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महाराष्ट्र: जंगल में सर्वे के लिए निकली महिला सुरक्षागार्ड को बाघिन ने मार डाला

बाघिन माया का इंसानों पर ये तीसरा हमला है.

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सुरक्षा गार्ड स्वाति दुमाने की फाइल फोटो. दूसरी फोटो सांकेतिक है.
महाराष्ट्र (Maharashtra) के चंद्रपुर (Chandrapur) जिले के ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व (Tiger Reserve) में शनिवार सुबह एक महिला सुरक्षागार्ड पर बाघिन ने हमला कर दिया. महिला गार्ड की मौके पर ही मौत हो गई. टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने ये जानकारी दी. सुरक्षा गार्ड स्वाति दुमाने बाघों की संख्या का पता लगाने के लिए सर्वे कर रही थी, इसी दौरान एक बाघिन ने स्वाति पर जानलेवा हमला कर दिया. जिस बाघिन ने स्वाती पर हमला किया उसका नाम 'माया' (Maya) है. सर्वे के दौरान किया हमला घटना शनिवार सुबह करीब 8 बजे की है. फील्ड डायरेक्टर जितेंद्र रामगांवकर ने एक्सप्रेस को बताया कि सुबह सात बजे सुरक्षा गार्ड स्वाति दुमाने तीन गार्ड के साथ सर्वे के काम पर निकली. ये चारों करीब चार किलोमिटर चलकर टाइगर रिजर्व के कोर एरिया कोलारा वन रेंज (Kolara Forest Range) पहुंचें. टीम ने लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक बाघिन माया को सड़क पर बैठे देखा. टीम ने करीब आधे घंटे तक बाघिन के जाने का इंतजार किया, लेकिन बाघिन वहीं बैठी रही. इस वजह से स्वाती दुमाने सर्वे करने के लिए जंगल के एक दूसरे रास्ते से जाने की कोशिश करने लगी. स्वाती तीनों गार्ड के पीछे चल रही थी. इसी दौरान बाघिन का ध्यान टीम पर चला गया और वो उनका पीछा करने लगी. कुछ देर बाद उस बाघिन ने स्वाती दुमाने पर हमला कर दिया और उसे घसीटकर जंगल के अंदर ले गई. इस बाघिन की उम्र 10 साल है. बाद में स्वाती के शव को ढूंढ कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया.
वहीं टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक नंदकिशोर काले ने अखबार को बताया,
"जहां बाघिन बैठी थी उसके दूसरी तरफ सड़क पर कुछ टूरिस्ट गाड़ियां खड़ी थीं. दुमाने और उनके साथियों ने 4 किमी का सर्वे पूरा कर लिया था, और वो 1 किमी का सर्वे और करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने बाघिन को देखने के बाद भी दूसरे रास्ते से जाने की सोची. हालांकि जब भी ऐसे कोई स्थिति हो तो सुरक्षा गार्डों को ये कहा जाता है कि तब तक आगे ना बढ़े जब तक रास्ता साफ ना हो."  
नंदकिशोर काले के मुताबिक, दुमाने एक साल पहले ही टीएटीआर में शामिल हुई थीं और सुरक्षागार्ड के तौर पर ये उनकी पहली पोस्टिंग थी. वन संरक्षक जितेंद्र रामगांवकर ने कहा कि घटना के बाद एआईटीई (All India Tiger Estimation) -2022 के साइन सर्वे और पैदल चलने की कवायद को अगली सूचना तक रोक दिया गया है. इस सर्वे के दौरान जंगल में बाघों के पैरों के निशान, पेड़ पर उनके खरोंचने के निशान और गोबर की मदद से बाघों की मौजूदगी का पता लगाया जाता है. तीन इंसानों को मार चुकी है माया एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि
“माया का इंसानों पर ये तीसरा हमला है. इससे पहले, मई 2017 में एक वन मजदूर और दिसंबर 2020 में एक महिला को माया ने हमला कर मार डाला था. ये साफ है कि इस बाघिन के आसपास सावधानी बरतने की जरूरत है.”
चंद्रपुर के प्रमुख वन्यजीव कार्यकर्ता और राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य  बंधु धोत्रे का कहना है कि
"आमतौर पर टूरिस्ट ज़ोन (Tourist Zone)में बाघ, मनुष्यों पर हमला नहीं करते हैं. कई बार टूरिस्ट बाघों के काफी नजदीक भी पहुंच जाते हैं, लेकिन बाघ कभी उन पर हमला नहीं करते. इस तरह माया बाघिन ने सुरक्षा गार्ड पर हमला किया है ये बहुत चौंकाने वाली बात है."
इससे पहले 2012 में वाटर होल के नजदीक एक सुरक्षा गार्ड को बाघ ने मार दिया था.

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