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जापान ने भारतीय आमों पर लगा दी रोक, इंडिया आकर पकड़ ली बड़ी खामी

जापान ने कहा है कि 25 मार्च, 2026 या उसके बाद भारत से जारी किए गए इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट वाले आमों को स्वीकार नहीं किया जाएगा. जापान में अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे मशहूर भारतीय आमों की अच्छी डिमांड रहती है.

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29 मई 2026 (अपडेटेड: 29 मई 2026, 03:19 PM IST)
Japan pauses Indian mango exports impacting trade worth $1.54 million.
जापान में भारतीय आमों पर फिर लगी रोक (फोटो: आज तक)
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जापान ने भारत से आने वाले आमों पर रोक लगा दी है. वजह बताई है कि भारत में आमों को कीड़ों और संक्रमण से बचाने से जुड़े तरीकों में खामियां मिली हैं. जापान के इस फैसले का असर अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे मशहूर भारतीय आमों पर पड़ा है, जिनकी जापान में अच्छी डिमांड रहती है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब आमों का एक्सपोर्ट सबसे ज्यादा होता है.

जापान की योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने अपने एक नोटिस में कहा कि 25 मार्च, 2026 या उसके बाद भारत से जारी किए गए इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट वाले आमों को स्वीकार नहीं किया जाएगा. जापान ने साफ कहा है कि जब तक भारतीय सेंटर अपनी प्रक्रिया और गुणवत्ता में सुधार नहीं करते, तब तक यह रोक जारी रहेगी.

जापान ने खामियां कैसे पकड़ीं?

जापान का कहना है कि भारत के कुछ सेंटरों में आमों को कीड़ों और संक्रमण से बचाने के नियम सही तरीके से फॉलो नहीं किए गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च 2026 में जापानी अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वेपर हीट ट्रीटमेंट यानी VHT सेंटर की जांच की. VHT एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें आमों को गर्म और नमी वाली हवा में रखा जाता है, ताकि उनमें मौजूद कीड़े खत्म हो जाएं और आम एक्सपोर्ट के लिए सुरक्षित रहें. लेकिन इस बार निरीक्षण के दौरान सफाई और कीड़े खत्म करने की प्रक्रिया में कुछ कमियां मिलीं, जिसके बाद जापान ने भारत से आम का आयात रोकने का फैसला किया.

प्रीमियम भारतीय आमों पर खतरा!

इस फैसले से सबसे ज्यादा असर उन भारतीय आमों पर पड़ा है, जिनकी जापान में अच्छी मांग रहती है. इनमें अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली शामिल हैं. साल 2025-26 में गुजरात का केसर आम जापान भेजे जाने वाले भारतीय आमों में सबसे आगे रहा. मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताजे और प्रोसेस्ड आमों का निर्यात करीब 1.54 मिलियन डॉलर (करीब 14.73 करोड़ रुपये) का रहा, जिसमें अकेले केसर आम की हिस्सेदारी करीब 0.2 मिलियन डॉलर (लगभग 2 करोड़ रुपये) थी.

हालांकि, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के आंकड़ों के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में दुनियाभर में करीब 29,938 मीट्रिक टन ताज़ा आमों का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 56.5 मिलियन डॉलर (करीब 537 करोड़ रुपये) रही. भारत के सबसे बड़े बाजार UAE, अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत और कतर रहे, जबकि जापान टॉप खरीदार देशों की सूची में शामिल नहीं था. यानी जापान बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन वहां भारतीय आमों की खास पहचान और प्रीमियम वैल्यू मानी जाती है.

पहले भी 20 साल तक लगी रही थी रोक

यह पहली बार नहीं है जब जापान ने भारतीय आमों पर रोक लगाई हो. इससे पहले 1986 में भी जापान ने भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था. उस समय जापान को डर था कि आमों के जरिए मक्खी जैसे कीट वहां पहुंच सकते हैं. यह प्रतिबंध करीब 20 साल तक चला. बाद में भारत ने कई वैज्ञानिक जांच, सर्वे और सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी कीं, जिसके बाद 2006 में जापान ने यह रोक हटा दी. तब जापान ने अल्फांसो, केसर, लंगड़ा, चौसा और दूसरी भारतीय किस्मों को आयात की अनुमति दी थी.

(ये खबर हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे कुमार ऋषभ ने लिखी है)

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