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एक धमाके में 276 लोग मारे गए हैं, आपको मालूम चला?

सोमालिया की राजधानी मोगादिशू में शनिवार को हुए धमाके का असर अब सामने आ रहा है.

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मोगादिशू में ये अल शबाब का अब तक का सबसे बड़ा हमला है
दिल्ली से सटा है नोएडा. यहां से करीब 23-24 किलोमीटर दूर है इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा. IGI एयरपोर्ट से लगभग 4,485 किलोमीटर दूर एक शहर है, मोगादिशू. उत्तर-पूर्व अफ्रीका के एक प्रायद्वीप 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में बसा एक देश है सोमालिया. इसी सोमालिया की राजधानी है मोगादिशू. पश्चिम में इथोपिया. उत्तर-पूर्व में जिबूती. उत्तर में अदन की खाड़ी. दक्षिण-पश्चिम में केन्या. पूरब में है हिंद महासागर. मैंने आपको इस देश का भूगोला बताया. दरअसल मैं आपको बताना चाहती थी कि ये कहां है.
ताकि उसकी तकलीफ आपको 'टैंजिबल' लगे. टैंजिबल मतलब असली, जिसे महसूस किया जा सके. मुझे लगता है कि शायद आपने इस मुल्क का नाम पहले भी कभी सुना होगा. 2001 में आई 'ब्लैक हॉक डाउन' में या दुनिया के सबसे ज़्यादा 'भूखे-नंगे' देशों की लिस्ट में. आज इसके ज़िक्र की वजह अलग है. यहां सैकड़ों लोग बेमौत मारे गए हैं. बहुत बुरी मौत. दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी हमलों में से एक में.
मलबे में से लाशें निकलना अब भी जारी है
मलबे में से लाशें निकलना अब भी जारी है (फोटोःरॉयटर्स)

धमाके ने कुछ लोगों को मोम की तरह पिघला दिया
शनिवार को सोमालिया में एक ब्लास्ट हुआ. बहुत बड़ा धमाका. कम से कम 500 लोग या तो मारे गए या फिर बहुत बुरी तरह से जख्मी हुए. 'कम से कम' पर गौर कीजिएगा. 276 मौतों पर ठप्पा लग चुका है. अभी ये गिनती और ऊपर जाएगी. शहर के बीचो-बीच सैकड़ों मीटर का इलाका है. यहां मलबा पड़ा है. उसके अंदर से लाशें निकलेंगी अभी. कई लोग ऐसे भी हैं, जो मर तो गए हैं, लेकिन उनकी लाश कभी नहीं मिलेगी. कारण ये कि धमाका इतना ज़बरदस्त था कि उनके चीथड़े उड़ गए. चीथड़ों की गिनती कैसे होगी! ब्लास्ट इतना बड़ा था कि कई लोग पिघल गए. मोम की तरह. उनकी लाशें भी कभी बरामद नहीं होंगी. 300 से ज़्यादा लोग जख्मी हुए हैं. बहुत बुरी तरह.
पेट्रोल टैंकर के पास ट्रक भरकर बारूद दाग दिया गया
मोगादिशू शहर के बीच में एक व्यस्त इलाका है. आतंकवादियों ने वहां एक ट्रक खड़ा कर दिया था. उसके अंदर सैकड़ों किलो विस्फोटक पदार्थ था. सेना जो एक्सप्लोसिव इस्तेमाल करती है, वो भी था. बाकी खुद से भी बनाया था. इसके अंदर ही धमाका हुआ. इस बम का मकसद शायद सोमालिया विदेश मंत्रालय को निशाना बनाना था. धमाका इतना ज़ोरदार था कि कई इमारतें ढह गईं.
धमाके में सेना के इस्तेमाल में आने वाले बारूद का इस्तेमाल किया गया था (फोटोःरॉयटर्स)
धमाके में सेना के इस्तेमाल में आने वाले बारूद का इस्तेमाल किया गया था (फोटोःरॉयटर्स)

इस ट्रक को एक चेकपॉइंट पर रोका गया था. फिर जैसे ही इसकी तलाशी होती, ड्राइवर इसे भगाकर ले गया. ट्रक एक बैरियर से टकराया और इसके अंदर रखे विस्फोटक फट गए. यहीं पास में एक टैंकर खड़ा था. उसमें पेट्रोल या डीजल भरा था. इसके कारण धमाके ने और भयानक रूप ले लिया. चारों दिशाओं में आग के गोले फैलने लगे.
देश के राष्ट्रपति ने भी खून दान किया
मोगादिशू के अस्पतालों के बाहर खून दान करने वालों का तांता लग गया है. रक्तदान करने वालों में राष्ट्रपति मुहम्मद अब्दुल्लाही मुहम्मद भी शामिल थे. देश में तीन दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया गया है. उन्होंने इस हमले के लिए अल-शबाब को ज़िम्मेदार ठहराया है. अल शबाब एक आतंकी संगठन है जो सोमालिया की सरकार के खिलाफ लड़ रहा है.
 
मोगादिशू की एम्बुलेंस सर्विस का कहना है कि उन्होंने ऐसा तबाही कभी नहीं देखी (फोटोःरॉयटर्स)
मोगादिशू की एम्बुलेंस सर्विस का कहना है कि उन्होंने ऐसी तबाही कभी नहीं देखी (फोटोःरॉयटर्स)

आतंकवाद के साथ ही भूख से भी लड़ रहा है सोमालिया
सोमालिया में आतंकवाद तो है ही, भुखमरी और गरीबी भी बहुत है. संयुक्त राष्ट्र (UN) के आंकड़े देखिए. आधी से ज्यादा आबादी को भरपेट खाना मयस्सर नहीं है. दो साल लगातार सूखा आया. इसके कारण हालत और पस्त हो गई. सोमालिया की कुल आबादी करीब एक करोड़ 40 लाख है. इसमें से लगभग 65 लाख लोगों के पास खाने का अकाल है. 30 लाख से ज्यादा लोग रोज़ाना अपने पेट की जरूरतें पूरी नहीं कर सकते.
2011 में यहां भयंकर अकाल आया था. इसमें कम से कम 25 लाख लोग भूख से तड़पकर मारे गए. विस्थापित हुए लोगों के बीच भी गरीबी और भुखमरी बहुत ज़्यादा है. नौकरी है नहीं. रोजगार छिन चुका है. खेती हो नहीं रही. भूख से मरने की नौबत तो आएगी ही. 12 लाख से ज़्यादा लोग अपना घर-बार छोड़कर देश के भीतर ही कहीं और रहने को मजबूर हैं.
धमाके का इल्ज़ाम आतंकी संगठन अल शबाब पर है. फिलहाल उसने अपनी ओर से ज़िम्मेदारी कबूल नहीं की है (फोटोःरॉयटर्स)
धमाके का इल्ज़ाम आतंकी संगठन अल शबाब पर है. फिलहाल उसने अपनी ओर से ज़िम्मेदारी कबूल नहीं की है (फोटोःरॉयटर्स)

दुनिया के वो देश, जहां स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चों की तादाद सबसे कम है, उनमें सोमालिया का नाम बहुत ऊपर है. केवल 42 फीसदी बच्चों का ही स्कूल में एडमिशन हो पाता है. जब इतनी गरीबी हो कि पेट भरने के लाले पड़ जाएं तो पढ़ाई को कौन पूछता है! UN यहां कई मानवीय कार्यक्रम चलाता है. इनसे हजारों-लाखों परिवारों के दिन गुज़र रहे हैं.
ऐसी किसी समस्या से दुनिया के किसी भी देश में दिक्कत होगी, लेकिन सोमालिया का मामला अलग है. सोमालिया में इन दिक्कतों से लड़ने के लिए एक स्थिर, चुनी हुई सरकार नहीं है. तिस पर अल-शबाब जैसे कई संगठन है जो सरकार के पैर जमने नहीं दे रहे. इसलिए कुछ लोग भूख से मर रहे हैं, कुछ बारूद से. कुछ बदल नहीं रहा. दुनिया की नज़र में सोमालिया एक ऐसा 'फेल्ड स्टेट' है, जहां के डाकू उनके व्यापारी जहाज़ों को अगवाकर के मोटी फिरौती वसूलते हैं. शायद यही वजह है कि पौने तीन सौ लोगों के एक झटके में मर जाने के बाद भी दुनिया में कोई खास खलचल नहीं मची है.
*सोमालिया के बारे में तफसील से जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.
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