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32 साल पहले दूध में मिलावट की थी, कोर्ट ने अब सजा सुनाई है

1990 में दूध में मिलावट की थी.

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सांकेतिक फोटो- आजतक

साल 1990 में एक दूधवाले ने दूध में मिलावट की और अब 2023 में उन्हें उसके लिए सज़ा मिली. सुन के काफी काफी अजीब लग रहा होगा लेकिन ये एक सच्ची घटना है. अपने ही देश का केस है जो उत्तर प्रदेश से सामने आया है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, मुजफ्फरनगर की लोकल कोर्ट ने बुधवार, 18 जनवरी को इस मामले में छह महीने की सज़ा और 5000 रुपये के जुर्माने का आदेश दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी दूधवाले का नाम हरवीर सिंह है. 1990 की बात है तब वो घर-घर जाकर दूध बेचा करते थे. कुछ लोगों ने उनके खिलाफ दूध में मिलावट की कंप्लेन की. उसी साल 21 अप्रैल को तत्कालीन फूड इंस्पेक्टर सुरेश चंद ने दूध का सैंपल लिया. 2 महीने बाद लैब रिपोर्ट्स आईं. जिसमें साबित हो गया कि हरवीर सिंह ने दूध में मिलावट की थी. जिसके बाद उनके खिलाफ, प्रिवेंशन ऑफ फूड एडल्टरेशन एक्ट के सेक्शन 7/16 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया.

1990 में केस हुआ तो 2023 में सज़ा क्यों?

अब सवाल उठता है कि आरोप 1990 में और दोष साबित भी हुआ 1990 में तो पिक्चर अभी तक बाकी क्यों रही मेरे दोस्त? तो जवाब है कि पैंतरा. इस मामले की जांच से जुड़े अधिकारी ने बताया कि हरवीर खुद पर चल रहे केस की पेशी में कभी आया ही नहीं. 
अधिकारी ने बताया,

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आरोपी इतने सालों में अलग-अलग बहाने देकर कोर्ट की पेशी से बचता रहा है. पिछले 32 सालों में उसने अपने कई वकील बदल दिए हैं. तीन बार तो उसे सिर्फ इसलिए जेल हुई है क्योंकि वो मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं हुआ.

अधिकारी का कहना है कि इन सबका भी कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि हर बार वो जमानत पर बाहर आता रहा. इस बार, बुधवार को भी उसने सज़ा सुनाए जाने के बाद जमानत की अर्जी लगाई. जो मंजूर भी हो गई है. एक वरिष्ठ वकील ने बताया कि ऐसे मामले जिसमें कोर्ट ने 2 साल तक की सजा सुनाई, उसमें आरोपी जमानत लेकर हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ याचिका दायर कर सकता है. वकील ने बताया कि अब आरोपी हरवीर सिंह के पास दो महीने हैं, इसमें या तो वो हाईकोर्ट में अपील कर सकता है या फिर उसे जेल  जाना हो सकता है. 

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