पुणे पोर्श कार हादसे (Pune Porsche Accident) के नाबालिग आरोपी के बेल की शर्तों पर अब महाराष्ट्र के डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस ने भी हैरानी जताई है. उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले में मात्र 15 दिनों की सोशल सर्विस और निबंध लिखने का ऑर्डर कैसे दिया गया.
Porsche कार हादसे के आरोपी की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं? जमानत पर डिप्टी CM ने जताई हैरानी
पुणे में जिस नाबालिग आरोपी की तेज रफ्तार पोर्श की टक्कर से बाइक पर सवार दो लोगों की मौत हुई, उसे 15 दिनों की सोशल सर्विस और निबंध लिखने जैसी शर्तों पर बेल दे दी गई थी. इस पर महाराष्ट्र के डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस ने हैरानी जताई है.

बता दें कि मोटरसाइकिल सवार दो लोगों को पोर्श कार से टक्कर मारने के नाबालिग आरोपी को कुछ शर्तों के तहत बेल दी जा चुकी है. शर्तों में 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस की मदद करना और 'सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव और इसके समाधान' विषय पर निबंध लिखना शामिल है. इस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सवाल उठाया है. कहा है कि न्याय सबको मिलना चाहिए. वहीं देवेंद्र फडणवीस ने भरोसा दिलाया है कि पुलिस इस मामले में इंसाफ मिलने तक लगी रहेगी.
फडणवीस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेश पर उठाया सवाल21 मई को मीडिया से बात करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा,
“जिस समय आरोपी लड़के को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया, बोर्ड ने उसमें बहुत ही लिनियंट व्यू लिया और दो लोगों के मरने के बावजूद भी केवल 15 दिन का सोशल सर्विस का काम दिया. जब जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के ऑर्डर को मैं देखता हूं, तो मुझे आश्चर्य होता है कि इतने गंभीर मामले में इस प्रकार का ऑर्डर कैसे दिया गया.”
ये भी पढ़ें- Porsche कार हादसा: आरोपी नाबालिग ने जिस बार में शराब पी थी वहां अब कोई नहीं जा पाएगा
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम फडणवीस ने बताया,
"पुलिस ने जो एप्लिकेशन दी है, उसमें साफ शब्दों में कहा है कि ये लड़का 17 साल 8 महीने का है. ये जो अपराध है, वो जघन्य अपराध है. निर्भया कांड के बाद जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में जो बदलाव आए हैं. उसमें 16 साल से ऊपर अगर विधि संरक्षित बालक है, लेकिन उसका अपराध जघन्य है, तो उसको वयस्क की तरह ट्रीट किया जा सकता है और उसको वयस्क ट्रीट करना चाहिए."
उन्होंने बताया कि पुलिस इस मामले में ऊपर के कोर्ट में गई थी. ऊपर की कोर्ट ने इसका गंभीर संज्ञान लिया है. फडणवीस के मुताबिक इस मामले में जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक पुलिस कोर्ट के सारे रास्ते टटोलते रहेगी.
राहुल गांधी बोले- ‘गरीब को 10 साल जेल, अमीर से निबंध लिखाया जा रहा’इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुणे केस को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा,
“बस ड्राइवर, ट्रक ड्राइवर, ओला, उबर, ऑटो ड्राइवर अगर गलती से किसी को मार देते हैं, तो 10 साल जेल की सजा हो जाती है और चाबी उठाकर वो फेंक देते हैं. मगर अमीर घर का 16-17 साल का बेटा पोर्श गाड़ी को शराब पीकर चलाता है और दो लोगों की हत्या करता है, तो उसे कहा जाता है ESSAY लिख दो, ESSAY ट्रक और बस ड्राइवर से क्यों नहीं लिखवाते, उबर ड्राइवर, ऑटो ड्राइवर से क्यों नहीं लिखवाते?”
बता दें कि पुणे में नाबालिग आरोपी की तेज रफ्तार पोर्श कार की टक्कर के कारण बाइक पर सवार दो लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया था, लेकिन हिरासत के लगभग 14 घंटे के अंदर कुछ शर्तों के तहत उसको बेल मिल गई. बेल की शर्तों में 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करना, मनोचिकित्सक से इलाज, निबंध लिखना, यातायात नियमों पर प्रेजेंटेशन देने जैसी गतिविधियां शामिल की गई हैं. इसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा है. मृतक के परिवार का कहना है कि बिजनेस टाइकून का बेटा होने के चलते आरोपी को बेल दे दी गई.
वीडियो: हरियाणा बस हादसा: नशे की हालत में पकड़ा गया था ड्राइवर, फिर प्रिंसिपल ने वापस दिला दी थी गाड़ी की चाबी!













