1.
नया साल. दिल्ली. पार्टी. इन तीनों शब्दों का मेल सुनकर दिमाग में शराब, नाच और जश्न में झूमते लड़के-लड़कियों की तस्वीर घूम जाती है. लेकिन दीपक टंडन के मां-बाप के लिए ये हमेशा उनके बेटे की मौत की याद लेकर आएगी. दीपक 30 दिसंबर को पंजाब से दिल्ली आया. हौज़ खास के एक कैफ़े में न्यू इयर पार्टी करने गया. कहने वाले कहते हैं कि उसने पंजाबी गाना बजाने को कहा. जिसके जवाब में उसे झिड़का गया. लड़ाई शुरू हुई. बाउंसर ने उसके सर पे बियर की बोतल मार दी. दीपक को अस्पताल लेकर भागा गया. वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस कहती है कि दीपक को किसी और ने नहीं मारा, लड़ाई के दौरान खुद उसने अपने सर पर बोतल मारी थी. हम गर्म खून वाले युवा कब उनकी फ़िक्र करना सीखेंगे, हमारी मौत के साथ जो अंदर से मर जाते हैं?
2.
मैं नॉर्थ दिल्ली में रहती थी तो पड़ोसियों के बीच अक्सर गाली-गलौज होती थी पार्किंग को लेकर. जगह कम थी, घर और उन पर तनी मंजिलें ज्यादा. कभी-कभी डर लगता था कि कहीं अपनी-अपनी गाड़ियां लगाने के चक्कर में दो परिवार मार-पीट न कर लें. लेकिन इस खबर को पढ़कर लगा मार-पीट बहुत छोटी बात है. गाजियाबाद के विजय नगर में बलबीर और ममता अपने दो बेटों के साथ रहते थे. पड़ोसी मनोज से बीते कुछ दिनों से कहा-सुनी चल रही थी. बलबीर ने अपने घर की तरफ दीवार पर एक रजाई धूप में सूखने के लिए डाली. रजाई का कुछ हिस्सा मनोज की दीवार की तरफ चला गया. मनोज नाराज हुआ. दोनों पड़ोसियों में लड़ाई हुई. और मनोज ने अपने कट्टे से दो फायर किए. बलबीर और ममता दोनों अस्पताल के रास्ते में मर गए. पुलिस का कहना है मनोज के पास कट्टे का लाइसेंस नहीं था. होता भी तो क्या वो दो बेटे अनाथ होने से बच जाते.