वहीं टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक नंदकिशोर काले ने अखबार को बताया,
"जहां बाघिन बैठी थी उसके दूसरी तरफ सड़क पर कुछ टूरिस्ट गाड़ियां खड़ी थीं. दुमाने और उनके साथियों ने 4 किमी का सर्वे पूरा कर लिया था, और वो 1 किमी का सर्वे और करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने बाघिन को देखने के बाद भी दूसरे रास्ते से जाने की सोची. हालांकि जब भी ऐसे कोई स्थिति हो तो सुरक्षा गार्डों को ये कहा जाता है कि तब तक आगे ना बढ़े जब तक रास्ता साफ ना हो."नंदकिशोर काले के मुताबिक, दुमाने एक साल पहले ही टीएटीआर में शामिल हुई थीं और सुरक्षागार्ड के तौर पर ये उनकी पहली पोस्टिंग थी. वन संरक्षक जितेंद्र रामगांवकर ने कहा कि घटना के बाद एआईटीई (All India Tiger Estimation) -2022 के साइन सर्वे और पैदल चलने की कवायद को अगली सूचना तक रोक दिया गया है. इस सर्वे के दौरान जंगल में बाघों के पैरों के निशान, पेड़ पर उनके खरोंचने के निशान और गोबर की मदद से बाघों की मौजूदगी का पता लगाया जाता है. तीन इंसानों को मार चुकी है माया एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि
“माया का इंसानों पर ये तीसरा हमला है. इससे पहले, मई 2017 में एक वन मजदूर और दिसंबर 2020 में एक महिला को माया ने हमला कर मार डाला था. ये साफ है कि इस बाघिन के आसपास सावधानी बरतने की जरूरत है.”चंद्रपुर के प्रमुख वन्यजीव कार्यकर्ता और राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य बंधु धोत्रे का कहना है कि
"आमतौर पर टूरिस्ट ज़ोन (Tourist Zone)में बाघ, मनुष्यों पर हमला नहीं करते हैं. कई बार टूरिस्ट बाघों के काफी नजदीक भी पहुंच जाते हैं, लेकिन बाघ कभी उन पर हमला नहीं करते. इस तरह माया बाघिन ने सुरक्षा गार्ड पर हमला किया है ये बहुत चौंकाने वाली बात है."इससे पहले 2012 में वाटर होल के नजदीक एक सुरक्षा गार्ड को बाघ ने मार दिया था.














