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मस्जिद के पास गिराई गईं दुकानें, फिर मची जूतों की लूट, नगर निगम वाले भी टूट पड़े

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में नगर पालिका निगम, भिलाई ने इलाके में एक मस्जिद के आसपास किए गए 'अवैध कब्जे' को ढहाया. इस दौरान जूते की एक दुकान ढहने के बाद लोग मलबे से जूता लूटने में लग गए. दावा है कि इसमें नगर पालिका निगम के कर्मचारी भी शामिल हो गए.

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दुकान के मलबे से जूते निकालते लोग (फोटो: आजतक)
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रघुनंदन पंडा

छत्तीसगढ़ के भिलाई में जीई रोड पर बने कई दुकान, हॉल और अन्य निर्माण सोमवार, 9 सितंबर को ढहा दिए गए. ये बुलडोजर एक्शन नगर पालिका निगम, भिलाई की ओर से लिया गया. भिलाई नगर पालिका निगम के मुताबिक यहां मस्जिद के नाम पर कई अवैध कब्जे किए गए थे. अधिकारियों ने कहा है कि जो भी गैर धार्मिक कब्जा है, सब तोड़ा जाएगा. वहीं इस बुलडोजर एक्शन के दौरान जूते लूटने की तस्वीरें भी सामने आईं. 

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आजतक के रघुनंदन पंडा की रिपोर्ट के मुताबिक अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक जूते की दुकान को ढहाया गया. इस दुकान के ढहते ही यहां जूता लूटने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी. जूतों की इस लूट में कथित तौर पर निगम के कर्मचारी भी शामिल हो गए.

demolished shoe shop bhilai
(फोटो: आजतक)

इस कार्रवाई के लिए नगर पालिका निगम, भिलाई की टीम के साथ ही ADM, SDM, तहसीलदार सहित 100 से ज्यादा जवान और कई थानों की फोर्स सुबह 5 बजे से ही मौजूद थी. कार्रवाई के तहत 22 दुकानें, स्वागत द्वार, वैवाहिक भवन और वहां स्थित मस्जिद की बाउंड्री वॉल तोड़ी गई.

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demolishment of illegal encroachment in bhilai
कई दुकानों और स्वागत द्वार को तोड़ा गया. (फोटो: आजतक)

अधिकारियों के मुताबिक अवैध कब्जा हटाने का नोटिस दिया गया था, इसके बाद भी जब कब्जा नहीं हटाया गया, तो नगर पालिका निगम ने ये कार्रवाई की. वहीं करबला कमिटी ने इस बुलडोजर एक्शन का विरोध किया है और कब्जे को सही बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक ये कब्जा सैलानी दरबार के नाम पर किया गया था.

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नगर पालिका निगम, भिलाई के एडिशनल कमिश्नर अशोक द्विवेदी ने बताया,

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"नगर निगम की 5-6 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण किया गया था. इनको पहले भी नोटिस दिया गया था. गैर धार्मिक इस्तेमाल के लिए बनाई गई दुकानें और स्ट्रक्चर को हटाने का आदेश दिया गया था. धार्मिक इस्तेमाल के लिए बनाए गए स्ट्रक्चर पर नियमानुसार विचार चल रहा है."

उन्होंने बताया कि नगर पालिका निगम की इस जमीन की कीमत कम से कम 400 करोड़ रुपये की है. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1984 में स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी ने रायपुर-भिलाई मार्ग (जीई रोड) के किनारे करबला कमिटी को मस्जिद के लिए 500-800 वर्ग फीट जमीन दी थी. आरोप है कि ढाई एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर वहां दुकानें, मजार, शादीघर और बड़ा गेट बना दिया गया. 

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