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'US अब घातक भंवर में फंसेगा ', ट्रंप की धमकी पर ईरान ने कहा 'जमकर' लड़ेंगे

Islamabad में US-Iran के बीच कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ, तो अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump ने Starit of Hormuz पर Blockade का ऐलान कर दिया. ईरान के नेताओं ने ट्रंप की इस धमकी तीखी प्रतिक्रिया दी है.

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ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (बाएं) और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (दाएं). (Reuters)

अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिन का सीजफायर चल रहा है. हथियार भले ही ना चल रहे हों, लेकिन जुबानी जंग जारी है. 12 अप्रैल को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की बातचीत को फेल करार दिया, तो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी की धमकी दे डाली. इस पर ईरान ने कड़ा पलटवार किया है, और अमेरिका को अंजाम भुगतने की धमकी दी है.

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ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया कि इस्लामाबाद में ईरान, अमेरिका के साथ डील फाइनल ही करने वाला था. उन्होंने आरोप लगाया कि आखिरी समय में अमेरिकी डेलीगेशन ने मनमानी मांगे शुरू कर दीं, जिसकी वजह से बातचीत पटरी से उतर गई. सैयद अब्बास अराघची ने X पर लिखा,

"47 सालों में सबसे हाई लेवल पर हुई गंभीर बातचीत में ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अच्छी नीयत के साथ अमेरिका से बात की. लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद MoU' (इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच फाइनल एग्रीमेंट) से बस कुछ इंच दूर थे, तो हमें (अमेरिका की तरफ से) जरूरत से ज्यादा मांगें, गोलपोस्ट बदलना और ब्लॉकेड का सामना करना पड़ा."

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अराघची ने आगे लिखा,

"कोई सबक नहीं सीखा. अच्छाई से अच्छी नीयत पैदा होती है. दुश्मनी से दुश्मनी पैदा होती है."

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सैयद अब्बास अराघची का पोस्ट. (X @araghchi)

सैयद अब्बास अराघची इस्लामाबाद गए ईरानी डेलीगेशन का हिस्सा थे. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी अमेरिका पर तंज कसा है. उन्होंने X पर लिखा,

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"अगर अमेरिकी सरकार अपनी तानाशाही छोड़ दे और ईरान के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे. मैं नेगोशिएशन करने वाली टीम के सदस्यों, खासकर अपने प्यारे भाई डॉ. मोहम्मद बाकिर कालीबाफ की तारीफ करता हूं, और 'खुदा आपको ताकत दे' ऐसी दुआ करता हूं."

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मसूद पेजेश्कियान का पोस्ट. (X @drpezeshkian)
मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने क्या बताया?

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने भी डॉनल्ड ट्रंप की स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नाकेबंदी की धमकी पर प्रतिक्रिया दी. कालीबाफ ने ही इस्लामाबाद में ईरानी डेलीगेशन का नेतृत्व किया था. पाकिस्तान में 'डील' फेल होने के बाद कालीबाफ तेहरान लौट गए. ईरानी सरकार के न्यूज चैनल प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों से बात करते हुए कालीबाफ ने कहा,

"अगर आप (अमेरिका) युद्ध में जाते हैं, तो हम आपसे लड़ेंगे, और अगर आप लॉजिक के साथ आगे आते हैं, तो हम आपके साथ लॉजिकली पेश आएंगे. हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे. एक बार फिर हमारे इरादे को परखें, ताकि हम (आपको) एक बड़ा सबक सिखा सकें."

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर का भी जवाब आ गया है. IRGC नेवेल कमांड ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर दुश्मन ने गलत कदम उठाया, तो वो होर्मुज में एक घातक भंवर में फंस जाएगा.”

8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया गया. पाकिस्तान ने दोनों देशों को बातचीत के लिए इस्लामाबाद बुलाया. पाकिस्तान ने इस नेगोशिएशन को 'इस्लामाबाद टॉक्स' का नाम दिया. 11 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हुई.

21 घंटे की बातचीत के बाद 12 अप्रैल को अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि 'इस्लामाबाद टॉक्स' फेल हो गई और आरोप लगाया कि ईरान ने अमेरिका की शर्तें मानने से मना कर दिया. वेंस ईरान के साथ कोई एग्रीमेंट किए बिना ही अमेरिका चले गए. अमेरिका ने दावा किया कि ईरान ने अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने का कोई पक्का वादा नहीं किया, जबकि ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी शर्तों को नहीं माना.

जब कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ, तो अमेरिकी प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने अग्रेसिव रुख अपनाया और होर्मुज स्ट्रेट पर ब्लॉकेड का ऐलान किया. उन्होंने धमकी दी कि अमेरिकी सेना ईरान को 'गैर-कानूनी' टोल चुकाकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकेगी.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि वह सोमवार, 13 अप्रैल को शाम 7:30 बजे (भारतीय समय) से ईरानी पोर्ट्स पर ब्लॉकेड लगाना शुरू कर देगा. इससे वेस्ट एशिया में और तनाव भड़क सकता है. X पर एक पोस्ट में CENTCOM ने कहा कि उसकी सेना "प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप की घोषणा के अनुसार, ईरानी पोर्ट्स से आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक पर ब्लॉकेड लगाना शुरू कर देगी."

कमांड ने आगे कहा कि "यह रोक बिना कोई फर्क किए सभी देशों के जहाजों पर लागू की जाएगी जो ईरानी पोर्ट्स और तटीय इलाकों में आते-जाते हैं, जिसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी पोर्ट्स भी शामिल हैं."

अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने साफ किया कि उसकी सेनाएं होर्मुज स्ट्रेट से गैर-ईरानी पोर्ट्स तक आने-जाने वाले जहाजों के नेविगेशन की आजादी में रुकावट नहीं डालेंगी.

वीडियो: ट्रंप ने अब चीन को क्या धमकी दे दी?

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