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शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत 'कीर्ति चक्र', साथियों को बचाने के लिए खुद दे दी जान

कैप्टन अंशुमान सिंह, जवानों को आग से बचाने के लिए बंकर में घुस गए. उन्होंने बंकर में मौजूद चार जवानों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया लेकिन खुद अंदर फंस गए.

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कैप्टन अंशुमान सिंह (फोटोसोर्स- आजतक)

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (republic day) के मौके पर देश के कई लोगों को पद्म पुरस्कार (padma award) और सेना के जवानों को बहादुरी के पुरस्कार (gallantry award) दिए जाते हैं. इस बार के बहादुरी के मेडल्स पाने वाले सैनिकों में कुछ नाम बेहद ख़ास हैं. इन्हीं में से एक हैं- शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह. उन्हें मरणोपरांत 'कीर्ति चक्र' (kirti chakra) से सम्मानित किया गया है. ये शांति काल के दौरान दिया जाने वाला दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है.

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जान देकर बचाई साथियों की जिंदगी

आजतक से जुड़े राम प्रताप सिंह की खबर के मुताबिक़, शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह, उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले थे. उनका कीर्ति चक्र, उनके परिवार को सौंपा गया है. अंशुमान सिंह, देवरिया जिले से आने वाले पहले सैन्यकर्मी हैं जिन्हें ये वीरता पुरस्कार मिला है.

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सियाचिन ग्लेशियर में हाड़ कंपाने वाली ठंड में तैनात सैनिकों को खुद को गर्म रखना बड़ी चुनौती होती है. इसके लिए टेंट और बंकरों के अंदर के अंदर आग जलाने की जरूरत होती है. 19 जुलाई 2023 को एक बंकर में अचानक आग लग गई थी. कैप्टन अंशुमान सिंह, जवानों को आग से बचाने के लिए बंकर में घुस गए. उन्होंने बंकर में मौजूद चार जवानों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया लेकिन खुद अंदर फंस गए. और आग से बुरी तरह झुलस गए थे. उन्हें हेलीकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज़ के दौरान उनका निधन हो गया था.

‘बेटे पर गर्व है’

शहीद अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत हैं. उन्होंने 'आज तक' से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि भारत सरकार ने उनके बेटे को उचित सम्मान दिया है.
उन्होंने कहा,

"एक पिता के लिए पुत्र के खोने से बड़ा कोई दुख नहीं होता लेकिन उसने देश की सेवा में अपने प्राणों को जिस वीरता से न्योछावर किया. आज मुझे उस पर गर्व है. क्योंकि, मैं भी एक सैनिक रहा हूं. एक सैनिक के लिए तिरंगे में लिपट कर आना, मोक्ष के बराबर होता है."

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भावुक होकर रवि प्रताप सिंह आगे कहते हैं कि जाना तो इस दुनिया से सबको है लेकिन जिन कर्मों के साथ वह गए हैं, जिस बहादुरी के साथ अंशुमान देश की सेवा करके गए हैं, वह पीढ़ियां याद रखेंगी.' 
उन्होंने ये भी कहा, 'मैं शहीद बेटे के पिता होने गर्व महसूस करते हैं. जिस तरीके से भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से सहयोग मिला है, उसके लिए कृतज्ञ रहूंगा.'

बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Draupadi Murmu) ने गुरुवार को 80 जवानों के लिए गैलेंट्री अवॉर्ड (Gallantry Award) का ऐलान किया था. 12 जवानों को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार दिया गया. राष्ट्रपति भवन से जारी सूची के मुताबिक, 6 जवानों को कीर्ति चक्र और 16 जवानों को शौर्य चक्र दिया गया है.  

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