर बोझ से कम कुछ भी नहीं. पहले लोगों को लगा कि फैश का ट्विटर अकाउंट किसी ने हैक कर लिया है. लेकिन फिर मालूम चला कि फैश ने पूरे होशोहवास में ये सब लिखा है. बल्कि जब लोग उन्हें लानत देने लगे, तो फैश ने अपना बचाव भी किया.
ये कितनी बेहूदा बात लिखी है.
ये कितनी बेहूदा बात लिखी है.

इतनी सी अक्ल नहीं, क्या खाक पत्रकार हैं? कुछ लोग फैश का बचाव कर रहे हैं. उनका कहना है कि बात भले किसी भी तरह से कही गई हो, लेकिन फैश का इरादा गलत नहीं था. वो बस ये चाहते थे कि लोगों का गुस्सा बस जैनब केस तक न सिमटा रहे. चूंकि बच्चों के साथ होने वाली बदसलूकी और उनका यौन शोषण नई बात नहीं है, तो समाज इसे खत्म करने की पहल करे. ये बचाव बहुत खोखला है. आप किस लिए बोल रहे हैं से ज्यादा जरूरी ये है कि आप क्या बोल रहे हैं. एक सात साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार पर आप मजाक नहीं कर सकते. भले आप उसे 'डार्क ह्युमर' का ही नाम क्यों न दे दें. आप बलात्कार पर, बच्चों के यौन शोषण पर अपनी फूहड़ता नहीं दिखा सकते. इतनी सी अक्ल नहीं है तो क्या खाक पत्रकार हैं आप!
लाहौर में एक लिटरेचर फेस्टिवल होने वाला था. इसके सदस्यों में फैश भी शामिल थे. उनके बेहूदे ट्वीट्स के बाद लोग उनसे नाराज हैं. इस नाराजगी की वजह से फैश अहदम को लाहौर लिटरेचर फेस्टिवल के बोर्ड से इस्तीफा देना पड़ा. न्यूजवीक मैगजीन भी बौखला गई है. वो पाकिस्तान के अपने इस एडिशन से अपना नाम वापस लेने की सोच रही है. इतना सब होने के बाद फैश को अपने कहे-किए पर अफसोस हुआ है. माफी मांगी है उन्होंने. वैसे उन्होंने जो किया है, उसकी क्या माफी होगी. जो कह दिया गया, उसे वापस तो नहीं लिया जा सकता है.


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