
रात एक बजे बीजेपी समर्थकों ने ताला तोड़ा. इससे पहले मोती लाल घर की छत पर ही कैद रहे.
मामला उदयपुर का है. यहां बीजेपी के महामंत्री हैं मोतीलाल डांगी. उन्हें राजस्थान के गृहमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता गुलाबचंद कटारिया का करीबी माना जाता है. अपने शुरुआती दिनों में मोतीलाल ज़मीन का कारोबार करते थे. आस-पास के इलाकों के ज़मीनों के सौदे में उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा हुआ था. इसके बाद उन्होंने कम्प्यूटर कोचिंग इंस्टीट्यूट से लेकर कई और कारोबार शुरू कर दिए. ज़मीन की खरीद फरोख्त के विवाद में उन पर कई बार हमला भी हो चुका है. उन पर हमला करने वाले सुपारी किलर भी गिरफ्तार हो चुके हैं. इन्हीं मोती लाल डांगी ने केमिकल फस्ट लिमिटेड फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था. कुछ पैसा उन्होंने चुका दिया था, लेकिन 3.51 करोड़ रुपए का लोन बकाया था. इसे चुकाने के लिए कंपनी दबाव बना रही थी. मोतीलाल डांगी हर बार लोन चुकाने के नाम पर टाल जा रहे थे.

मकान सीज करने की कार्रवाई के दौरान शहर बीजेपी के नेता भी मौजूद थे.
16 अक्टूबर को कंपनी के अधिकारी अमित टांक पुलिस फोर्स के साथ डांगी की कोठी शिवपार्क स्थित 1-ई पहुंचे. बीजेपी के स्थानीय नेताओं के साथ ही उनके जानने वालों को पता चला तो वो भी मौके पर पहुंच गए. लोगों ने कंपनी वालों को बताया कि डांगी अपने परिवार के साथ कहीं गए हुए हैं और घर में कोई नहीं है. इसके बाद कंपनी के अधिकारी ने अपने साथी कर्मचारियों के साथ मिलकर मकान को देखा, उसकी वीडियोग्राफी करवाई और फिर मकान को सील कर दिया. इस दौरान कंपनी ने चैनल गेट बंद कर दिया, बाउंड्रीवॉल पर दो ताले लगा दिए और बाहर मेन गेट पर कोठी के सीज होने का नोटिस चस्पा कर दिया. इस नोटिस में लिखा था कि आगे से इस कोठी के साथ किसी तरह की कोई डील नहीं कर पाएगा, क्योंकि ये संपत्ति अब फाइनेंस कंपनी की है. इसके बाद सभी कर्मचारी और पुलिसवाले वहां से चले गए.

मकान सीज करने की कार्रवाई के दौरान डांगी तीसरी मंजिल पर थे.
लेकिन इस पूरी कार्रवाई के दौरान एक अजीब बात हुई. मकान को जब सील किया जा रहा था तो डांगी का पूरा परिवार तीसरी मंजिल पर था. सील करने की कार्रवाई के दौरान बीजेपी के नेता भी वहां मौजूद थे. बीजेपी के नेताओं का कहना था कि केपिटल फर्स्ट के अधिकारियों ने कमरों के दरवाजों और तीसरी मंजिल का गेट बाहर से बंद कर दिया था. कंपनी के अधिकारियों ने बिजली का कनेक्शन भी काट दिया. जैसे-जैसे बीजेपी नेताओं को इस बात का पता चला, मौके पर नेताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया. करते-कराते शाम हो गई. शाम चार बजे डिप्टी एसपी भगवतसिंह हिंगड़ भी पहुंच गए. 15 मिनट रुकने के बाद वो वहां से चले गए. शाम 6 बजे गिर्वा के तहसीलदार बृजेश गुप्ता भी आ गए, लेकिन उन्होंने भी ताला खोलने में असमर्थतता जताई और थोड़ी देर बाद वो भी चले गए.
रात एक बजे निकल पाए घर से बाहर

मेन गेट का ताला तोड़कर मोती लाल डांगी को घर से बाहर निकाला गया.
मोतीलाल डांगी की कोठी सुबह 10 बजे के करीब सील की गई थी. पूरा परिवार घर में बंधक था. ये स्थिति देर रात एक बजे तक बनी रही थी. रात एक बजे बीजेपी और डांगी के कुछ समर्थकों ने घर का ताला तोड़ा और डांगी और उनके परिवार को बाहर निकाला.
किराएदार को भी निकाल दिया

पुलिस की मौजूदगी में समर्थकों ने गेट पर से फाइनेंस कंपनी की सील हटाई.
डांगी की इस कोठी में पहली मंजिल पर किराएदार रहते हैं. नाम है रणजीत सिंह भाटी. सीज करने की कार्रवाई के दौरान रणजीत सिंह भाटी की पत्नी और बच्चे घर में ही थे. सीज करने के दौरान ही रणजीत सिंह पहुंच गए तो कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें पत्नी और बच्चों को घर से बाहर निकल जाने को कहा. भाटी ने कंपनी के अधिकारियों को बताया कि उनके पास मकान खाली न करने का स्टे ले रखा था. इसके बाद भी फाइनेंस कंपनी ने उनके किराएदार को घर में नहीं जाने दिया.
दो साल से नहीं चुकाई है रकम
डांगी की कोठी सील करने वाले अधिकारी अमित टांक ने बताया कि डांगी के खिलाफ तीन करोड़ 51 लाख 73 हजार 531 रुपये का बकाया है, जो दो साल पुराना है. डांगी ने पैसे नहीं चुकाए तो कंपनी जिला कलेक्टर की कोर्ट में पहुंची. कोर्ट ने 18 अप्रैल 2017 को कंपनी को मकान सीज करने का आदेश जारी कर दिया. इसके खिलाफ डांगी डेप्थ रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में पहुंचे, जहां ट्रिब्यूनल ने उनकी अपील खारिज कर दी. इसके बाद कंपनी ने मकान सीज करने की कार्रवाई शुरू कर दी.वीडियो में देखिए लल्लनटॉप बुलेटिन
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