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इस आदमी ने 500 से ज़्यादा बच्चियों का यौन शोषण किया है

हम कैसे बचाएं अपने बच्चों को?

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फोटो - thelallantop
भारत में कम उम्र की लड़कियों के शारीरिक शोषण की घटनाओं का प्रतिशत काफी बड़ा है. ये अलग बात है कि इनमे से ज़्यादातर केसेस दर्ज नहीं हो पाते. इस बात के पीछे शायद सबसे बड़ी वजह ‘लोग क्या कहेंगे’ वाला हव्वा ही है. अव्वल तो बच्चियां ही मां-बाप के डर से बता नहीं पाती. और कुछ बताने की हिम्मत भी करती हैं तो उन्हें अभिभावक ही चुप करा देते हैं.

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source: Pamir Times

जिस समाज में लड़की के शरीर की प्यूरिटी ('सो कॉल्ड', ऑफ़ कोर्स) ही उसके मूल्यांकन का सबसे बड़ा पैमाना हो वहां ऐसी घटनाएं दबा देने में ही भलाई समझते हैं लोग. बच्ची की लेबलिंग होने का ख़तरा जो उन्हें नज़र आता है. फिर ख़ानदान की इज्ज़त भी एक मसला होता है. कई बार आरोपी घर-ख़ानदान का ही बंदा होता है. और सबसे बड़ा खौफ़ कि ‘इससे शादी कौन करेगा?” तो इन तमाम बेतुकी वजहों से बच्चियों पर हुए वहशियाना अटेम्प्ट अन-रजिस्टर्ड ही रह जाते हैं. और इसी से हौसला मिलता है उन लोगों को जो अपनी विकृत मानसिकता की तसल्ली के लिए बेख़ौफ़ होकर शिकार खोजते हैं. वो जानते हैं कि शराफत के नक़ाब में वो सालों-साल छिपे रह सकते हैं. कई बार तो हमेशा के लिए.
एक हिला देने वाले खुलासे में सामने आया है कि एक शख्स ने 500 से ज़्यादा बच्चियों का शारीरिक शोषण किया. 38 साल के सुनील रस्तोगी ने कबूला है कि उसने 13 साल के वक़्फ़े में इस करतूत को अंजाम दिया. और सिर्फ एक बार पकड़ा गया. बाकी सारे मौकों पर साफ़ बच निकला. बस एक बार 2006 में उत्तराखंड के रुद्रपुर में उसे 6 महीने की जेल हुई थी.
रस्तोगी दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी में अपने शिकार ढूंढता था. वो खासतौर से स्कूल से घर लौटने वाली लड़कियों को निशाना बनाता था. उसने पूर्वी दिल्ली में कुछ वक़्त तक टेलर का काम भी किया. वो अक्सर इस इलाके में काम की तलाश में भटकता रहता था.
दिल्ली पुलिस ने अब तक 6 रजिस्टर्ड केसेस के साथ रस्तोगी का कनेक्शन खोज निकाला है. इनमे से तीन केस दिल्ली के हैं, दो रुद्रपुर और एक बिलासपुर जिले का है. 2004 में रस्तोगी और उसके परिवार को मयूर विहार इलाके से तब निकाला गया था जब उसने पड़ोस की एक लड़की को हैरेस किया था. 
रस्तोगी के पकड़ाई में आने का घटनाक्रम उस दिन से शुरू हुआ जब एक 10 साल की लड़की पर सेक्सुअल असॉल्ट हुआ. जब पुलिस ने खोजबीन शुरू की तो सामने आया कि न्यू अशोक नगर में भी इसी तरह दो और बच्चियों पर हमले की खबर है. बच्चियों की उम्र 9 और 10 साल थी. रस्तोगी ने उन्हें नए कपड़ों का लालच दिखाया और एक अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग की सीढ़ियों के नीचे ले गया. लड़कियों के शोर मचाने पर वो भाग निकला.
पूछताछ के दौरान रस्तोगी ने बताया कि वो पिछले 10 सालों से ऐसा कर रहा है. वो अक्सर वीकेंड पर दिल्ली काम की तलाश में आया करता था. अपने शिकार को तय कर लेने के बाद वो कोई न कोई लालच देकर उन्हें तनहा जगह ले जाता था और फिर उनका रेप करता था. लड़कियों के विरोध करने की सूरत में वो उन्हें छोड़ देता था और शहर छोड़ कर भाग जाता था. कई बार उसने अपने शिकारों को ब्लैकमेल भी किया ताकि वो उसके पास लौट कर आ सकें.
सब-इंस्पेक्टर संदीप और उनकी टीम को उसे पकड़ने का टास्क सौंपा गया था जिन्होंने उसे कोंडली गांव के पास से गिरफ्तार किया.
ये बेहद हैरानी की बात है कि 13 साल से एक शख्स ये सब करता रहा और इक्का-दुक्का मौके को छोड़ तकरीबन हर बार वो बचता रहा. ज़ाहिर सी बात है उसके सैंकड़ों शिकारों की शिकायत कहीं दर्ज नहीं हुई. ये एक गंभीर बात है. इतने बड़े पैमाने पर कोई आदमी वहशत का मुज़ाहिरा करें और साफ़ बचा रहे ये हमारी क़ानून-व्यवस्था से ज़्यादा हमारे सामाजिक ढांचे की खामी है.
अब वक़्त आ गया है कि नैतिकता के पैमाने कुछ ढीले कर दिए जाएं ताकि कम से कम इनकी आड़ में गुनाहगारों को बच निकलने का रास्ता न मिले.


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