पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और पंजाब के एडवोकेट जनरल एपीएस देओल में ठन गई है. एपीएस देओल ने शनिवार, 6 नवंबर को कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू पर राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए सरकार के कामकाज में बाधा डालने और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया था. अब सिद्धू ने पंजाब के एडवोकेट जनरल को जवाब दिया है. उन्होंने कहा है कि न्याय अंधा हो सकता है, लेकिन पंजाब के लोग नहीं. कांग्रेस पार्टी बेअदबी के मामलों में न्याय दिलाने के वादे के साथ सत्ता में आई थी. सिद्धू ने आरोप लगया है कि एपीएस देओल मुख्य साजिशकर्ताओं की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुए और हमारी सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए.
बेअदबी मामले में नवजोत सिद्धू ने अपनी ही सरकार के AG पर गंभीर आरोप लगा दिए!
नवजोत सिंह सिद्धू और एपीएस देओल में ठन गई है.

सिद्धू ने क्या लिखा है?
नवजोत सिंह सिद्धू ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं. उन्होंने लिखा है,
आपने जांच CBI को ट्रांसफर करने की अपील की थी. क्योंकि आप बेअदबी के मामलों में उनके झूठे निहितार्थ से डरते थे. आज आप उस राजनीतिक दल की सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो सत्ता में है, जिसके खिलाफ आप पहले खड़े थे. और मुझ पर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि मैं बेअदबी के मामलों में न्याय के लिए लड़ रहा हूं और आप आरोपी व्यक्तियों की जमानत सुरक्षित करने में लगे थे. क्या मैं जान सकता हूं कि जब आप मुख्य साजिशकर्ताओं के लिए पेश हुए और उनके लिए जमानत हासिल की, तो आप किस हित के लिए काम कर रहे थे और अब आप किसके हित में काम कर रहे हैं?
उन्होंने आगे लिखा,
क्या आप उन लोगों के इशारे पर काम कर रहे हैं जिन्होंने आपको इस संवैधानिक पद पर नियुक्त किया है? क्या आप अपने राजनीतिक लाभ को पूरा कर रहे हैं? क्या आपने सरकार को सलाह दी थी कि बेअदबी के मामलों में आपके द्वारा प्राप्त जमानत आदेश या किसी अन्य आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाए?
सिद्धू ने आगे लिखा है,
आप आरोपी के लिए पेश हुए, अब राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और बहुत जल्द आप एक न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति की मांग करेंगे, ताकि आप इस मामले का फैसला कर सकें. सर्वोच्च कानून अधिकारी होने के नाते आपका ध्यान राजनीति और राजनीतिक लाभ पर है. राजनेताओं को राजनीति करने दें. आप अपने व्यक्तिगत विवेक, सत्यनिष्ठा और पेशेवर नैतिकता पर ध्यान केंद्रित करें, जिसकी आपको जरूरत है.
सिद्धू ने लिखा है,
हाईकोर्ट में 05.10.2021 को ड्रग्स मामले की सुनवाई में यह पूछे जाने पर कि हाईकोर्ट में दायर एसटीएफ रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के लिए सरकार को क्या रोक रहा है? आपने उत्तर दिया कि "न्यायालय की अनुमति के बिना मामले में आगे बढ़ना नैतिक रूप से गलत होगा. क्या मैं जान सकता हूं कि एसटीएफ रिपोर्ट के आधार पर आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ एक्शन लेने में अनैतिक क्या है? जो पंजाब में नशीले पदार्थों-आतंकवाद के लिए जिम्मेदार हैं और जिन्होंने भारत के सबसे समृद्ध राज्य की पुरी पीढ़ी को नशीली दवाओं से खतरे में डाल दिया है.
सिद्धू ने पूछा है कि क्या माननीय उच्च न्यायालय ने आपको रोका? माननीय उच्च न्यायालय ने स्वयं एसटीएफ रिपोर्ट की एक प्रति हमारी सरकार को विचार के लिए दी और आप अपनी अज्ञात नैतिकता की आड़ में सरकार की निष्क्रियता को बचा रहे हैं.
क्या है मामला?
पंजाब के एडवोकेट जनरल एपीएस देओल ने शनिवार, 6 नवंबर को कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू पर राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए सरकार के कामकाज में बाधा डालने और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया था. देओल की यह टिप्पणी सिद्धू द्वारा पंजाब कांग्रेस प्रमुख पद से अपना इस्तीफा वापस लेने के एक दिन बाद आई थी. इस्तीफा वापस लेने के बाद सिद्धू ने ऐलान किया था कि वह तब तक पदभार ग्रहण नहीं करेंगे जब तक देओल को एडवोकेट जनरल के पद से हटाया नही जाता और नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए पैनल का गठन नहीं किया जाता.
इसके बाद देओल ने बयान जारी कर कहा थाकि सिद्धू की बयानबाजी नशे और और बेअदबी के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने के प्रदेश सरकार के गंभीर प्रयासों को पटरी से उतारने का प्रयास है. उन्होंने आरोप लगाया था,
नवजोत सिंह सिद्धू सरकार और महाधिवक्ता के कार्यालय के कामकाज में बाधा डाल रहे हैं और वह अपने राजनीतिक सहयोगियों पर राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए गलत सूचना फैला रहे हैं. पंजाब में आसन्न विधानसभा के मद्देनजर निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचाने और राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए पंजाब के महाधिवक्ता के संवैधानिक कार्यालय का राजनीतिकरण करने के पुख्ता प्रयास किए जा रहे है.
सिद्धू देओल और पुलिस महानिदेशक इकबालप्रीत सिंह सहोता की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं. देओल और सहोता दोनों को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की पसंद का माना जाता है. पिछले महीने सिद्धू ने कहा था कि अगर महाधिवक्ता और पुलिस महानिदेशक को नहीं हटाया गया तो कांग्रेस का कोई चेहरा नहीं होगा.
देओल ने 2015 में बेअदबी की घटनाओं और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस गोलीबारी से संबंधित मामलों में पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी की पैरवी की थी जबकि सहोता को पिछली शिअद-भाजपा सरकार ने बेअदबी की घटनाओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल का प्रमुख बनाया था. देओल ने अतुल नंदा का स्थान लिया था, जिन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद सितंबर में यह पद छोड़ दिया था. इस हफ्ते की शुरुआत में ऐसी खबरें आई थीं कि देओल ने एजी पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी. हालांकि वरिष्ठ अधिवक्ता ने इन खबरों का खंडन किया था.









