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'इंद्रधनुष' बोलकर 'नेहरू मेमोरियल म्यूजियम' का नाम बदला, नेहरू से पहले यहां कौन रहता था?

अब इस संग्रहालय को 'प्रधानमंत्री म्यूजियम और सोसाइटी' कहा जाएगा. जानें कभी लुटियंस की शाही दिल्ली का हिस्सा रहे तीन मूर्ति भवन की पूरी कहानी.

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नेहरु मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी का नाम बदला. (फोटो क्रेडिट-PTI)

नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी (NMML) को अब ‘प्रधानमंत्री म्यूजियम और सोसाइटी’ के नाम से जाना जाएगा. गुरुवार, 15 जून को हुई NMML सोसाइटी की एक मीटिंग में ये फैसला लिया गया. इसकी अध्यक्षता रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने की. वे इस सोसाइटी के उपाध्यक्ष हैं और अध्यक्ष हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. गृह मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान, अनुराग ठाकुर जैसे केंद्रीय मंत्री इसके 29 सदस्यों में शामिल हैं.

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NMML भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का सरकारी घर था. ये दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में स्थित है. केंद्र के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने 2022 में यहां प्रधानमंत्री म्यूजियम का उद्घाटन किया था. अब इससे पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू का नाम हटा दिया गया है.

NMML की बैठक में राजनाथ सिंह ने इसका नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. उन्होंने कहा कि अब यहां सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान का प्रदर्शन किया जा रहा है. इसके साथ ही यहां उनके कार्यकाल में आई चुनौतियों भी प्रदर्शित हैं. राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री को एक संस्थान के रूप में बताया. और इस बात पर जोर दिया कि सभी प्रधानमंत्रियों को बराबर दिखाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा,

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“इंद्रधनुष को सुंदर बनाने के लिए उसके सभी रंगों को बराबर दिखाया जाना जरूरी है.”

लुटियंस की शाही राजधानी का हिस्सा था तीन मूर्ति भवन

तीन मूर्ति भवन 1929-30 में बनाया गया था. इसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसल ने डिजाइन किया. आजादी से पहले तीन मूर्ति भवन एडविन लुटियंस की शाही राजधानी का हिस्सा हुआ करता था. तब ये भारत के कमांडर-इन-चीफ का आधिकारिक निवास था.

1947 में भारत आजाद हुआ. इसके एक साल बाद अगस्त 1948 में इसकी पहचान बदली. ब्रिटिश भारत के आखिरी कमांडर-इन-चीफ क्लाउड ऑचिनलेक देश छोड़ के जा चुके थे. अब ये भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का आधिकारिक निवास बना.

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करीब 16 साल तीन मूर्ति भवन में रहे नेहरू

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस घर में करीब 16 साल रहे. 27 मई 1964 को उनके निधन के बाद भारत सरकार ने यहां संग्रहालय बनाने का फैसला लिया. सरकार ने इस घर को भारत के पहले प्रधानमंत्री को समर्पित करने की घोषणा की. उन्हीं के नाम पर यहां एक संग्रहालय और पुस्तकालय बनाया गया.

14 नवंबर 1964 को नेहरू की 75वीं जयंती पर यहां नेहरू मेमोरियल म्यूजियम का उद्घाटन हुआ. तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने तीन मूर्ति भवन देश को समर्पित किया. इसके 2 साल बाद 1 अप्रैल 1966 को NMML सोसाइटी बनाई गई. इसे संस्थान को सही तरीके से चलाने के लिए बनाया गया था.

2016 में हुई सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित संग्रहालय बनाने की बात

2016 में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बदलने की बात की. उन्होंने कहा कि यहां सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक संग्रहालय बनाया जाना चाहिए. ये 6 सालों में बनकर तैयार हुआ. और इसका उद्घाटन 21 अप्रैल 2022 को हुआ.

कांग्रेस शुरू से जताती रही है विरोध

2016 में NMML के बदलने की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस इसका विरोध करती रही है. पार्टी ने केंद्र सरकार पर भारत के इतिहास को बदलने का आरोप लगाए हैं. अब इसके नाम बदलने पर एक बार फिर कांग्रेस ने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्विटर पर लिखा,

"संकीर्णता और प्रतिशोध, आपका नाम मोदी है. 59 सालों तक नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी दुनिया भर में बौद्धिकता का लैंडमार्क रही है. इसे किताबों और अभिलेखों (आर्काइव्स) का खजाना माना जाता रहा है. अब इसे प्रधानमंत्री म्यूजियम और सोसाइटी कहा जाएगा."

 

जयराम रमेश ने आगे लिखा कि पीएम मोदी भारतीय राष्ट्र-राज्य (इंडियन नेशन स्टेट- एक ऐसी जगह जहां के लोगों का इतिहास एक-सा हो) के आर्किटेक्ट के नाम और परंपरा को बिगाड़ने, नीचा दिखाने और बर्बाद करने के लिए क्या नहीं करेंगे. उन्होंने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए लिखा, "एक छोटा इंसान जो अपनी असुरक्षा के बोझ तले, खुद को विश्वगुरू बताता है." 

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