दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव में परचम लहराने वाले इंडिपेंडेंट कैंडिडेट दीपांशु शौकीन की खूब चर्चा हो रही है. उन्होंने DUSU वाइस प्रेसिडेंट का पद 13 हजार 705 वोटों के मार्जिन से जीता. दीपांशु दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास में अकेले ऐसे स्टूडेंट हैं, जिन्होंने वाइस प्रेसिडेंट का पद इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर जीता है. उन्हें कुल 30 हजार 615 वोट मिले. आखिरी समय में कांग्रेस के स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन NSUI ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद वह इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़े. दीपांशु ने न सिर्फ NSUI बल्कि ABVP को भी करारी शिकस्त दी.
NSUI ने टिकट काटा, निर्दलीय जीतकर DUSU में इतिहास रच दिया, कौन हैं दीपांशु शौकीन?
दीपांशु शौकीन काफी समय से स्टूडेंट इलेक्शन की तैयारी कर रहे थे. छात्रों के मुद्दे उठा रहे थे. जब उन्हें आखिरी समय में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से टिकट नहीं मिला तो ये उनके लिए बड़ा झटका था.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में ABVP ने 4 में से 3 पद जीते. NSUI खाली हाथ रही. DUSU प्रेसिडेंट पोस्ट पर ABVP के यश डबास को जीत मिली. सेक्रेटरी के पद पर ABVP की रिया छाबड़ी ने जीत दर्ज की. जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर ABVP के लक्ष्यराज ने परचम लहराया. उपाध्यक्ष का पद बतौर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीता.
दीपांशु शौकीन काफी समय से स्टूडेंट इलेक्शन की तैयारी कर रहे थे. छात्रों के मुद्दे उठा रहे थे. जब उन्हें आखिरी समय में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से टिकट नहीं मिला तो ये उनके लिए बड़ा झटका था. उनसे दावेदारी वापस लेने के लिए कहा गया, लेकिन उनका इरादा मजबूत था.
दीपांशु दावेदारी से पीछे नहीं हटे और निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. अब चुनौती सिर्फ इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर जीतने की नहीं थी, बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी का इतिहास बदलने की भी थी. जब चुनाव के नतीजे आए तो दीपांशु इतिहास रच चुके थे. चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद दीपांशु शौकीन ने ‘दी लल्लनटॉप’ के रिपोर्टर रजत पांडे से बात की. दीपांशु ने बताया कि जीत मिलने के बाद से उनकी किसी NSUI लीडर या कांग्रेस नेता से बात नहीं हुई है. उन्होंने NSUI पर सवाल उठाते हुए कहा,
मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि राहुल गांधी जी हमारे देश के नेता हैं. यूथ और Gen Z को समझते हैं. Gen Z की बात करते हैं. Gen Z के मुद्दों पर बात करते हैं. लेकिन, उनकी ‘छात्रों की गूंज’ NSUI तक नहीं पहुंच पाई. क्योंकि Gen Z के कुछ लीडर्स न तो Gen Z को समझ पाए, न उन लोगों को समझ पाए जो Gen Z के बीच में रहते हैं. Gen Z की बात कर सकते हैं, जिन्हें Gen Z लीडर बनाना चाहती है. जो डिजर्व करते हैं.
दीपांशु शौकीन ने आगे कहा,
पिता कंडक्टर, माता आंगनवाड़ी वर्करमैं कहना चाहूंगा कि जो इंटरनल पॉलिटिक्स है, जो नेता Gen Z को नहीं समझ सकते, उन्हें इतनी बड़ी बागडोर नहीं संभालनी चाहिए. देश में Gen Z का सबसे मेन रोल है. क्योंकि कोई भी आंदोलन इस देश में होता है तो सबसे मेन रोल कहीं ना कहीं छात्रों का देखा जाता है. छात्रों को समझने के लिए हमें बदलाव की जरूरत है. नेतृत्व की जरूरत है, जिसे Gen Z लीड करें. जो उन स्टूडेंट्स को समझ पाए. उनकी बात रख पाए. वो चीजें मुझ में थी. तभी Gen Z ने मुझ पर भरोसा जताया और दिल्ली विश्वविद्यालय में एक नया इतिहास बना.
दीपांशु शौकीन दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज डिपार्टमेंट के छात्र हैं. उन्होंने शहीद भगत सिंह कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. दीपांशु दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के रहने वाले हैं. जिस हौसले से दीपांशु ने जीत का सफर तय किया, वो उन्हें उनके पैरेंट्स से मिला.
दीपांशु शौकीन के पिता दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) में कंडक्टर हैं. मां एक आंगनवाड़ी वर्कर हैं. दीपांशु का परिवार चाहता था कि वो यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) के एग्जाम की तैयारी करें, लेकिन उन्होंने राजनीति में उतरना चुना. इसका आगाज स्टूडेंट पॉलिटिक्स से हुआ.
नंगे पैर रहने की प्रतिज्ञादीपांशु शौकीन स्टूडेंट्स की नजर में तब और चढ़ गए, जब उन्होंने दिल्ली के सत्य निकेतन में पेइंग गेस्ट (PG) बिल्डिंग गिरने के बाद एक बड़ा ऐलान किया. ऐलान क्या, एक ‘प्रतिज्ञा’ थी. दीपांशु ने कसम खाई कि जब तक सत्य निकेतन के पीड़ित स्टूडेंट्स को इंसाफ नहीं मिल जाता. वो जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे. नंगे पैर ही रहेंगे. सत्य निकेतन हादसे में कुल 7 लोगों की मौत हुई, जिसमें पांच स्टूडेंट्स थे.
ABVP, NSUI, AISA-SFI… सब ढेरदीपांशु के इस कदम से स्टूडेंट्स के बीच उनकी इमेज में और निखार आया. DUSU कैंपेन में स्टूडेंट्स की सेफ्टी, रहने की जगह और कैंपस के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया. दीपांशु के कैंपेन ने स्टूडेंट्स को टच किया और इसका असर वोटिंग में साफ दिखा. दीपांशु शौकीन का तूफान ऐसा था कि DUSU की तीन सीटें जीतने वाली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी हार गई.
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दीपांशु शौकीन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्टूडेंट विंग ABVP के ईशु मौर्य को हराया, जिन्हें 16,910 वोट मिले. NSUI के वीर चतरथ, जिन्हें 4,313 वोट मिले, उन्हें भी करारी हार मिली. AISA-SFI (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन-स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) के अक्षत शिखर और इंडिपेंडेंट कैंडिडेट अरण्या सिंह राठौर भी हार गए.
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