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जापान के बाद अब नेपाल का झटका, 'फलों के राजा' पर लगी रोक से भारतीय निर्यातकों की बढ़ी टेंशन

Nepal Ban on Indian Mango: नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. जापान के बाद ऐसा करने वाला वो दूसरा देश बन गया है. नेपाल सरकार का कहना है कि भारतीय आमों में कीटनाशकों (Pesticides) की मात्रा, तय नियमों से कहीं ज्यादा है.

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नेपाल के एक फैसले से बदला आम का गणित

जापान के बाद हमारे पड़ोसी नेपाल को भी भारतीय आम कुछ खास पसंद नहीं आ रहे. खबर आ रही है कि नेपाल ने फरमान जारी कर दिया है कि 'फलों का राजा' आम उनके देश में कम से कम भारत से तो नहीं आएगा. साफ शब्दों में कहें तो भारतीय आमों का आयात (Import) रोक दिया है.  

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ऐसे में लाख टके का सवाल ये है कि इस फैसले के पीछे वजह क्या है? आपकी जेब पर इस बैन का क्या असर पड़ेगा? और भारत के आम व्यापारी इस डबल झटके से कैसे निपटेंगे.

नेपाल का फैसला, व्यापारियों में क्यों मचा हड़कंप?

नेपाल सरकार का साफ कहना है कि भारत से आने वाले आमों के कंसाइनमेंट में कीटनाशकों (Pesticides) की मात्रा तय सुरक्षा मानकों से कहीं ज्यादा पाई गई है. इसके साथ ही बॉर्डर पर पर्याप्त टेस्टिंग और क्वारंटाइन (Quarantine) सुविधाएं न होने का हवाला देते हुए नेपाल ने ये कड़ा कदम उठाया है.

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इस फैसले के बाद भारत-नेपाल सीमा पर फलों के व्यापारियों में हड़कंप मच गया है. विशेषकर पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के वो कारोबारी जो हर साल भारी मात्रा में नेपाल को आम एक्सपोर्ट करते थे, उनके ऑर्डर अचानक अटक गए हैं. नेपाल ने अब यूरोपीय संघ (EU) के स्तर के कड़े फाइटोसैनिटरी मानक और हॉट वॉटर ट्रीटमेंट (HWT) की शर्त रख दी है. इसके कारण व्यापारियों के लिए एक्सपोर्ट करना अब काफी महंगा और पेचीदा हो गया है. जापान द्वारा हाल ही में भारतीय आमों पर लगाई गई रोक के बाद भारत के कृषि निर्यात के लिए ये दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है.

एक्सपोर्ट और कीमतों का गणित: आपके ऊपर क्या होगा असर?

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस फैसले का जमीनी असर क्या होगा? एक्सपर्ट्स की मानें तो नेपाल के इस कदम के दो अलग-अलग पहलू हैं. पहला नेपाल के बाजार पर और दूसरा खुद भारत के घरेलू बाजार पर.

नेपाल में मचेगा हाहाकार: नेपाल में स्थानीय आम (जैसे सिराहा और सप्तरी जिलों का माल) बाजार में तो आ गया है, लेकिन वहां आम का सीजन सिर्फ मई के मध्य से जुलाई के मध्य तक यानी लगभग दो महीने ही चलता है. नेपाल का अपना उत्पादन देश की पूरी मांग को संभालने के लिए काफी नहीं है. ऐसे में वहां आम की भारी किल्लत हो सकती है और कीमतें आसमान छू सकती हैं. इससे पहले जब भारत से केला रुकने के बाद वहां केले के दाम दोगुने हो गए थे, ठीक वैसा ही नजारा अब आम को लेकर दिख सकता है.

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भारत के घरेलू बाजार पर असर: भारत के नजरिए से देखें तो नेपाल को होने वाला एक्सपोर्ट रुकने से वो सारा माल अब भारत के घरेलू बाजारों में ही खपेगा. शुरुआत में इससे भारतीय बाजारों में आम की सप्लाई अचानक बढ़ सकती है, जिससे लोकल लेवल पर आम की कीमतें थोड़ी कम हो सकती हैं या स्थिर रह सकती हैं. यानी आम आदमी के लिए तो आम थोड़े सस्ते हो सकते हैं, लेकिन एक्सपोर्टर्स और किसानों को होने वाले नुकसान की वजह से मार्केट का पूरा कमर्शियल गणित गड़बड़ा सकता है.

जानकारों का मानना है कि एकमुश्त बैन लगाने के बजाय अगर दोनों देश मिलकर बॉर्डर पर टेस्टिंग सिस्टम को मजबूत करें, तो इस समस्या का बेहतर हल निकाला जा सकता है ताकि किसानों का माल खराब न हो.

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