एक अधिवेशन हुआ. शिवपाल और अमर सिंह को झाड़ दिया गया. बुहार दिया गया. मुलायम को आडवाणी बना दिया गया. अखिलेश ऐसे बोले कि न्यूजरूमों में टिकर लिखने वालों की अंगुलियों के नाखून पिराने लगे.
फिर अंकिल मुलायम सीन में इंटर हुए. बोले जो अधिवेशन हुआ असंवैधानिक था. रामगोपाल यादव को पार्टी से फिर निकाल दिया. छह साल के लिए. इसके पहले भी निकाला था. फिर वापिस शामिल कर लिया. यहां तीन दिन में इतनी बार फैसले बदल चुके हैं, ये छह साल में क्या क्या कर डालेंगे?
लखनऊ के उसी जनेश्वर मिश्र पार्क में 5 जनवरी को पार्टी अधिवेशन बुलाया है, जहां आज सुबह अधिवेशन हुआ था.
शिवपाल यादव फिर से मुलायम सिंह यादव के घर पहुंचे हैं. सुबह भी पहुंचे हैं. समझ नहीं आता ये आदमी राजनीति में अपनी जगह बचा रहा है या अपने घर का ब्रेकफास्ट और लंच.
इस सीन में एक आदमी और है. अमर सिंह. अमर सिंह भी लंदन से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं. चलो उस आदमी का साल भी ऐसे ही घेंच-पेंच में शुरू हुआ. जैसे में हमारा हुआ है. अब वो सोमवार को मुलायम अंकिल से मिलेंगे. https://www.youtube.com/watch?v=AJCmImuMRM8 अमर सिंह ने कहा, 'दर-दर की ठोकरों मुझे इतना बता दो मेरा कसूर क्या है'










