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नेपाल में जिस GEN-Z ने बनाई सरकार उसने हटाया कुर्सी से, प्रोटेस्ट के बाद गृहमंत्री का इस्तीफा

Nepal Protest: बालेन शाह के सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद नेपाल का युवा एक बार फिर से सड़कों पर है. तख्तियां लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहा है. स्कूली छात्र प्रोटेस्ट कर रहे हैं. उन्होंने सरकार से असंतोष की तीन बड़ी वजहें बताई हैं.

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नेपाल में बालेन सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)

नेपाल ने हाल ही में राजनीतिक बदलाव की एक नई कहानी लिखी है. देश की युवा शक्ति (GEN-Z) ने पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंका और बालेन शाह को कमान सौंपी. लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद भारत के पड़ोसी देश का युवा एक बार फिर से सड़कों पर है. तख्तियां लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहा है. स्कूली छात्र प्रोटेस्ट कर रहे हैं. सुरक्षाकर्मियों से भिड़ रहे हैं. एक बार फिर देश की राजनीति में हलचल दिख रही है. गृहमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है. सवाल है कि युवाओं का मौजूदा आंदोलन नेपाल की पॉलिटिक्स को फिर से हिला सकता है? ये समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा. 

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27 मार्च, 2026 को बालेन शाह ने नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. बालेन एक एंटी-इस्टैब्लिशमेंट नेता थे जो भ्रष्टाचार के खिलाफ, व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल करने वाले और युवाओं की आवाज बनकर उभरे. उनकी जीत खुद एक आंदोलन का परिणाम थी. जिसे जेन-जी प्रोटेस्ट कहा गया. लोगों को लगा था कि अब सिस्टम बदलेगा. लेकिन उम्मीदें अब सवालों में बदल रही हैं. नई सरकार बने अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है. उससे पहले बालेन सरकार के खिलाफ सड़क से सिंहदरबार तक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. 

नेपाल प्रोटेस्ट की वजह क्या है? 

पहली- स्टूडेंट यूनियन पर रोक. यानी सरकार का छात्र संगठनों पर रोक लगाने का फैसला. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक छात्र नेताओं ने सरकार पर संवाद करने के बजाय दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है, जिससे युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है. देशभर में हजारों छात्र विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं, जिनमें से कई प्रदर्शनों की अगुवाई स्कूल और कॉलेज के ग्रुप्स ने की.

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दूसरी- भारत से आने वाले सामान पर टैक्स. ये प्वाइंट हाल के विरोध प्रदर्शनों का सबसे संवेदनशील और व्यावहारिक कारणों में से एक है. क्योंकि इससे नेपाल और भारत के रोटी-बेटी वाले रिश्ते पर असर पड़ रहा है. 

भारत और नेपाल के बीच ओपन बॉर्डर है. इसका मतलब- दोनों देशों के लोग बिना वीज़ा आ-जा सकते हैं. सीमावर्ती इलाकों में रोजमर्रा का व्यापार बहुत आम है, लोग अक्सर सस्ती चीजें भारत के बाजारों से खरीदते हैं. जैसे- राशन, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां वगैरह. नेपाल के नागरिक बिना टैक्स के सामान खरीदकर ले जाते हैं. अब नेपाल की बालेन सरकार ने इस व्यवस्था में बड़ा चेंज कर दिया है. जिसके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति भारत से 100 रुपये से ज्यादा का सामान लाता है तो उस पर ‘भंसार’ यानी कस्टम ड्यूटी देनी होगी.

सरकार का क्या तर्क है? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल सरकार ने टैक्स इसके पीछे तर्क दिया है कि नेपाल के दुकानदारों की शिकायत कर रहे थे कि भारत से सस्ता सामान आने की वजह से उनका व्यापार घट रहा है. नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक भारत पर निर्भर है. ऐसे में अचानक टैक्स बढ़ाना लोगों के लिए झटका है.

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नेपाल के दुकानदारों ने क्या बताया?

आज तक से जुड़े अमितेश त्रिपाठी ने ठूठीबारी बॉर्डर पर मौजूद कुछ भारतीय दुकानदारों से बात की. जिनका कहना है कि अगर नेपाल सरकार अपना फैसला नहीं बदलती है तो उनके रोजगार पर इसका सीधा असर पड़ेगा. सुनिए वहां के दुकानदारों ने क्या कहा? 

अब बात तीसरी वजह की करते हैं. सुदन गुरंग नेपाल के गृहमंत्री हैं. उन पर आय से ज्यादा संपत्ति और शेयर बाजार में बिचौलियों के साथ मिलकर संदिग्ध कारोबार करने का आरोप है. आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद दीपक भट्ट के साथ आर्थिक लेनदेन किया और कई कंपनियों में 50 लाख रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे. इन आरोपों के बाद से ही नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरंग के इस्तीफे की मांग तेज हो गई थी.

गृहमंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा

नेपाल के गृहमंत्री ने इन आरोपों को सीरियसली लिया और अपने पद से इस्तीफा दे दिया. एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने बताया, 

‘मैंने नेपाल के गृहमंत्री के तौर पर अपनी भूमिका पूरी निष्ठा और सच्चाई से निभाई है. लेकिन मैं लोगों के सवालों और आलोचनाओं का भी सम्मान करता हूं. मेरे लिए एथिक्स हमेशा किसी पद से ऊपर है.’

ये भी पढ़ें: सात पूर्व प्रधानमंत्रियों, 100 मंत्रियों की संपत्ति की जांच शुरू, नेपाल के नए पीएम का बड़ा आदेश

बालेन सरकार ने सत्ता में आते ही सात पूर्व प्रधानमंत्रियों की संपत्ति की जांच के आदेश दिए थे. इसके लिए एक समिति के गठन का प्रस्ताव रखा गया था, जिससे भ्रष्टाचार ख़त्म हो सके. हालांकि, नेपाल में लगातार बदलते घटनाक्रम और जनता का आक्रोश कुछ और ही कहानी बता रहे हैं. बालेन शाह जिनकी छवि सिस्टम बदलने वाले नेता की है उनके सामने अब सिस्टम संभालने का चैलेंज मुंह बाए खड़ा है.

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