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चार 'बाबू' जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार चलाने के लिए चुना है

सरकार इनके कई साल के अनुभव को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने का मन बना रही है.

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इन चार मंत्रियों का प्रमोशन हुआ है.
राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में 3 सितंबर, 2017 की सुबह जिन 9 नए लोगों ने मंत्री पद की शपथ ली, उनमें से चार अपने पिछले करियर में 'बाबू' थे. बाबू माने वो कारकुन जो अपने बरसों के अनुभव के आधार पर जानते हैं कि सरकार की मशीन में कहां तेल पड़ना है और कहां रेगमाल पेपर से घिसाई होनी है. इन चार रिटायर्ड सरकारी अधिकारियों में से दो पहले से सांसद हैं और दो को छह महीने के भीतर लोकसभा या राज्यसभा में से किसी एक सदन का सदस्य बनना है.

1. नाम: सत्यपाल सिंह (रिटायर्ड आईपीएस)

ह्यूमन रिसोर्स मिनिस्ट्री यानी मानव संसाधन मंत्रालय के राज्यमंत्री बनाए गए सत्यपाल वैज्ञानिक बनना चाहते थे, लेकिन 1980 में महाराष्ट्र काडर से IPS बन गए. पढ़ाई में इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में एमफिल किया है. नागपुर यूनिवर्सिटी से नक्सलवाद पर शोध भी कर चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया जाकर MBA की भी पढ़ाई कर चुके हैं.
1990 के दशक में जब मुंबई में छोटा राजन, छोटा शकील और अरुण गवली गैंग का बोलबाला था, सिंह क्राइम ब्रांच के ज्वॉइंट कमिश्नर इंचार्ज थे. क्राइम ब्रांच के चीफ हुए तो अंडरवर्ल्ड के खिलाफ स्पेशल पुलिस टास्क फोर्स बनाई. दया नायक, प्रदीप शर्मा, विजय सालस्कर जैसे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इसी दौर में हुए थे. सिंह ने नक्सली इलाकों में बहुत काम किया है और उन्हें इस बारे में जानकार माना जाता है. सिंह इशरत जहां केस में बनी एसआईटी के तीन सदस्यों में से एक थे.
 
सत्यपाल ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मुंबई पुलिस कमिश्नर का पद छोड़ा था.
सत्यपाल ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मुंबई पुलिस कमिश्नर का पद छोड़ा था.

सिंह पहले आईपीएस अफसर हैं जिन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर रहते हुए इस्तीफा दिया. तारीख थी 31 जनवरी 2014. इसके ठीक बाद 2 फरवरी, 2014 में मेरठ में हुई नरेंद्र मोदी की रैली से भाजपा में शामिल हो गए. सवाल पूछे गए तो बोले,
'तटस्थ रहने वालों का न्याय इतिहास करेगा. अभी पक्ष लेने का समय है. हम सबको मोदी की मदद करनी चाहिए'
सिंह को बागपत से टिकट मिला. मोदी लहर का असर ऐसा रहा कि राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख अजीत सिंह को 2 लाख से ज्यादा वोटों से हराकर जायंट किलर बन गए. अब मंत्री बन रहे हैं. सिंह को मंत्री बनाने के पीछे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सामुदायिक-जातीय समीकरण एक बड़ी वजह हो सकते हैं. इलाके में जाट समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संजीव बालियान की छुट्टी हो चुकी है. सत्यपाल सिंह भी जाट नेता हैं. इस जगह को भी भरेंगे.
सिंह के बारे में तफसील से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

2. राजकुमार सिंह (रिटायर्ड आईएएस)

 
आर के सिंह ने बीजेपी ज्वॉइन करने के बाद कहा था कि जेडीयू सरकार भ्रष्ट हो चुकी है.
आर के सिंह ने बीजेपी ज्वॉइन करने के बाद कहा था कि जेडीयू सरकार भ्रष्ट हो चुकी है.

ऊर्जा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए राजकुमार सिंह कैबिनेट में नए चेहरे हैं. बिहार काडर के 1975 बैच के आईएएस अफसर रहे. यूपीए राज में होम सेक्रेट्री रहे हैं. 30 अक्टूबर 1990 को आडवाणी को बतौर समस्तीपुर डीएम गिरफ्तार किया. समस्तीपुर के अलावा वह ईस्ट चंपारण और पटना के भी डीएम रहे. नीतीश सरकार के समय रोड कंस्ट्रक्शन विभाग के प्रधान सचिव थे. अहम रोल निभाया ब्रैंड नीतीश को चमकाने में.

एक गृहमंत्री से बनी, एक से नहीं

आडवाणी के गृहमंत्री रहते हुए 1999 से 2004 तक ज्वॉइंट सेक्रेट्री रहे होम मिनिस्ट्री में. 30 जून 2011 से 30 जून 2013 तक गृह सचिव रहे. इस दौरान दो गृहमंत्री रहे, पी चिंदबरम और सुशील कुमार शिंदे. चिदंबरम से बनी, मगर शिंदे से नहीं. दिल्ली गैंगरेप 16 दिसंबर 2012 इन्हीं के टाइम हुआ. इसकी हैंडलिंग से शिंदे नाराज थे. अपनी क्लीन इमेज की वजह से होम सेक्रेट्री बनने से पहले एके एंटनी के मंत्रालय डिफेंस में डिफेंस प्रोडक्शन के मुखिया रहे. 13 दिसंबर 2013 को बीजेपी ज्वॉइन की.
 
आरके सिंह ने आडवाणी को बतौर समस्तीपुर डीएम गिरफ्तार किया था.
आरके सिंह ने आडवाणी को बतौर समस्तीपुर डीएम गिरफ्तार किया था.

जेडीयू सरकार को भ्रष्ट बताया था

नीतीश ने चैंबर तक तैयार करवा दिया था, मगर सिंह ने बीजेपी ज्वॉइन करने के बाद कहा कि जेडीयू सरकार भ्रष्ट हो चुकी है. 2014 के लोकसभा चुनाव में सिंह ने आरा में जेडीयू की सिटिंग एमपी मीना सिंह को हराया. नीतीश ने रिटायरमेंट के बाद एडवाइजर इन्फ्रास्ट्रक्चर की पोस्ट ऑफर की. मगर सिंह ने इनकार कर दिया.
राजकुमार सिंह के बारे में और किस्से यहां क्लिक कर के पढ़ें

3. हरदीप सिंह पुरी (रिटायर्ड आईएफएस)

शहरी विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाए गए हरदीप के पिता भी राजनयिक थे, इसलिए ज़्यादातर पढ़ाई बोर्डिंग स्कूल में हुई. दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की. खूब पढ़े थे, तो DU के प्रतिष्ठित स्टीफेंस कॉलेज में पढ़ाया भी. कुछ महीने पढ़ाने के बाद आईएफएस ज्वॉइन कर लिया. शादी भी एक आईएफएस अफसर लक्ष्मी पुरी से ही की.
 
पुरी को विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों का जानकार माना जाता है.
पुरी को विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों का जानकार माना जाता है.

28 फरवरी, 2013 को जब रिटायर हुए, तब तक ब्राज़ील, जापान, श्रीलंका और ब्रिटेन जैसी जगहों पर डिप्लोमैटिक पोस्टिंग पर जा चुके थे. काफी काम यूएन में भी किया. इसलिए इन्हें विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों का जानकार माना जाता है. पुरी सियासत से ज़्यादा दूर कभी नहीं रहे. पढ़ाई के दौरान जेपी आंदोलन से साथ जुड़े रहे थे. अरुण जेटली के साथ गाढ़ी दोस्ती है. 2 जनवरी 2014 को BJP में शामिल हुए थे.
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4. अल्फ़ोंस कन्ननथनम (रिटायर्ड आईएएस)

अल्फ़ोंस को पर्यटन मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार दिया गया है. 1979 केरल काडर के आईएस अधिकारी रहे हैं. 1989 में केरल के कोट्टयम जिले को 100 फ़ीसदी साक्षरता दिलाने के बाद पहली बार खबरों में आए. पांच दिसंबर 1994 को छपी टाइम मैगजीन की कवर स्टोरी में इन्हें 100 ग्लोबल यंग लीडर की सूची में शामिल किया गया था.
 
डीडीए कमिश्नर के तौर पर अल्फ़ोंस कन्ननथनम
डीडीए कमिश्नर के तौर पर अल्फ़ोंस कन्ननथनम

दिल्ली के डिमॉलिशन मैन भी रहे

डीडीए के कमिश्नर रहते हुए 14,310 गैरकानूनी इमारतों को गिराया. इससे सरकार को उस समय करीब 10,000 करोड़ का फायदा हुआ. 2006 में प्रशासनिक सेवा से मुक्त हुए. उसी साल गृह राज्य केरल में चुनाव थे. पर्चा भरा कोट्टायम की कंजिरापल्ली सीट से, निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पीछे खड़ी थी, इसलिए चुनाव जीत गए. 2011 में विधायकी पूरी होने के बाद तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के नेतृत्व में बीजेपी ज्वॉइन की.
अल्फ़ोंस कन्ननथनम के बारे में तफसील से यहां क्लिक कर के पढ़ें.



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