महाराष्ट्र से दही हांडी की तस्वीरें खूब आ रही हैं. आज जन्माष्टमी मनाई जा रही है और इस मौके पर मुंबई की लगभग हर गली में दही हांडी देखने को मिल जाएगी. महाराष्ट्र में दही हांडी युवाओं के लिए किसी पैशन से कम नहीं है. और अब इस पैशन को महाराष्ट्र सरकार एक खेल का दर्जा देने जा रही है. ये ऐलान किसी और ने नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किया है.
दही हांडी तोड़ने वाले गोविंदाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी, लेकिन कैसे?
सीएम एकनाथ शिंदे ने दही हांडी को खेल का दर्जा देने की बात कही.


मीडिया से बात करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा,
हमने दही हांडी को खेल का दर्जा देने का फैसला किया है. खेल में भाग लेने वाले गोविंदाओं को 10 लाख रुपये का बीमा कवर दिया जाएगा. राज्य सरकार की नौकरियों में भी गोविंदाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. हम इसे जन्माष्टमी उत्सव के दौरान साल में एक बार होने के बजाय एक नियमित खेल के रूप में बढ़ावा देंगे.
दही हांडी के इस खेल में मटकी में दही भर के उसे काफी ऊंचाई पर किसी रस्सी के सहारे टांगा जाता है. फिर एक एक ऊपर एक चढ़कर मानव श्रंखला बनाई जाती है और मटकी को तोड़ा जाता है. इन्हीं को गोविंदा कहा जा रहा है.
सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि दही हांडी की एक प्रो-लीग होगी. प्रतियोगिता के आयोजन में इनाम राज्य सरकार देगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिंदे कहा,
चीन और स्पेन में, मानव पिरामिड खेल को नियमित खेल माना जाता है. इसलिए, हमने महाराष्ट्र में अपने पारंपरिक खेलों जैसे खो-खो और कबड्डी को बढ़ावा देने का भी फैसला किया है. अधिक प्रतियोगिताएं और कार्यक्रम होंगे ताकि गोविंदा पूरे वर्ष अभ्यास, खेल और कॉम्पिटीशन होगा.
दही हांडी के खेल को काफी जोखिम भरा माना जाता है. मटकी तोड़ने के दौरान गिरने से कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं, तो वहीं कुछ ऐसे भी मामले सामने आएं हैं जिनमें मौत तक हो गई. ऐसी स्थिति में अगर सरकार 10 लाख रुपये का बीमा कवर देगी तो युवाओं में उत्साह और बढ़ता देखा जा सकता है. इसके अलावा अगर राज्य सरकार नौकरियों में भी प्राथमिकता देगी, जैसा शिंदे कह रहे हैं, तो भी ये भी इस खेल को बढ़ावा देगा.
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