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मुइज्जू के मंत्री का दावा- 'मालदीव के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट चाहता है भारत'

मालदीव के मंत्री मोहम्मद सईद ने कहा है कि भारत ने द्वीपीय राष्ट्र के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. इस पर चर्चा जारी है.

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मालदीव और भारत के संबंधों में बीते कुछ समय से तल्खी देखी गई है.(फाइल फोटो- आजतक)

दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव के बीच मालदीव ने कहा कि भारत ने उसके साथ़ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) चाहता है. मालदीव के आर्थिक विकास मंत्री मोहम्मद सईद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शनिवार, 25 मई को ये बात कही. सईद ने कहा, भारत मालदीव के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट शुरू करने में जुटा है. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार एक ऐसा समझौता करना चाहती है, जिससे ट्रेड एक्टीविटीज को आसान बनाया जा सके.

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मोहम्मद सईद ने कहा,

“वे (भारत) चाहता है कि मालदीव के साथ SAFTA (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता) के अतिरिक्त एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी हो. राष्ट्रपति मुइज्जू ने सभी देशों को यह मौका दिया है. हमारी सरकार ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ समझौता करना चाहती है, जिससे ट्रेड एक्टीविटीज को आसान बनाया जा सके.”

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दोनों देशों के बीच पहले से ही साउथ एशियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (SAFTA) लागू है. 1981 के भारत और मालदीव व्यापार समझौते के तहत, जरूरी सामानों के निर्यात को लेकर नियम बनाए गए थे. मालदीव में मौजूद भारतीय हाई कमीशन के रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले साल भारत मालदीव का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था.

साल 2021 में पहली बार दोनों देशों के बीच व्यापार 25 हजार करोड़ के पार गया था. वहीं इसके अगले साल 2022 में दोनों देशों के बीच ट्रेड 41 हजार करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड किया गया. भारत मालदीव से मुख्य तौर पर स्क्रैप मेटल इम्पोर्ट करता है. वहीं मालदीव हमसे दवाइयां, सीमेंट, रडार उपकरण समेत खाने-पीने का सामान जैसे चावल, मसाले, फल-सब्जी इम्पोर्ट करता है.

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट क्या होता है?

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौता. FTA दो देशों के बीच ऐसा समझौता होता है, जिसका पहला मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना होता है. मुख्य उद्देश्य आयात और निर्यात में आने वाली बाधाओं को दूर करना होता है.

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जब दो देश फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करते हैं तो कस्टम ड्यूटी या तो कम कर देते हैं या पूरी तरह हटा देते हैं. साथ ही आयात-निर्यात के नियम कायदों में भी सख्ती नहीं बरती जाती है. एक दूसरे के देश में जो छात्र पढ़ाई के लिए आना या जाना चाहते हैं, उन्हें भी आसानी से वीजा मिल जाता है. नौकरी पेशा लोगों को भी वीजा और जॉब्स वगैरह मिलने में आसानी होती है.

 

वीडियो: मालदीव पर भारत सरकार का बड़ा ऐलान!

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