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देश के पहले मोबाइल फोन की कहानी सुनाने का वादा है इस फिल्म का

के के मेनन अौर इमरजेंसी की कहानी डेडली कॉम्बिनेशन है, याद कीजिए 'हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी'. नई फिल्म का वादा इसीलिए आकर्षित करता है

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फोटो - thelallantop

"आदमी के विकास के चरण तीन − बंदर, आदमी अौर मशीन"

पैसों के अवैध लेन-देन, फोन टैपिंग, अटैचियों की विदेश से देश की अोर की गई यात्राएं, रिवॉल्वर की गोली से होते हिसाब किताब. अौर यह सब इमरजेंसी के दौर की कहानी में. नई थ्रिलर फिल्म 'सन 75 पचत्तर' का ट्रेलर इन सबका वादा तो कर ही रहा है, साथ ही एक अौर दिलचस्प कहानी सुनाने का वादा है इसमें. कहानी हिन्दुस्तान के पहले मोबाइल फोन की. फिल्म को ख़ास बना रहे हैं के के मेनन, जो फिल्म में नागपाल की भूमिका में हैं. आउटसाइडर, जो सिस्टम को चैंलेंज कर रहा है.

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फिल्म तकनीक के माध्यम से बदलती दुनिया का पहला चेहरा दिखाने का वादा कर रही है. वो कल्पना, जब सारे लोग फोन से एक-दूसरे से जुड़ जायेंगे अौर सत्ता इससे हिल जाएगी. इसके अलावा फिल्म में राजनैतिक संदर्भ बहुत मुखर हैं. किसी बॉलीवुड फिल्म के लिए यह ख़ास है. फिल्म में जहां इंदिरा गांधी की तस्वीर दिखाई देती है. सबसे ऊपर की गद्दी से तमाम सूत्र संचालित हो रहे हैं, ऐसा इशारा है. फिल्म में दिग्गज अभिनेता टॉम अॉल्टर हैं, अौर 'शैतान' वाली कीर्ति कुलहरि अौर प्रवेश राणा भी.

के के मेनन कमाल अभिनेता हैं, यह तो आम राय है. अौर पिछली बार जब के के मेनन सिनेमा के परदे पर साल 1975 में गए थे, फिल्म मिली थी 'हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी'. सुधीर मिश्रा की बनाई यह इमरजेंसी अौर नक्सल आन्दोलन की कहानी कितने ही फिल्मों को चाहनेवालों की 'बेस्ट' वाली लिस्ट में शामिल है. 'सन 75' का ट्रेलर भी अपने थ्रिल में तो वही नॉस्टेल्जिया जगाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन लिफ़ाफ़ा देखकर मजमून का अन्दाज़ा लगाना कई बार घातक होता है.

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फिल्म के निर्देशक नवनीत बहल हैं. अौर फिल्म 1 जुलाई को रिलीज़ हो रही है.

https://www.youtube.com/watch?v=sxLqagF7uYk

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